झारखंड

सुनील महतो हत्याकांड में बड़ा खुलासा, सचिन का दावा- हाई कमान के आदेश पर हुई थी हत्या

Kavita2
25 Sept 2026 10:21 AM IST
सुनील महतो हत्याकांड में बड़ा खुलासा, सचिन का दावा- हाई कमान के आदेश पर हुई थी हत्या
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जमशेदपुर। जमशेदपुर के तत्कालीन सांसद सुनील महतो की वर्ष 2007 में हुई हत्या के मामले में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) से जुड़े रहे रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन से पूछताछ में नई जानकारियां सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने के बाद पूछताछ में सचिन ने दावा किया है कि सुनील महतो की हत्या माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर की गई थी। उसने खुद को हत्या के ऑपरेशन में शामिल बताया है। पुलिस उसके दावों और संगठन की अन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारियों की पड़ताल कर रही है।

पूर्वी सिंहभूम के पटमदा थाना क्षेत्र के झुंझका गांव निवासी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन लंबे समय तक झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय रहा। पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम सुनील महतो हत्याकांड समेत कई माओवादी मामलों से जुड़ा रहा है। झारखंड सरकार ने उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वह संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर रहा और सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थीं।

सुनील महतो की हत्या 4 मार्च 2007 को पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला क्षेत्र के बाघुड़िया में हुई थी। वहां एक फुटबॉल मैच के दौरान माओवादियों ने हमला किया था। गोलीबारी में तत्कालीन सांसद सुनील महतो समेत चार लोगों की मौत हुई थी। हमलावर सुरक्षाकर्मियों के हथियार भी लेकर फरार हो गए थे। इस चर्चित मामले की जांच में वर्षों से कई माओवादी नेताओं और सदस्यों के नाम सामने आते रहे हैं।

पुलिस पूछताछ में सचिन ने दावा किया कि वह सांसद की हत्या के लिए चलाए गए ऑपरेशन का हिस्सा था और राहुल उर्फ रंजीत पाल के साथ इस कार्रवाई में शामिल हुआ था। इससे पहले भी गिरफ्तार या आत्मसमर्पण करने वाले कुछ माओवादी सदस्यों से पूछताछ में यह बात सामने आने की खबरें रही हैं कि सुनील महतो की हत्या की योजना संगठन के शीर्ष स्तर पर बनी थी और सदस्यों को उसे अंजाम देने का निर्देश दिया गया था। हालांकि पूछताछ में किए गए इन दावों की कानूनी पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।

इस हत्याकांड में सचिन के अलावा असीम मंडल उर्फ आकाश, राहुल उर्फ रंजीत पाल और कई अन्य माओवादी सदस्यों के नाम जांच में सामने आए हैं। हाल में गिरफ्तार माओवादी मदन महतो से पूछताछ में भी पुलिस को मामले से जुड़ी जानकारी मिली थी। रिपोर्ट के मुताबिक मदन ने दावा किया था कि घटना के समय वह राहुल के साथ बाघुड़िया मैदान में मौजूद था और हमले में शामिल माओवादियों को वहां तक पहुंचाने तथा वारदात के बाद सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी निभाई थी।

सचिन के आत्मसमर्पण को इस पुराने हत्याकांड की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्षों तक भूमिगत रहने के कारण जांच एजेंसियां उससे सीधे पूछताछ नहीं कर पा रही थीं। आत्मसमर्पण के बाद अब पुलिस उससे सांसद हत्याकांड के साथ संगठन की संरचना, पुराने हमलों, सक्रिय सदस्यों और झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा पर रहे नेटवर्क के संबंध में पूछताछ कर रही है।

सचिन ने पुलिस को अपने संगठन से जुड़ने के बारे में भी जानकारी दी है। पूछताछ में उसने बताया कि वह वर्ष 2005 से भाकपा (माओवादी) के संपर्क में था और इसके करीब एक वर्ष बाद दलमा दस्ते में शामिल हो गया था। उसने घाटशिला के दामपाड़ा क्षेत्र में माओवादी प्रशिक्षण लेने की बात भी कही है। लंबे समय तक भूमिगत रहने के दौरान वह अपने परिवार से भी काफी हद तक दूर रहा।

पुलिस रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सचिन का प्रभाव क्षेत्र पूर्वी सिंहभूम के पटमदा, बोड़ाम और एमजीएम थाना क्षेत्रों से लेकर पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम, पुरुलिया और आसपास के इलाकों तक बताया जाता रहा है। उसके खिलाफ माओवादी हिंसा, हथियारों से जुड़े मामलों और अन्य गंभीर आरोपों के कई प्रकरण दर्ज रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में आत्मसमर्पण करने वालों में सचिन के साथ उसकी पत्नी मीता उर्फ नयनतारा और एक अन्य माओवादी सदस्य भी शामिल रहे। पश्चिम बंगाल पुलिस के मुताबिक तीनों ने हथियार और गोला-बारूद भी सौंपे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इन पर हत्या, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक कानून और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम से जुड़े कई मामले दर्ज हैं।

सुनील महतो हत्याकांड लगभग दो दशक से जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण मामला रहा है। सीबीआई और झारखंड पुलिस इस मामले में लंबे समय से फरार आरोपियों की तलाश करती रही हैं। सचिन का नाम भी प्रमुख आरोपियों में शामिल रहा और उसके आत्मसमर्पण के बाद मामले से जुड़ी पुरानी कड़ियों को दोबारा जोड़ने की संभावना बनी है।

पूछताछ में सचिन से अन्य माओवादी गतिविधियों और संगठन के मौजूदा नेटवर्क के बारे में भी जानकारी ली जा रही है। उसने कुछ अन्य हमलों में अपनी भूमिका को लेकर भी पुलिस के सामने दावे किए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जंगल लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं।

फिलहाल पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण काम सचिन से मिली जानकारियों का स्वतंत्र साक्ष्यों और पुराने केस रिकॉर्ड से मिलान करना है। पूछताछ में दिया गया बयान अपने आप में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं होता। सुनील महतो हत्याकांड में किस स्तर पर योजना बनी, किन लोगों ने इसे अंजाम दिया और प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका थी, इन सवालों का अंतिम निर्धारण जांच और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगा।

करीब 19 साल पुराने सुनील महतो हत्याकांड में सचिन के आत्मसमर्पण और पूछताछ से एक बार फिर जांच को नई दिशा मिलने की संभावना बनी है। पुलिस अब उसके दावों को पुराने साक्ष्यों, गिरफ्तार आरोपियों के बयानों और जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड से जोड़कर देख रही है। खास तौर पर संगठन के शीर्ष नेतृत्व से हत्या का निर्देश मिलने के उसके दावे की जांच इस बहुचर्चित हत्याकांड की साजिश से जुड़ी कड़ियों को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

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