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गोड्डा। झारखंड के गोड्डा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र के सकरी फुलवार पंचायत अंतर्गत सलगाटांड़ मौजा में एक कुएं से दो मासूम बच्चों के शव बरामद होने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतकों की पहचान चार वर्षीय आरव कुमार और नौ वर्षीय आयुष कुमार सिंह के रूप में हुई है। दोनों बच्चे 19 अक्टूबर से दुमका से लापता थे। उनके साथ आरव की मां और आयुष की चाची राखी कुमारी भी लापता हुई थीं। बच्चों के शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने राखी देवी नाम की महिला को गिरफ्तार किया है। हालांकि, बच्चों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे किसकी भूमिका थी, यह जांच का विषय है।
सलगाटांड़ में कुएं से बरामद हुए दोनों बच्चों के शव
जानकारी के अनुसार, गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र स्थित सलगाटांड़ के कनकटी टोला में सड़क किनारे एक कुएं से दो बच्चों के शव बरामद किए गए।घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों की पहचान की प्रक्रिया शुरू की।पड़ताल में दोनों बच्चों का संबंध दुमका से लापता हुए परिवार से सामने आया। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी।
एक स्थानीय रिपोर्ट में दोनों बच्चों की उम्र क्रमशः 11 और आठ वर्ष बताई गई है, जबकि लापता होने की पूर्व रिपोर्ट में आयुष की उम्र नौ वर्ष और आरव की उम्र चार वर्ष दर्ज है। इसलिए बच्चों की उम्र के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टों में अंतर है।
19 अक्टूबर को दुमका से लापता हुए थे बच्चे
दोनों बच्चों के लापता होने की घटना 19 अक्टूबर की है।जानकारी के मुताबिक, पाकुड़ जिले के महेशपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बलियाडंगाल गांव निवासी विक्रांत सिंह अपने परिवार के साथ दुमका घूमने आए थे।
उनके साथ पत्नी राखी कुमारी, चार वर्षीय बेटा आरव कुमार, नौ वर्षीय भतीजा आयुष कुमार और एक भतीजी भी मौजूद थी।परिवार दुर्गा पूजा के अवसर पर मेला घूमने और धार्मिक स्थलों के दर्शन करने के लिए निकला था।लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि परिवार की यह यात्रा इतनी दुखद घटना में बदल जाएगी।
मंदिर में पूजा करने के बाद हुए लापता
विक्रांत सिंह के अनुसार, 19 अक्टूबर की शाम वह अपनी कार से परिवार के सदस्यों के साथ दुमका पहुंचे थे।इससे पहले परिवार के लोग सरैयाहाट, चूटोनाथ और सेल्फी ब्रिज होते हुए दुमका आए थे।दुमका पहुंचने के बाद उन्होंने नगर थाना के सामने स्थित पेट्रोल पंप के पास अपनी कार खड़ी की।इसके बाद परिवार के सभी सदस्य धर्मस्थान मंदिर में पूजा करने गए।मंदिर में दर्शन के बाद परिवार के सदस्य एक ठेले पर नाश्ता करने पहुंचे। इसी दौरान राखी कुमारी और दोनों बच्चों के लापता होने की घटना सामने आई।
पति कार के पास करता रहा इंतजार
विक्रांत सिंह ने पुलिस को बताया था कि वह कार के पास परिवार के सदस्यों का इंतजार कर रहे थे।इस दौरान उनकी भतीजी अकेले वापस आई। उसने बताया कि बाकी लोग नाश्ता कर रहे हैं और कुछ देर में लौट आएंगे।लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी राखी और दोनों बच्चे वापस नहीं लौटे।इसके बाद विक्रांत उन्हें खोजने के लिए ठेले के पास पहुंचे, लेकिन वहां कोई नहीं मिला।उन्होंने आसपास के इलाकों में तलाश की और परिचितों से जानकारी लेने का प्रयास किया।काफी खोजबीन के बावजूद तीनों का कोई सुराग नहीं मिल सका।
मोबाइल बंद मिलने से बढ़ी चिंता
पत्नी और बच्चों के अचानक गायब होने से परेशान विक्रांत सिंह ने राखी के मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया।लेकिन उनका मोबाइल फोन बंद मिला।लगातार संपर्क नहीं हो पाने के कारण परिवार की चिंता बढ़ने लगी।इसके बाद विक्रांत सिंह दुमका नगर थाना पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी।उन्होंने पुलिस से पत्नी, बेटे और भतीजे की सकुशल बरामदगी की गुहार लगाई।दुमका नगर थाना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद लापता लोगों की तलाश शुरू कर दी।
पुलिस ने शुरू की थी मोबाइल लोकेशन की जांच
दुमका नगर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर प्रियंका आनंद ने 21 अक्टूबर को बताया था कि महिला और दोनों बच्चों की तलाश की जा रही है।पुलिस के अनुसार, राखी कुमारी का मोबाइल फोन बंद था और उसकी लोकेशन पता लगाने का प्रयास किया जा रहा था।जांच के दौरान पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती थी कि महिला बच्चों को लेकर कहां गई और किन परिस्थितियों में तीनों परिवार से अलग हुए।बच्चों के नाबालिग होने के कारण पुलिस के लिए उनकी तलाश महत्वपूर्ण थी।हालांकि, गुरुवार को गोड्डा जिले में कुएं से शव बरामद होने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
महिला की गिरफ्तारी की जानकारी आई सामने
गोड्डा में दोनों बच्चों के शव मिलने के बाद एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।22 अक्टूबर को प्रकाशित स्थानीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में राखी देवी को गिरफ्तार कर लिया है।हालांकि, गिरफ्तारी की परिस्थितियों, महिला के बयान और उसके खिलाफ लगाए गए विशिष्ट आरोपों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।पुलिस अब घटना की वास्तविक वजह का पता लगाने में जुटी है।यह जांच का विषय है कि दोनों बच्चे कुएं तक कैसे पहुंचे और उनकी मौत के पीछे कोई आपराधिक गतिविधि थी या अन्य परिस्थितियां जिम्मेदार थीं।
बच्चों की मौत के कारणों की जांच जरूरी
दोनों बच्चों के शव कुएं से मिलने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि दुमका से लापता हुए बच्चे गोड्डा जिले के सलगाटांड़ तक कैसे पहुंचे।इसके अलावा यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि बच्चों की मौत कब और किन परिस्थितियों में हुई।मौत के वास्तविक कारणों की जानकारी के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।पुलिस को यह भी पता लगाना होगा कि 19 अक्टूबर से 22 अक्टूबर के बीच महिला और दोनों बच्चों के साथ क्या हुआ था।इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
दो जिलों से जुड़ा मामला, जांच के सामने चुनौती
यह घटना दुमका और गोड्डा दोनों जिलों से जुड़ी हुई है।जहां महिला और बच्चे दुमका से लापता हुए थे, वहीं दोनों बच्चों के शव गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र में बरामद हुए।ऐसे में दोनों स्थानों की घटनाओं को जोड़कर जांच करना महत्वपूर्ण होगा।पुलिस के सामने महिला और बच्चों की गतिविधियों का क्रम पता लगाने के साथ उपलब्ध साक्ष्यों का सत्यापन करने की चुनौती है।जांच में मोबाइल फोन से संबंधित जानकारी, संबंधित व्यक्तियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
मासूमों की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
चार वर्षीय आरव और नौ वर्षीय आयुष के शव मिलने से परिवार को गहरा सदमा पहुंचा है।आरव अपने माता-पिता का बेटा था, जबकि आयुष परिवार का भतीजा था।दोनों बच्चे 19 अक्टूबर को परिवार के साथ घूमने निकले थे, लेकिन तीन दिन बाद उनके शव बरामद होने की दुखद जानकारी सामने आई।इस घटना ने न केवल परिवार, बल्कि आसपास के लोगों को भी स्तब्ध कर दिया है।
पुलिस जांच से सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल पुलिस दोनों बच्चों की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।राखी देवी की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आने के बाद मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण जांच में जुटाए गए साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की मौत का वास्तविक कारण और पूरे घटनाक्रम का खुलासा करना है।
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