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Ranchi रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रही गड़बड़ियों और हाल में आयोजित उत्पाद सिपाही परीक्षा में पेपर लीक के गंभीर आरोपों को लेकर राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को रांची स्थित लोक भवन में राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात की और राज्य की भर्ती एजेंसियों जेएसएससी और जेपीएससी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सात सूत्री मांग पत्र सौंपा।
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। राज्यपाल से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी कर रहे थे। प्रतिनिधिमंडल में कई विधायक और पार्टी के प्रमुख नेता शामिल थे। राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि 12 अप्रैल 2026 को हुई झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की उत्पाद सिपाही परीक्षा में गड़बड़ी के गंभीर संकेत मिले हैं।
रांची के तमाड़ में एक निर्माणाधीन भवन से अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाने की बात सामने आई है। यहां से बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया। मौके से कंप्यूटर, प्रिंटर, लैपटॉप और संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद हुए। भाजपा ने इसे संगठित परीक्षा माफिया से जुड़ा मामला बताया है। यह परीक्षा आठ जिलों के 370 केंद्रों पर 583 पदों के लिए आयोजित हुई थी। इसमें करीब 1.48 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। एक केंद्र पर इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद अन्य केंद्रों पर भी गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।
भाजपा ने आरोप लगाया कि इतने सबूतों के बावजूद जेएसएससी पेपर लीक से इनकार कर रहा है, जो संदेह पैदा करता है। भाजपा ने जेएसएसी और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की पिछली परीक्षाओं में भी गड़बड़ियों का जिक्र किया है। पार्टी का कहना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं।
यह भी आरोप लगाया गया कि पहले के मामलों में अनियमितताओं को उजागर करने वालों पर ही कार्रवाई हुई। ज्ञापन में सात प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें सीबीआई जांच, सॉल्वर गैंग की अंतर्राज्यीय जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, अभ्यर्थियों को न्याय, जेपीएस परीक्षाओं में पारदर्शिता, पिछले छह वर्षों की परीक्षाओं की जांच और भविष्य में सख्त सुधार शामिल हैं। भाजपा ने राज्यपाल से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि इससे अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा और भर्ती प्रक्रिया में विश्वास बहाल होगा।
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