झारखंड

SIR के नाम पर साइबर ठगों का नया जाल! ई-मेल से मतदाताओं को बना रहे निशाना

Kavita2
31 Oct 2026 5:48 PM IST
SIR के नाम पर साइबर ठगों का नया जाल! ई-मेल से मतदाताओं को बना रहे निशाना
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रांची। झारखंड समेत देश के कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बीच साइबर ठगों की सक्रियता को लेकर चिंता बढ़ गई है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, सुधार कराने और सत्यापन के नाम पर लोगों को फर्जी ई-मेल भेजकर ठगी का प्रयास किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसे देखते हुए चुनाव आयोग ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मतदाताओं से अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध ई-मेल, अनजान लिंक या व्यक्तिगत जानकारी मांगने वाले संदेश पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें।

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य है। इसका उद्देश्य पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना और निर्धारित नियमों के अनुसार सूची को अद्यतन करना है। इसी प्रक्रिया का फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर सकते हैं। ठग सरकारी विभागों या चुनाव आयोग के नाम से मिलते-जुलते ई-मेल भेजकर लोगों को यह विश्वास दिलाने का प्रयास करते हैं कि उनका मतदाता पहचान पत्र या मतदाता सूची में नाम खतरे में है।

SIR के नाम पर फर्जी ई-मेल से ठगी की कोशिश

साइबर अपराधी आम लोगों के बीच सरकारी प्रक्रियाओं को लेकर मौजूद जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के दौरान ठग फर्जी संदेश भेजकर लोगों को जल्द कार्रवाई करने के लिए उकसा सकते हैं।

ऐसे संदेशों में दावा किया जा सकता है कि मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए तत्काल सत्यापन जरूरी है। कुछ फर्जी ई-मेल में दस्तावेज अपलोड करने या किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए भी कहा जा सकता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की तकनीक को फिशिंग कहा जाता है। इसमें अपराधी किसी भरोसेमंद संस्था का नाम इस्तेमाल करके लोगों की निजी जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

हालांकि, झारखंड में सामने आए संदिग्ध ई-मेल के वास्तविक प्रारूप, भेजने वाले पते और ठगी की घटनाओं की संख्या के बारे में अभी पुष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।

चुनाव आयोग ने मतदाताओं को किया सावधान

मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान चुनाव आयोग के नाम का दुरुपयोग होने की आशंका को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

किसी भी ई-मेल में चुनाव आयोग का नाम या प्रतीक चिह्न दिखाई देने भर से उसे आधिकारिक नहीं माना जा सकता। साइबर अपराधी फर्जी पहचान और मिलते-जुलते ई-मेल पते का उपयोग कर सकते हैं।

मतदाताओं को चाहिए कि वे चुनाव संबंधी किसी भी जानकारी की पुष्टि चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित निर्वाचन कार्यालय से करें।

यदि कोई संदेश तत्काल कार्रवाई नहीं करने पर मतदाता सूची से नाम हटाने की धमकी देता है, तो उसकी प्रामाणिकता की जांच करना आवश्यक है। डर या जल्दबाजी में निजी जानकारी साझा करने से आर्थिक नुकसान और पहचान संबंधी धोखाधड़ी का खतरा बढ़ सकता है।

झारखंड में 30 नवंबर तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम

झारखंड में SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तारीख बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 की गई है। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, जिला निर्वाचन अधिकारियों के अनुरोध पर पुनरीक्षण कार्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। संशोधित कार्यक्रम में दावों और आपत्तियों के निस्तारण की अंतिम तिथि 23 नवंबर निर्धारित की गई है।

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चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की भूमिका भी स्पष्ट की है। आयोग के निर्देशों के अनुसार, कुछ श्रेणियों के मतदाताओं के दस्तावेज घर जाकर एकत्र करने और निर्धारित प्रणाली में अपलोड करने की व्यवस्था की गई है। इससे मतदाताओं को आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से सत्यापन कराने में सहायता मिल सकती है।

इन तरीकों से साइबर अपराधी बना सकते हैं निशाना

साइबर अपराधी मतदाता पहचान पत्र अपडेट कराने, नाम हटने की चेतावनी देने या दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन कराने जैसे बहानों का इस्तेमाल कर सकते हैं। फर्जी ई-मेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करने से व्यक्ति किसी नकली वेबसाइट पर पहुंच सकता है।

ऐसी वेबसाइटें देखने में सरकारी पोर्टल जैसी हो सकती हैं। वहां मोबाइल नंबर, आधार संबंधी जानकारी, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील विवरण मांगे जा सकते हैं। कुछ मामलों में अपराधी बैंकिंग जानकारी या ओटीपी प्राप्त करने का भी प्रयास कर सकते हैं।

मतदाताओं को समझना चाहिए कि किसी सरकारी प्रक्रिया के नाम पर प्राप्त हर संदेश विश्वसनीय नहीं होता। विशेष रूप से भुगतान, ओटीपी या बैंकिंग विवरण मांगने वाले संदेशों से सावधान रहना जरूरी है।

फर्जी ई-मेल मिलने पर क्या करें?

संदिग्ध ई-मेल प्राप्त होने पर उसमें दिए गए लिंक या अटैचमेंट को खोलने से बचना चाहिए। संदेश भेजने वाले का ई-मेल पता जांचना जरूरी है, क्योंकि ठग आधिकारिक वेबसाइट से मिलते-जुलते नामों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

मतदाता अपनी जानकारी की पुष्टि सीधे भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट eci.gov.in और मतदाता सेवा पोर्टल voters.eci.gov.in से कर सकते हैं।

यदि किसी व्यक्ति ने संदिग्ध लिंक पर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा कर दी है या उसके साथ आर्थिक धोखाधड़ी हुई है, तो उसे तुरंत बैंक को सूचित करना चाहिए। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

जागरूकता से ही रोकी जा सकती है साइबर ठगी

मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसी व्यापक प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नागरिक दस्तावेजों और पंजीकरण संबंधी जानकारी प्राप्त करते हैं। ऐसे समय में साइबर ठगों के लिए भ्रम पैदा करना आसान हो सकता है।

चुनाव संबंधी आधिकारिक सूचनाओं और फर्जी संदेशों में अंतर समझना बेहद जरूरी है। नागरिकों को किसी भी सूचना पर कार्रवाई करने से पहले संबंधित निर्वाचन कार्यालय या आधिकारिक पोर्टल से पुष्टि करनी चाहिए।

SIR के नाम पर ठगी के प्रयासों की सूचना ने डिजिटल सुरक्षा की आवश्यकता को फिर रेखांकित किया है। मतदाताओं की सतर्कता और संदिग्ध गतिविधियों की समय पर शिकायत से साइबर अपराधियों के मंसूबों को नाकाम किया जा सकता है।

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