झारखंड

मनिका प्रखंड कार्यालय में ACB की कार्रवाई, पंचायत सचिव 10 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार

Kavita2
6 Aug 2026 2:44 PM IST
मनिका प्रखंड कार्यालय में ACB की कार्रवाई, पंचायत सचिव 10 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार
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लातेहार (झारखंड): सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गुरुवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। मनिका प्रखंड कार्यालय परिसर में एसीबी की टीम ने बड़काडीह पंचायत के पंचायत सचिव नागेश्वर रजक को कथित रूप से 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद प्रखंड कार्यालय में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

जानकारी के अनुसार, पंचायत सचिव पर आरोप था कि वह किसी सरकारी कार्य को पूरा करने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे थे। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच शुरू की और सत्यापन के बाद कार्रवाई की योजना बनाई। इसके बाद गुरुवार को निर्धारित रणनीति के तहत एसीबी की टीम मनिका प्रखंड कार्यालय पहुंची।

बताया जा रहा है कि जैसे ही पंचायत सचिव ने शिकायतकर्ता से कथित रूप से 10 हजार रुपये की राशि ली, उसी समय एसीबी की टीम ने उन्हें पकड़ लिया। टीम ने मौके से रिश्वत की रकम भी बरामद की। गिरफ्तारी के बाद एसीबी अधिकारियों ने पंचायत सचिव से पूछताछ की और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, किसी भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर नियमानुसार जांच की जाती है। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद ट्रैप कार्रवाई की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत यह कार्रवाई की गई है।

इस घटना के बाद मनिका प्रखंड कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। कई लोग एसीबी की कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम बता रहे हैं। वहीं, प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो लगातार सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के मामलों पर नजर रख रहा है। एसीबी का उद्देश्य सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और आम लोगों को बिना किसी परेशानी के सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ दिलाना है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में छोटे-छोटे कामों के लिए रिश्वत मांगने की शिकायतें कई बार सामने आती हैं। ऐसे मामलों में कार्रवाई होने से आम जनता का भरोसा बढ़ता है और कर्मचारियों में भी जवाबदेही की भावना मजबूत होती है।

एसीबी की टीम ने गिरफ्तारी के बाद पंचायत सचिव से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद की जाएगी।

पंचायत सचिव नागेश्वर रजक की गिरफ्तारी के बाद विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप साबित होने पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाती है।

एसीबी अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी या अधिकारी किसी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग या एसीबी को दें। शिकायत मिलने पर गोपनीय तरीके से जांच कर कार्रवाई की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देना भी जरूरी है। इससे आम लोगों और सरकारी विभागों के बीच सीधा संपर्क बढ़ता है और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होती हैं।

मनिका प्रखंड कार्यालय में हुई इस कार्रवाई को एसीबी की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि रिश्वतखोरी के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, पंचायत सचिव की गिरफ्तारी के बाद मामले की विस्तृत जांच जारी है। एसीबी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस मामले में केवल एक व्यक्ति की भूमिका है या फिर किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भी संलिप्तता है।

कुल मिलाकर, मनिका प्रखंड कार्यालय में एसीबी की कार्रवाई ने सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। पंचायत सचिव को कथित रूप से रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया है और अब आगे की कानूनी प्रक्रिया जांच के आधार पर आगे बढ़ेगी।

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