झारखंड

तीन पहाड़ी गिरोह का सामने आया बांग्लादेश कनेक्शन , जांच में चौकाने वाले खुलासे

Shantanu Roy
3 Nov 2021 9:25 AM GMT
तीन पहाड़ी गिरोह का सामने आया बांग्लादेश कनेक्शन , जांच में चौकाने वाले खुलासे
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झारखंड के साहिबगंज जिले में तीन पहाड़ी नाम का एक कस्बा है. जहां के रहने वाले कुछ लोग चोरी के धंधे में लिप्त हैं. सभी पेशेवर चोर हैं. हाल के दिनों में मोबाइल चोरी की घटनाएं राजधानी में बेतहाशा बढ़ गई थी

जनता से रिश्ता। झारखंड के साहिबगंज जिले में तीन पहाड़ी नाम का एक कस्बा है. जहां के रहने वाले कुछ लोग चोरी के धंधे में लिप्त हैं. सभी पेशेवर चोर हैं. हाल के दिनों में मोबाइल चोरी की घटनाएं राजधानी में बेतहाशा बढ़ गई थी, पुलिस की टीम जब जांच में जुटी तब गुप्त सूचना के आधार पर रांची के चुटिया इलाके से तीन पहाड़ी गिरोह के तीन सदस्य धर दबोचे गए.

तीन पहाड़ी गिरोह का कनेक्शन बांग्लादेश से
पूछताछ में गिरोह के सदस्यों ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. चुटिया थाना प्रभारी वेंकटेश कुमार के नेतृत्व में कृष्णापुरी इलाके के किराए के मकान पर छापेमारी कर पुलिस की टीम ने साहिबगंज के तीन पहाड़ी कस्बे के रहने वाले विजय हाशिम अंसारी और आकाश महतो को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार अपराधियों के पास से पुलिस ने 60 चोरी के मोबाइल बरामद किए हैं.
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. आरोपियों के अनुसार वे लोग झारखंड के कई शहरों से मोबाइल चोरी कर उसे भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित फरक्का भेज देते थे. वहां इस गिरोह के कुछ बेहद टेक्निकल सदस्य एक्टिव है जो चोरी कर भेजे गए मोबाइल का ईएमआई और ऊपर का कवर बदलकर उसे बिल्कुल नया रूप दे देते थे. मोबाइल को फॉर्मेट कर उसे फिर से नए डब्बे में पैक कर दिया था. नए पैकिंग के बाद सभी मोबाइल को तस्करी के जरिए बांग्लादेश भेज दिया जाता था. जहां के दुकानों में यह मोबाइल खुलेआम बिकते हैं.
फरक्का में है चोरों का कारखाना
भारत बांग्लादेश के बॉर्डर पर पश्चिम बंगाल में फरक्का स्थित है. जहां पर मोबाइल चोरों का एक छोटा सा कारखाना है. झारखंड के अलग-अलग शहरों से चोरी के मोबाइल एजेंटों के माध्यम से फरक्का पहुंचा था. जिसके बाद कारखाने में उसे नया रूप दिया जाता था.
जितने महंगे मोबाइल उतनी ज्यादा कीमत मिलती थी चोरों को
तीन पहाड़ी गिरोह के सदस्य राजधानी रांची सहित दूसरे शहरों में घूम-घूमकर मोबाइल चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे. जब एक साथ 100 से अधिक मोबाइल जमा हो जाते थे, तब उसे फरक्का से आए एजेंट के हवाले कर दिया जाता था. गिरफ्तार अपराधियों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि उन्हें 10 हजार के मोबाइल का तीन हजार, 20 हजार के मोबाइल का 7 हजार मिलता था. वहीं अगर 50,000 से ज्यादा के मोबाइल चोरी करने पर उन्हें उसके एवज में गिफ्ट भी मिलता था, साथ ही 20 हजार रुपये भी मिलते थे.
बच्चे और महिलाएं भी शामिल है गिरोह में
तीन पहाड़ी गिरोह में छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं. महिलाएं और बच्चे मॉल में खरीदारी करने वाले लोगों के आसपास घूमकर उनके पर्स और पॉकेट से मोबाइल गायब कर तुरंत उसे बाहर खड़े पुरुष सदस्यों को दे देते थे. इस दौरान अगर किसी बच्चे को शक के आधार पर पकड़ा भी जाता था तब भी उनके पास से मोबाइल बरामद नहीं हो पाता था.
अलग-अलग ग्रुप है एक्टिव
साहिबगंज के तीन पहाड़ी कस्बे से चोरों का एक बड़ा गिरोह झारखंड ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मोबाइल चोरी का काम करता है. यह लोग एक साथ चोरी की वारदातों को अंजाम देने के लिए नहीं निकलते हैं. बल्कि अलग-अलग शहरों में 3 से 4 लोग जाते हैं. जब बहुत ज्यादा चोरियां इनके द्वारा अंजाम दे दी जाती है तब ये शहर बदल लेते हैं.
कितने मोबाइल चुराए याद नहीं
रांची से गिरफ्तार तीनों अपराधी तीन पहाड़ी क्षेत्र के ही रहने वाले हैं. वह अलग-अलग समय में रांची में अलग-अलग मोहल्लों में किराए का मकान ले कर रहा करते थे. पूछताछ में तीनों आरोपियों ने बताया है कि उन्हें यह याद भी नहीं है कि उन्होंने कितनी मोबाइल चोरी की है. दो हजार से ज्यादा मोबाइल अब तक वे बांग्लादेश भेज चुके हैं.
गिरोह के दूसरे सदस्यों की तलाश तेज
पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार तीनों अपराधियों ने बताया है कि उनके कई सदस्य अभी भी रांची, खूंटी, बोकारो और धनबाद जैसे शहरों में एक्टिव हैं. पूछताछ के आधार पर रांची पुलिस दूसरे जिलों की पुलिस से संपर्क में है, ताकि तीन पहाड़ी गिरोह के दूसरे सदस्यों की गिरफ्तारी हो सके.


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