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अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बिना गिट्टी वाले Ballast-less Track का इस्तेमाल किया जा रहा है।
धनबाद : भारतीय रेलवे अपने स्टेशनों और रेल पटरियों को आधुनिक बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। इसी क्रम में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कई स्टेशनों पर पारंपरिक पत्थर वाले ट्रैक की जगह आधुनिक तकनीक से तैयार किए गए बिना गिट्टी (Ballast-less) ट्रैक बिछाने की योजना पर काम किया जा रहा है। खास बात यह है कि इन ट्रैकों के निर्माण के बावजूद ट्रेनों की निर्धारित गति पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
रेलवे का उद्देश्य स्टेशनों के पुनर्विकास के साथ-साथ ट्रैक संरचना को भी आधुनिक और टिकाऊ बनाना है। इससे भविष्य में रखरखाव की जरूरत कम करने और रेल परिचालन को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।
क्या होते हैं बिना गिट्टी वाले ट्रैक?
आमतौर पर रेलवे ट्रैक के नीचे पत्थर की गिट्टी बिछाई जाती है। यही गिट्टी पटरियों को मजबूती देने और भार को जमीन तक पहुंचाने में मदद करती है। वहीं Ballast-less Track में पारंपरिक गिट्टी की जगह कंक्रीट आधारित संरचना का इस्तेमाल किया जाता है।
इस तकनीक में रेल को मजबूत और स्थायी आधार पर स्थापित किया जाता है। इसका इस्तेमाल आधुनिक रेलवे परियोजनाओं और कई हाई-स्पीड रेल प्रणालियों में भी किया जाता है।
अमृत भारत स्टेशनों पर क्यों अपनाई जा रही तकनीक?
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। स्टेशन भवन, प्लेटफॉर्म, यात्री सुविधाओं और ट्रैक से जुड़े बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया जा रहा है।
स्टेशन क्षेत्रों में बिना गिट्टी वाले ट्रैक के इस्तेमाल से कई फायदे मिल सकते हैं—
ट्रैक का आधार अधिक स्थिर रहता है।
नियमित गिट्टी रखरखाव की आवश्यकता कम हो सकती है।
स्टेशन परिसर में साफ-सफाई बेहतर रखने में मदद मिलती है।
लंबे समय में रखरखाव की लागत कम हो सकती है।
आधुनिक स्टेशन डिजाइन के साथ इसे बेहतर तरीके से एकीकृत किया जा सकता है।
ट्रेनों की रफ्तार पर नहीं पड़ेगा असर
यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रैक की इस नई तकनीक से ट्रेनों की गति कम करने की जरूरत नहीं होगी, बशर्ते संबंधित सेक्शन की डिजाइन और परिचालन मानकों के अनुसार निर्माण किया जाए।
रेलवे ट्रैक की गति केवल गिट्टी या बिना गिट्टी की तकनीक पर निर्भर नहीं करती। इसमें ट्रैक की डिजाइन, कर्व, सिग्नलिंग, पुल, लेवल क्रॉसिंग, सुरक्षा मानक और संबंधित सेक्शन की अनुमति प्राप्त गति जैसे कई कारक महत्वपूर्ण होते हैं।
रखरखाव में हो सकती है आसानी
बिना गिट्टी वाले ट्रैक की एक प्रमुख विशेषता इसकी स्थिर संरचना है। पारंपरिक ट्रैक में समय के साथ गिट्टी के खिसकने, दबने या खराब होने पर उसे व्यवस्थित करने की जरूरत पड़ती है। Ballast-less Track में यह समस्या अपेक्षाकृत कम हो सकती है।
हालांकि, इस तकनीक के रखरखाव और मरम्मत के लिए अलग तरह की विशेषज्ञता और उपकरणों की आवश्यकता होती है।
यात्रियों को क्या फायदा मिलेगा?
अमृत भारत स्टेशनों पर आधुनिक ट्रैक तकनीक के इस्तेमाल का सीधा उद्देश्य केवल ट्रेनों की गति बढ़ाना नहीं है। इससे स्टेशन क्षेत्र में रेल परिचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने और आधुनिक बुनियादी ढांचे को विकसित करने में मदद मिल सकती है।
यात्री सुविधाओं में सुधार के साथ बेहतर ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर रेलवे के दीर्घकालिक आधुनिकीकरण का हिस्सा है।
रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में कदम
भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों से ट्रैक अपग्रेडेशन, विद्युतीकरण, सिग्नलिंग, स्टेशन पुनर्विकास और आधुनिक ट्रेनों से जुड़े कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना इसी व्यापक आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है।
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