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झारखण्ड | रेलवे के ठेकेदार धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या मामले में कोर्ट ने बाकी आरोपियों के खिलाफ चल रहे ट्रायल में फैसला सुनाया. जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्वयंभू के कोर्ट ने मामले के नामजद आरोपी हिमांशु कुमार, मुकेश सिंह, संजीव कुमार उर्फ चैनी, रिंकू उर्फ आमीर, राजेश दास और सतीश रजक को भी बरी करने का आदेश दिया.
इससे पूर्व कोर्ट ने पांच सितंबर को घाघीडीह जेल में बंद वासेपुर के गैंगस्टर फहीम खान व मंसूर नौवा को इस मामले में बरी किया था. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता कुमार मनीष ने दलील पेश की. 28 जनवरी 2013 को दिनदहाड़े दोपहर करीब साढ़े तीन बजे सूर्य विहार कॉलोनी बरटांड़ निवासी ठेकेदार धीरेंद्र प्रताप सिंह की गोली मार कर हत्या उनके घर के समीप कर दी गई थी. बाइक सवार दो हमलावरों ने उनके सिर और कनपटी में गोली मार दी थी. धीरेंद्र प्रताप सिंह की पत्नी चंद्रलेखा सिंह के फर्द बयान पर अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी धनबाद थाना दर्ज हुई थी. पुलिस ने फहीम खान, मंसूर, हिंमांशु, मुकेश, संजीव और रिंकू ऊर्फ आमीर के विरुद्ध इस मामले में आरोप पत्र दायर किया था.
अब ऊपर वाले से फैसले की आस चंद्रलेखा ने फैसले पर दुख जताते हुए कहा कि कोर्ट से न्याय नहीं मिला, अब ऊपर वाले से न्याय की आस है. भगवान ही उनके पति के हत्यारे को सजा देंगे. उन्होंने अपने स्तर से पूरा प्रयास किया. हाईकोर्ट जाने के सवाल पर चंद्रलेखा ने रोते हुए कहा कि इस लड़ाई से उन्हें अनुभव हुआ कि बिना पैसे के कानूनी लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती. वह अकेले अपने बच्चों का पालन-पोषण करें या फिर कानूनी लड़ाई के लिए पैसे जुटाएं. पति की मौत के बाद अकेले बच्चों की जिम्मेवारी निभाना कितना चुनौतीपूर्ण है, यह वही जानती हैं.
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