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Jharkhand झारखंड। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा रांची और पश्चिम बंगाल में की गई छापेमारी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए गढ़वा से भाजपा सांसद विष्णु दयाल राम ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि जांच एजेंसियों के अधिकार और दायरे पूरी तरह से स्पष्ट हैं और इन्हें राजनीतिक रंग देने की जरूरत नहीं है। बीजेपी सांसद विष्णु दयाल राम ने कहा, “क्या आपने सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुना है या नहीं? क्या आपने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां सुनी हैं या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है, वही मेरी भी राय है।” उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में जांच एजेंसियों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि संवैधानिक रूप से सभी एजेंसियों के अधिकार और जिम्मेदारियां तय हैं।
उन्होंने बताया कि देश में दो प्रकार की एजेंसियां काम करती हैं—एक राज्य सरकार के अधीन और दूसरी केंद्र सरकार के अधीन। दोनों की अपनी-अपनी सीमाएं और अधिकार क्षेत्र हैं। ईडी जैसी केंद्रीय एजेंसियां आर्थिक अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और बड़े वित्तीय घोटालों की जांच के लिए जिम्मेदार हैं। यदि कहीं कानून का उल्लंघन हुआ है, तो एजेंसियों का हस्तक्षेप पूरी तरह जायज है। विष्णु दयाल राम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी किसी बड़े नेता या प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ जांच होती है, तो उसे तुरंत राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया जाता है। जबकि सच्चाई यह है कि एजेंसियां न्यायालय के निर्देशों और कानून के तहत काम करती हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कई मामलों में साफ किया है कि केंद्रीय एजेंसियों को उनके संवैधानिक अधिकारों के तहत काम करने से रोका नहीं जा सकता।
ईडी की हालिया छापेमारी झारखंड की राजधानी रांची और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में हुई है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच के तहत की गई। हालांकि, अभी तक एजेंसी की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में ईडी की कार्रवाई हमेशा सियासी बहस का कारण बनती रही है। एक ओर भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बताती है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे केंद्र सरकार द्वारा विपक्षी दलों को दबाने का प्रयास करार देता है।
बीजेपी सांसद ने यह भी कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह कितना ही बड़ा नेता क्यों न हो। यदि किसी ने गलत किया है, तो जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने जनता से अपील की कि वे तथ्यों को समझें और राजनीतिक बयानबाजी से प्रभावित न हों। कुल मिलाकर, ईडी की छापेमारी को लेकर एक बार फिर केंद्र और राज्यों के बीच एजेंसियों के अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी तापमान और बढ़ने की संभावना है।
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