झारखंड

जामताड़ा सदर अस्पताल में इलाज के लिए लाए गए बच्चे की मौत पर फूटा गुस्सा

SHIDDHANT
13 March 2026 8:44 PM IST
जामताड़ा सदर अस्पताल में इलाज के लिए लाए गए बच्चे की मौत पर फूटा गुस्सा
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Jamtara जामताड़ा। झारखंड के जामताड़ा सदर अस्पताल में उचित इलाज के अभाव में एक तीन वर्षीय मासूम की मौत के बाद जिले का सियासी और सामाजिक पारा चढ़ गया है। इस घटना से आक्रोशित शहरवासियों ने शुक्रवार को न केवल विरोध प्रदर्शन किया, बल्कि सूबे के स्वास्थ्य मंत्री और स्थानीय विधायक डॉ. इरफान अंसारी का पुतला दहन कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि अपने ही क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने में विफल रहने वाले मंत्री को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
जामताड़ा बाजार निवासी संटू साव के तीन वर्षीय पुत्र अंकुश साव को अचानक पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई, जिसके बाद परिजन उसे लेकर आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि गुरुवार को अस्पताल में कोई शिशु रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) मौजूद नहीं था। अफरा-तफरी के बीच बच्चे को ऑक्सीजन तो लगाया गया, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक के अभाव में स्थिति बिगड़ती गई। अंततः अस्पताल प्रबंधन ने अपनी असमर्थता जताते हुए उसे बाहर रेफर कर दिया। बदहवास परिजन बच्चे को लेकर पश्चिम बंगाल के आसनसोल जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया।
इस घटना के विरोध में शुक्रवार को बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक समाहरणालय पहुंचे और उपायुक्त रवि आनंद को मांग पत्र सौंपा। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे जीतू सिंह और आकाश साव ने कहा कि जामताड़ा सदर अस्पताल महज एक 'रेफरल सेंटर' बनकर रह गया है। यहां न तो बच्चों के डॉक्टर हैं और न ही आईसीयू या वेंटिलेटर जैसी बुनियादी सुविधाएं।
लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक तरफ स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी हाईटेक स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करते हैं, वहीं उनके अपने ही गृह जिले में बच्चे इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। मांग पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि यदि सदर अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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