
धनबाद। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में अनुकंपा के आधार पर नौकरी हासिल करने में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपने पड़ोसी के नाम और पहचान का इस्तेमाल कर मृतक आश्रित कोटे में नौकरी हासिल कर ली और करीब 40 वर्षों तक कंपनी में काम करता रहा। अब पीएफ की राशि पर भी दावा किए जाने की बात सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। मामले में न्याय की मांग को लेकर बुधवार सुबह धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर एक दंपती धरने पर बैठ गया।
धरने पर बैठे रामू तुरी का आरोप है कि उनके नाम का इस्तेमाल कर पड़ोसी रामू साव ने BCCL में अनुकंपा के आधार पर नौकरी हासिल की। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और अपने परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।
रणधीर वर्मा चौक पर धरने पर बैठा दंपती
अनुकंपा नियुक्ति में कथित फर्जीवाड़े के विरोध में रामू तुरी अपनी पत्नी के साथ बुधवार सुबह रणधीर वर्मा चौक पहुंचे और धरना शुरू कर दिया। दंपती का कहना है कि लंबे समय से वे अपनी शिकायत लेकर संबंधित अधिकारियों के पास जा रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित न्याय नहीं मिला।
धरने के जरिए उन्होंने BCCL प्रबंधन और प्रशासन का ध्यान मामले की ओर खींचने की कोशिश की है। उनका कहना है कि पहचान और दस्तावेजों से जुड़े इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पिता की खदान में हुई थी मौत
रामू तुरी के अनुसार उनके पिता की वर्ष 1993 में खदान में डूबने से मौत हो गई थी। पिता की मृत्यु के बाद परिवार के किसी पात्र आश्रित को BCCL में अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलने का प्रावधान था।
उनका आरोप है कि इसी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ उन्हें या उनके परिवार के वास्तविक पात्र सदस्य को मिलने के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति ने उठा लिया।
रामू तुरी का दावा है कि उनके पड़ोसी रामू साव ने उनकी पहचान का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की और लंबे समय तक उनके नाम पर ही कंपनी में काम करता रहा।
पड़ोसी पर पहचान इस्तेमाल करने का आरोप
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप पहचान के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। रामू तुरी का कहना है कि रामू साव ने खुद को रामू तुरी बताकर BCCL में नौकरी हासिल की।
यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो यह केवल अनुकंपा नियुक्ति में अनियमितता का मामला नहीं रहेगा, बल्कि दस्तावेज और पहचान के कथित फर्जी इस्तेमाल से भी जुड़ सकता है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
करीब 40 साल नौकरी करने का दावा
शिकायतकर्ता की ओर से दावा किया गया है कि कथित रूप से गलत पहचान के आधार पर नौकरी हासिल करने वाला व्यक्ति करीब 40 वर्षों तक BCCL में काम करता रहा।
इसी दावे ने मामले को और गंभीर बना दिया है। सवाल उठ रहा है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल किया गया था तो नियुक्ति के समय दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ और इतने लंबे समय तक यह मामला सामने क्यों नहीं आया।
यह भी जांच का विषय हो सकता है कि नौकरी के दौरान कर्मचारी रिकॉर्ड, पहचान दस्तावेज, वेतन भुगतान, बैंक खाते, सेवा पुस्तिका और अन्य दस्तावेजों में किस व्यक्ति की जानकारी दर्ज थी।
PF की राशि पर भी दावे का आरोप
रामू तुरी के मुताबिक मामला अब भविष्य निधि यानी PF की राशि तक पहुंच गया है। उनका आरोप है कि उनके नाम पर नौकरी करने वाला व्यक्ति अब पीएफ की राशि पर भी दावा कर रहा है।
इसी के बाद शिकायतकर्ता ने मामले को गंभीरता से उठाते हुए कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि जिस पहचान को लेकर पहले ही विवाद है, उसी से जुड़े वित्तीय लाभ का भुगतान उचित जांच के बिना नहीं किया जाना चाहिए।
पीएफ भुगतान से पहले कर्मचारी के वास्तविक रिकॉर्ड और पहचान का सत्यापन इस विवाद को सुलझाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
दस्तावेजों की जांच से खुलेगा मामला
कथित फर्जीवाड़े की सच्चाई का पता लगाने के लिए पुराने रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। मृत कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड, आश्रितों से जुड़े दस्तावेज, अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन, नियुक्ति पत्र, कर्मचारी की सेवा पुस्तिका और पहचान से संबंधित रिकॉर्ड की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इसके अलावा नियुक्ति के समय जमा किए गए प्रमाणपत्रों और वर्तमान पहचान दस्तावेजों का मिलान भी किया जा सकता है।
चूंकि मामला कई दशक पुराना बताया जा रहा है, इसलिए पुराने दस्तावेजों को जुटाना और उनका सत्यापन जांच एजेंसियों तथा संबंधित विभागों के लिए अहम होगा।
अनुकंपा नियुक्ति पर उठे सवाल
अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार को आर्थिक संकट से बचाना होता है। ऐसी नियुक्तियों में मृत कर्मचारी के वास्तविक आश्रित की पहचान और पात्रता का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है।
धनबाद में सामने आए इस मामले ने इसी सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि नियुक्ति के समय किस स्तर पर चूक हुई और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी इसमें रही।
दंपती ने मांगी निष्पक्ष जांच
धरने पर बैठे दंपती ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि वास्तविक हकदार और नौकरी करने वाले व्यक्ति की पहचान स्पष्ट की जाए तथा दस्तावेजों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए।
दंपती ने संबंधित अधिकारियों से यह भी मांग की है कि पीएफ या अन्य सेवा लाभ से जुड़ा कोई फैसला सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही लिया जाए।
BCCL के रिकॉर्ड पर टिकी नजर
अब मामले में BCCL के पुराने रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। कंपनी के दस्तावेजों से यह पता चल सकता है कि संबंधित पद पर किस नाम से नियुक्ति हुई, आवेदन में कौन से प्रमाणपत्र दिए गए और कर्मचारी की पहचान का सत्यापन किस आधार पर किया गया था।
कई दशक पुराने मामले में रिकॉर्ड की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी। यदि दस्तावेज सुरक्षित हैं तो उनकी मदद से शिकायतकर्ता के आरोपों की सत्यता जांची जा सकती है।
जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल रामू तुरी की ओर से रामू साव पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। दूसरे पक्ष और BCCL प्रबंधन का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ होगी।
रणधीर वर्मा चौक पर धरने पर बैठे दंपती ने प्रशासन और BCCL से हस्तक्षेप की मांग की है। अब निगाह इस बात पर है कि कथित फर्जी अनुकंपा नियुक्ति और पीएफ के दावे को लेकर संबंधित अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं और दशकों पुराने रिकॉर्ड की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।





