झारखंड

राष्ट्रव्यापी हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं ठप करीब 100 करोड़ का लेनदेन प्रभावित

Kavita2
11 Sept 2026 2:57 PM IST
राष्ट्रव्यापी हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं ठप करीब 100 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
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मेदिनीनगर। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और ऑल इंडिया रीजनल रूरल बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के आह्वान पर शुक्रवार को हुई राष्ट्रव्यापी हड़ताल का पलामू जिले में व्यापक असर देखने को मिला। जिले के अधिकांश सरकारी बैंक बंद रहे और शाखाओं के प्रवेश द्वार पर दिनभर ताले लटके रहे। बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी-अपनी शाखाओं के बाहर प्रदर्शन करते हुए लंबित मांगों के समर्थन में नारेबाजी की।

इस एकदिवसीय हड़ताल के कारण जिले के एक दर्जन से अधिक बैंकों की करीब 200 शाखाओं में सामान्य कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा। झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक की सभी 73 शाखाएं भी बंद रहीं। बैंक यूनियनों के अनुसार हड़ताल से जिले में लगभग 100 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। चेक क्लियरेंस रुकने और शाखा स्तर की सेवाएं बंद रहने के कारण व्यापारियों और सामान्य ग्राहकों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी।

सुबह बैंक शाखाओं पर पहुंचे ग्राहकों को हड़ताल की जानकारी मिलने के बाद वापस लौटना पड़ा। नकद जमा और निकासी, चेक जमा करने, पासबुक अपडेट, ड्राफ्ट, कर्ज संबंधी काम, केवाईसी और अन्य काउंटर सेवाएं प्रभावित रहीं। कई ग्राहक जरूरी बैंकिंग कार्य के लिए दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से जिला मुख्यालय और प्रखंडों की शाखाओं तक पहुंचे थे लेकिन बैंक बंद मिलने से उनका काम नहीं हो सका।

हड़ताल में शामिल बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की व्यवस्था शीघ्र लागू करने की मांग उठाई। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बैंक कर्मियों से सप्ताह में पांच दिन काम लिया जाए और शनिवार तथा रविवार को अवकाश घोषित किया जाए। यूनियन प्रतिनिधियों के अनुसार यह मांग लंबे समय से लंबित है लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया।

एसोसिएशन की दूसरी प्रमुख मांग प्रॉफिट लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई व्यवस्था में संशोधन करने की है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि मौजूदा प्रोत्साहन व्यवस्था में विसंगतियां हैं और इसका लाभ सभी कर्मचारियों को समान तथा न्यायसंगत तरीके से नहीं मिल रहा। यूनियनें पीएलआई के मानकों में बदलाव कर बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखने की मांग कर रही हैं।

राष्ट्रव्यापी स्तर पर आयोजित इस हड़ताल का प्रभाव सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अधिक दिखाई दिया। बैंक यूनियनों ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह के साथ वेतन और पेंशन से जुड़ी लंबित मांगों को भी प्रमुखता से उठाया है। देश के विभिन्न हिस्सों में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रदर्शन तथा सभाएं आयोजित कीं। इंडियन एक्सप्रेस

पलामू जिले में बैंक शाखाओं के बंद रहने से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। व्यवसायियों के चेक क्लियर नहीं हो सके और बैंक खाते से संबंधित कई जरूरी प्रक्रियाएं लंबित रह गईं। जिन व्यापारियों को माल खरीदने या भुगतान करने के लिए बैंकिंग दस्तावेज पूरे करने थे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। बड़े मूल्य के चेक और शाखा से होने वाले वित्तीय लेनदेन रुकने से कारोबार पर सीधा असर पड़ा।

ग्रामीण क्षेत्रों में हड़ताल का असर अधिक दिखाई दिया क्योंकि वहां कई लोगों के लिए ग्रामीण बैंक की शाखाएं वित्तीय सेवाओं का प्रमुख माध्यम हैं। झारखंड राज्य ग्रामीण बैंक की सभी 73 शाखाएं बंद रहने से किसानों, पेंशनधारियों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे कारोबारियों के काम प्रभावित हुए। कई ग्राहकों को नकद निकासी और जमा जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी इंतजार करना पड़ा।

शाखाएं बंद रहने के बावजूद यूपीआई, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहीं। इससे डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने वाले ग्राहकों को कुछ राहत मिली। हालांकि चेक क्लियरेंस, नकद से जुड़े बड़े लेनदेन, ऋण दस्तावेज, केवाईसी और अन्य शाखा आधारित कार्य ऑनलाइन माध्यमों से पूरे नहीं हो सके। देशभर में भी हड़ताल के दौरान काउंटर सेवाएं प्रभावित रहीं जबकि अधिकांश डिजिटल सेवाएं चालू रहीं। जनसत्ता

बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग केवल अतिरिक्त अवकाश का विषय नहीं है। उनका तर्क है कि बैंकिंग क्षेत्र में काम का दबाव लगातार बढ़ा है और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के बावजूद शाखाओं में कर्मचारियों पर जिम्मेदारियों का बोझ कम नहीं हुआ। सरकारी योजनाओं, ऋण वितरण, वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में बैंक कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आगे आंदोलन को तेज किया जा सकता है। संगठनों का मानना है कि वार्ता के माध्यम से पांच दिवसीय बैंकिंग और पीएलआई से जुड़ी विसंगतियों का समाधान निकाला जाना चाहिए। कर्मचारियों ने दावा किया कि लंबे समय से मांग उठाने के बावजूद ठोस फैसला नहीं होने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।

एक दिन की हड़ताल से बैंकिंग कामकाज का दबाव अगले कार्यदिवस पर बढ़ने की संभावना है। शुक्रवार को लंबित हुए चेक, नकद जमा, निकासी और दूसरे दस्तावेजी कार्य बैंक खुलने के बाद निपटाए जाएंगे। इससे शाखाओं में ग्राहकों की भीड़ बढ़ सकती है। चेक क्लियरेंस की प्रक्रिया सामान्य होने में भी कुछ अतिरिक्त समय लग सकता है।

करीब 200 शाखाओं का कामकाज ठप होने और लगभग 100 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित होने का दावा जिले में हड़ताल के व्यापक असर को दिखाता है। विशेष रूप से व्यापारियों, ग्रामीण ग्राहकों और शाखा आधारित सेवाओं पर निर्भर लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अब बैंक कर्मचारी संगठनों की निगाह संबंधित अधिकारियों और सरकार की प्रतिक्रिया पर है।

फिलहाल यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मुख्य मांग पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना और प्रॉफिट लिंक्ड इंसेंटिव की व्यवस्था में उचित संशोधन करना है। शुक्रवार की हड़ताल के माध्यम से कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता दिखाई और चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।

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