
जमशेदपुर। मरीन ड्राइव में सड़क किनारे खड़े ट्रक से कार की भीषण टक्कर में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा सिंह समेत चार लोगों की मौत के बाद परिवहन विभाग ने सड़कों पर वाहनों की अवैध पार्किंग को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हादसे के बाद मुख्य और सहायक सड़कों के किनारे खड़े वाहनों से होने वाले खतरे को देखते हुए राज्यभर में विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा ने लोगों से सड़क पर वाहन पार्क नहीं करने की अपील की है।
परिवहन मंत्री दीपक बिरुवा ने रविवार को सोशल मीडिया के माध्यम से राज्यवासियों से अपील करते हुए कहा कि मुख्य सड़कों और उनसे जुड़ी सहायक सड़कों पर वाहन खड़ा करने से बचें। सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग यातायात व्यवस्था को प्रभावित करने के साथ दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकती है। उन्होंने लोगों से सुरक्षित यातायात व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की।
मंत्री ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को भी इस दिशा में कार्रवाई करने के लिए कहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि सड़क पर वाहनों की पार्किंग रोकने के अभियान में जिला परिवहन पदाधिकारी यानी डीटीओ और मोटर वाहन निरीक्षक यानी एमवीआइ की सेवाएं ली जाएं। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सड़कों पर खड़े वाहनों को लेकर निगरानी बढ़ाने और यातायात को सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है।
यह कदम जमशेदपुर के मरीन ड्राइव में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद उठाया गया है। यहां सड़क किनारे खड़े ट्रक से एक कार टकरा गई थी। दुर्घटना इतनी गंभीर थी कि ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी तृषा सिंह समेत चार लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद सड़क किनारे भारी वाहनों की पार्किंग और उससे पैदा होने वाले खतरे को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मरीन ड्राइव जैसे मार्गों पर वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में सड़क किनारे खड़े भारी वाहन दुर्घटना का खतरा बढ़ा सकते हैं। खासतौर पर रात या कम रोशनी के दौरान सड़क पर खड़े वाहनों को समय रहते देख पाना वाहन चालकों के लिए मुश्किल हो सकता है। परिवहन विभाग की कोशिश है कि मुख्य मार्गों को अनावश्यक पार्किंग से मुक्त रखा जाए ताकि वाहन चालकों को सुरक्षित रास्ता मिल सके।
परिवहन मंत्री ने इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन की भागीदारी पर जोर दिया है। उपायुक्तों के साथ डीटीओ और एमवीआइ को सक्रिय करने के निर्देश से साफ है कि अभियान केवल अपील तक सीमित नहीं रहेगा। जिलों में परिवहन विभाग के अधिकारी सड़क पर खड़े वाहनों की निगरानी करेंगे और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
सड़कों पर अनियोजित तरीके से खड़े वाहन कई बार दूसरे वाहन चालकों के लिए बड़ी परेशानी बन जाते हैं। मुख्य सड़क के किनारे ट्रक, बस या अन्य बड़े वाहन खड़े होने से सड़क का हिस्सा बाधित हो जाता है। तेज रफ्तार से आने वाले वाहन के चालक को अचानक सामने खड़े वाहन को देखकर संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। ऐसे में गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। मरीन ड्राइव की घटना ने एक बार फिर इस खतरे को सामने ला दिया है।
परिवहन विभाग अब चाहता है कि वाहन चालक निर्धारित स्थानों पर ही अपने वाहन पार्क करें। इसके साथ ही मुख्य और सहायक मार्गों को पार्किंग स्थल के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाए। विभाग की अपील विशेष रूप से उन वाहन चालकों के लिए महत्वपूर्ण है जो लंबे समय तक अपने वाहनों को सड़क किनारे खड़ा छोड़ देते हैं।
राज्य के अलग-अलग जिलों में अभियान शुरू होने के बाद डीटीओ और एमवीआइ की टीमों की जिम्मेदारी बढ़ेगी। स्थानीय प्रशासन के सहयोग से उन स्थानों की पहचान भी की जा सकती है जहां सड़क किनारे वाहनों के खड़े होने से यातायात प्रभावित होता है या दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ऐसे स्थानों पर नियमित निगरानी से सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
मरीन ड्राइव हादसे में चार लोगों की मौत ने सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। अब परिवहन विभाग का जोर इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने पर है। मंत्री दीपक बिरुवा की अपील के बाद जिलों में प्रशासन और परिवहन विभाग को सड़क किनारे पार्किंग के खिलाफ सक्रिय होने को कहा गया है।
परिवहन विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य सड़कों को सुरक्षित रखना और दुर्घटनाओं की आशंका कम करना है। इसके लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ वाहन चालकों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होगी। यदि वाहन चालक मुख्य और सहायक सड़कों पर वाहन खड़ा करने से बचें और निर्धारित पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल करें तो यातायात व्यवस्था बेहतर होने के साथ सड़क दुर्घटनाओं के खतरे को भी कम किया जा सकता है।





