झारखंड

पुलिसकर्मियों की पढ़ाई में नया अध्याय BNS और साहित्य पर जोर

nidhi
29 Aug 2026 10:25 AM IST
पुलिसकर्मियों की पढ़ाई में नया अध्याय BNS और साहित्य पर जोर
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BNS और साहित्य पर जोर

साहिबगंज : झारखंड के साहिबगंज पुलिस विभाग ने पुलिसकर्मियों के ज्ञान और कार्यशैली में सुधार के लिए एक अनूठी पहल शुरू की है। अब पुलिसकर्मी सिर्फ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और कानून से जुड़ी किताबें ही नहीं पढ़ेंगे, बल्कि साहित्य का भी अध्ययन करेंगे। इसके लिए पुलिस विभाग की ओर से एक आधुनिक लाइब्रेरी तैयार करने की योजना बनाई गई है।

पुलिस अधीक्षक की पहल पर शुरू की जा रही इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिसकर्मियों में कानून की समझ बढ़ाने के साथ-साथ उनकी सोच, संवेदनशीलता और संवाद क्षमता को बेहतर बनाना है।
कानून के साथ साहित्य पढ़ने पर जोर
पुलिस विभाग में आमतौर पर कानून, अपराध अनुसंधान और पुलिसिंग से जुड़ी किताबों का अध्ययन किया जाता है। लेकिन साहिबगंज पुलिस ने इसमें साहित्य को भी शामिल करने का फैसला किया है। अधिकारियों का मानना है कि साहित्य पढ़ने से पुलिसकर्मियों में मानवीय संवेदनाएं बढ़ेंगी और वे समाज को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। इससे पीड़ितों से बातचीत करने और मामलों को संवेदनशीलता से संभालने में मदद मिलेगी।
लाइब्रेरी में मिलेंगी उपयोगी किताबें
नई लाइब्रेरी में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), भारतीय साक्ष्य अधिनियम समेत कानून से जुड़ी किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा हिंदी और अन्य भाषाओं के साहित्य, प्रेरणादायक पुस्तकें और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी सामग्री भी रखी जाएगी।
पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के साथ-साथ नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
पुलिसिंग में आएगा सकारात्मक बदलाव
अधिकारियों का कहना है कि बेहतर पुलिसिंग के लिए केवल कानून की जानकारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज और लोगों की भावनाओं को समझना भी जरूरी है। साहित्य के अध्ययन से पुलिसकर्मियों में धैर्य, संवेदनशीलता और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
बदलते कानूनों की जानकारी जरूरी
हाल के वर्षों में आपराधिक कानूनों में बड़े बदलाव हुए हैं। भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू की गई है। ऐसे में पुलिसकर्मियों के लिए नए कानूनों की गहराई से जानकारी रखना बेहद जरूरी है। साहिबगंज पुलिस की यह पहल कानून की समझ और मानवीय दृष्टिकोण दोनों को मजबूत करने की दिशा में एक प्रयास मानी जा रही है।
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