
सिमडेगा। झारखंड में रूबेला संक्रमण के मामले एक बार फिर सामने आने लगे हैं। सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड में रूबेला से संक्रमित एक और बच्ची मिली है। प्रखंड में महज 24 घंटे के भीतर दो मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रभावित क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के साथ बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम संक्रमित बच्चों के संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटाने और आसपास के इलाकों में संदिग्ध लक्षण वाले बच्चों की पहचान करने में जुटी है। साथ ही टीकाकरण से छूटे बच्चों की पहचान कर उन्हें वैक्सीन लगाने पर जोर दिया जा रहा है।
24 घंटे में दूसरा मामला
ठेठईटांगर प्रखंड में 24 घंटे के भीतर रूबेला का दूसरा मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। नया संक्रमित मरीज भी एक बच्ची है। लगातार दो मामले मिलने के बाद विभाग ने क्षेत्र में संक्रमण की स्थिति पर नजर रखना शुरू कर दिया है।
स्वास्थ्य कर्मियों को प्रभावित इलाके में सक्रिय निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन बच्चों में बुखार, शरीर पर लाल चकत्ते या रूबेला से मिलते-जुलते अन्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं, उनके स्वास्थ्य की जांच की जा रही है।
लगातार दो मामले सामने आने के बाद यह पता लगाने का प्रयास भी किया जा रहा है कि दोनों मामलों के बीच कोई संपर्क है या संक्रमण अलग-अलग स्रोतों से फैला है।
शिविर लगाकर बच्चों का टीकाकरण
संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण अभियान पर जोर दिया है। प्रभावित क्षेत्र में शिविर लगाकर बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है। विशेष रूप से उन बच्चों की पहचान की जा रही है जिन्हें निर्धारित टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार आवश्यक खुराक नहीं मिल पाई है।
स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि कोई भी पात्र बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मी स्थानीय स्तर पर परिवारों से संपर्क कर रहे हैं और अभिभावकों को टीकाकरण के महत्व की जानकारी दी जा रही है।
रूबेला से बचाव में टीकाकरण सबसे महत्वपूर्ण उपायों में शामिल है। भारत के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में बच्चों को मीजल्स-रूबेला यानी एमआर वैक्सीन दी जाती है।
क्या है रूबेला?
रूबेला एक संक्रामक वायरल बीमारी है। इसे आमतौर पर जर्मन मीजल्स के नाम से भी जाना जाता है। इसका संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के माध्यम से फैल सकता है।
रूबेला से संक्रमित व्यक्ति में हल्का बुखार, त्वचा पर लाल या गुलाबी चकत्ते, आंखों में लालिमा, सिरदर्द और लिम्फ नोड्स में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए संक्रमण की पहचान तुरंत नहीं हो पाती।
बच्चों में यह बीमारी अक्सर हल्के रूप में दिखाई देती है, लेकिन इसका संक्रमण गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष चिंता का विषय माना जाता है। गर्भावस्था के शुरुआती चरण में रूबेला संक्रमण होने पर गर्भस्थ शिशु को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा जोखिम
रूबेला को लेकर स्वास्थ्य विभाग इसलिए भी गंभीर रहता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान इसका संक्रमण गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। खासकर गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में संक्रमण होने पर गर्भस्थ शिशु में जन्मजात रूबेला सिंड्रोम का खतरा हो सकता है।
इससे शिशु में सुनने, देखने या हृदय से संबंधित जन्मजात समस्याएं हो सकती हैं। यही वजह है कि रूबेला के मामले मिलने पर स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने और टीकाकरण कवरेज बढ़ाने पर विशेष ध्यान देता है।
संपर्क में आए लोगों पर नजर
स्वास्थ्य विभाग की टीम अब संक्रमित बच्चियों के संपर्क में आए लोगों की जानकारी भी जुटा रही है। परिवार के सदस्यों और आसपास रहने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है।
यदि किसी बच्चे में संदिग्ध लक्षण दिखाई देते हैं तो उसकी जांच कराने की व्यवस्था की जा सकती है। स्वास्थ्य कर्मियों को क्षेत्र में बुखार और चकत्ते वाले मामलों की जानकारी तत्काल देने को कहा गया है।
साथ ही स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा सकती है। विभाग का उद्देश्य संभावित संक्रमित व्यक्ति की जल्द पहचान कर संक्रमण को आगे फैलने से रोकना है।
अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह
रूबेला के मामले सामने आने के बाद अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखने की जरूरत है। यदि बच्चे को बुखार के साथ शरीर पर चकत्ते दिखाई दें तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय स्वास्थ्य केंद्र या चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
संदिग्ध संक्रमण की स्थिति में बच्चे को अन्य बच्चों से अनावश्यक संपर्क से बचाना भी संक्रमण की श्रृंखला को कम करने में मदद कर सकता है। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा देने से बचना चाहिए।
इसके अलावा बच्चों का टीकाकरण रिकॉर्ड जांचना भी जरूरी है। यदि कोई निर्धारित टीका छूट गया है तो स्वास्थ्य कर्मियों या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर आगे की सलाह ली जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी सतर्कता
ठेठईटांगर में कम समय के भीतर दो मामले मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और टीकाकरण गतिविधियां तेज कर दी हैं। स्वास्थ्य कर्मियों को क्षेत्र में लगातार संपर्क बनाए रखने और किसी नए संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत देने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल विभाग का मुख्य फोकस संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकने, टीकाकरण से छूटे बच्चों तक पहुंचने और संदिग्ध मामलों की जल्द पहचान पर है। आने वाले दिनों में क्षेत्र में स्वास्थ्य निगरानी जारी रहने की संभावना है।
लगातार दो बच्चियों में संक्रमण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई तेज हुई है। अब आगे की निगरानी से यह स्पष्ट होगा कि संक्रमण केवल सीमित क्षेत्र तक है या अन्य स्थानों पर भी संदिग्ध मामले सामने आते हैं।





