झारखंड

सूखे संकट के बीच कृषि विभाग का प्लान, धनबाद किसानों को वैकल्पिक खेती अपनाने की अपील

nidhi
27 July 2026 9:44 AM IST
सूखे संकट के बीच कृषि विभाग का प्लान, धनबाद किसानों को वैकल्पिक खेती अपनाने की अपील
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सूखे से निपटने की तैयारी तेज, कृषि विभाग ने किसानों को बताए वैकल्पिक खेती के तरीके

Jharkhand : धनबाद जिले में बारिश की कमी और सूखे जैसी स्थिति से परेशान किसानों के लिए कृषि विभाग ने महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। विभाग ने किसानों को पारंपरिक फसलों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक खेती और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी है। इससे किसानों को नुकसान कम करने और आय के नए स्रोत विकसित करने में मदद मिल सकती है।

कम बारिश में भी खेती करने की सलाह
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को ऐसी फसलों का चयन करना चाहिए, जिनमें कम पानी की आवश्यकता होती है। सूखे की स्थिति में धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों की जगह वैकल्पिक फसलों को प्राथमिकता देना फायदेमंद हो सकता है।
किसानों को मोटे अनाज, दलहन, तिलहन और सब्जियों की खेती की ओर बढ़ने की सलाह दी गई है।
वैकल्पिक खेती से नुकसान कम होगा
बारिश कम होने पर कई बार किसानों को खरीफ फसलों में भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में वैकल्पिक खेती अपनाने से जोखिम को कम किया जा सकता है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मक्का, अरहर, मूंग, उड़द, बाजरा, रागी और अन्य कम अवधि वाली फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन दे सकती हैं।
किसानों को तकनीकी जानकारी दी जा रही
कृषि विभाग की ओर से किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, बीज चयन, सिंचाई प्रबंधन और फसल संरक्षण के बारे में जानकारी दी जा रही है।
इसके अलावा किसानों को खेतों में नमी बनाए रखने, जैविक खाद के इस्तेमाल और जल संरक्षण के उपाय अपनाने की सलाह भी दी जा रही है।
सब्जी और बागवानी से बढ़ सकती है आय
विभाग ने किसानों को सब्जी उत्पादन और बागवानी से जुड़ने का भी सुझाव दिया है। कम क्षेत्र में सब्जियों की खेती करके किसान अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं।
टमाटर, मिर्च, बैंगन, भिंडी और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प साबित हो सकती है।
सूखे की चुनौती से निपटने की तैयारी
धनबाद में बारिश की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों को समय पर सही सलाह और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि मौसम की मार से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे स्थानीय मौसम और मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए फसल का चुनाव करें और वैज्ञानिक तरीके से खेती करें।
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