
रांची। झारखंड के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में वृद्धि के बाद अब रांची के कांके स्थित रांची तंत्रिका मनोचिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (रिनपास) में कार्यरत डीएनबी चिकित्सकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने इन चिकित्सकों के मानदेय पुनरीक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की पहल पर संबंधित प्रस्ताव को विभागीय स्तर पर स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मंत्री के निर्देश पर संबंधित फाइल को मंजूरी दी गई है। इस फैसले से रिनपास में डीएनबी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे चिकित्सकों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, संशोधित मानदेय की नई दरों और उनके लागू होने की तारीख को लेकर विस्तृत आदेश सामने आना अभी बाकी है।
रिनपास के डीएनबी डॉक्टरों के लिए राहत
झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है।
रिनपास, कांके में कार्यरत डीएनबी डॉक्टरों के मानदेय को संशोधित करने से संबंधित प्रस्ताव को स्वास्थ्य विभाग ने स्वीकृति प्रदान की है।
इससे पहले राज्य के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के मानदेय में वृद्धि की दिशा में कदम उठाए गए थे।
अब रिनपास के डीएनबी डॉक्टरों को भी मानदेय पुनरीक्षण का लाभ देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
चिकित्सकों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्रशिक्षण के दौरान वे मरीजों की देखभाल और अस्पताल की दैनिक चिकित्सा सेवाओं में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की पहल पर कार्रवाई
रिनपास के डीएनबी डॉक्टरों के मानदेय पुनरीक्षण की प्रक्रिया स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की पहल पर आगे बढ़ी है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री ने संबंधित प्रस्ताव पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद विभागीय स्तर पर फाइल का परीक्षण किया गया और प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
इस निर्णय को चिकित्सा क्षेत्र में कार्यरत प्रशिक्षणरत डॉक्टरों की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, मानदेय में कितनी बढ़ोतरी होगी और कितने चिकित्सकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अपर मुख्य सचिव ने की स्वीकृति की पुष्टि
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने प्रस्ताव की विभागीय स्वीकृति की पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश के बाद संबंधित फाइल को मंजूरी दी गई है।
इस स्वीकृति के साथ मानदेय पुनरीक्षण की प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है।
हालांकि, विभागीय स्वीकृति और संशोधित मानदेय का वास्तविक भुगतान शुरू होना अलग-अलग चरण हैं।
इसके लिए आवश्यक औपचारिकताओं, वित्तीय प्रावधानों और आदेशों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
डॉक्टरों को बढ़ा हुआ मानदेय किस तारीख से मिलेगा, यह संबंधित आदेश जारी होने के बाद ही निश्चित हो सकेगा।
क्या है रिनपास संस्थान?
रांची के कांके में स्थित रिनपास झारखंड का एक प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रशिक्षण संस्थान है।
इसका पूरा नाम रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज है।
यह संस्थान मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, मनोचिकित्सा, प्रशिक्षण और संबंधित शैक्षणिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
यहां मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ प्रशिक्षण में भी संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका है।
डीएनबी चिकित्सक अपने प्रशिक्षण के दौरान वरिष्ठ डॉक्टरों के मार्गदर्शन में क्लिनिकल कार्यों और मरीजों की देखभाल से संबंधित जिम्मेदारियां निभाते हैं।
डीएनबी डॉक्टरों को क्यों मिलता है मानदेय?
डीएनबी यानी डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड चिकित्सा क्षेत्र का स्नातकोत्तर प्रशिक्षण कार्यक्रम है।
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान परीक्षा बोर्ड के अंतर्गत संचालित किया जाता है।
डीएनबी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले डॉक्टर निर्धारित शैक्षणिक पाठ्यक्रम के साथ अस्पतालों में व्यावहारिक चिकित्सा प्रशिक्षण भी लेते हैं।
प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्हें विभिन्न चिकित्सकीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करना पड़ता है।
इसी वजह से निर्धारित नियमों के अनुसार उन्हें मासिक मानदेय या स्टाइपेंड दिया जाता है।
मानदेय की दरें संबंधित संस्थानों, राज्यों और लागू नियमों के अनुसार निर्धारित की जाती हैं।
डॉक्टरों के मानदेय में समानता का मुद्दा
देश के विभिन्न राज्यों में रेजिडेंट और डीएनबी डॉक्टरों के मानदेय में अंतर को लेकर समय-समय पर मांगें उठती रही हैं।
चिकित्सक संगठनों का तर्क रहा है कि समान स्तर का प्रशिक्षण और चिकित्सा जिम्मेदारियां निभाने वाले डॉक्टरों को उचित आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
मानदेय में बढ़ोतरी का उद्देश्य प्रशिक्षणरत चिकित्सकों को आर्थिक सहायता प्रदान करना और चिकित्सा प्रशिक्षण को बेहतर बनाना है।
रिनपास के डीएनबी डॉक्टरों के मानदेय पुनरीक्षण को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, झारखंड में नई दरों का निर्धारण किन मानकों के आधार पर किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
चिकित्सक संगठनों की मांगों पर भी सरकार सक्रिय
झारखंड में चिकित्सकों के विभिन्न मुद्दों को लेकर हाल के दिनों में सरकार और डॉक्टर संगठनों के बीच बातचीत हुई है।
16 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के साथ चिकित्सक संगठनों की बैठक आयोजित की गई थी।
इस बैठक में डॉक्टरों की पदोन्नति, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा संस्थानों के पंजीकरण और रेजिडेंट डॉक्टरों की प्रोत्साहन राशि के नियमित भुगतान जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक के बाद चिकित्सक संगठनों ने 22 अक्टूबर से प्रस्तावित हड़ताल स्थगित करने की घोषणा की थी।
प्रोत्साहन राशि के नियमित भुगतान पर भी सहमति
चिकित्सक संगठनों के साथ हुई बैठक में इंटर्न, जूनियर रेजिडेंट और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की प्रोत्साहन राशि के भुगतान में अनियमितताओं को दूर करने पर भी सहमति बनी थी।
इसके अलावा डॉक्टरों की विभिन्न मांगों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर समन्वय समिति बनाने का निर्णय लिया गया।
सरकार ने समयबद्ध पदोन्नति और चिकित्सकों की सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर भी सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था।
इन गतिविधियों से संकेत मिलता है कि राज्य में चिकित्सा कर्मियों से जुड़े प्रशासनिक और सेवा संबंधी मामलों पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई जारी है।
नई दरों की घोषणा का इंतजार
रिनपास के डीएनबी डॉक्टरों के मानदेय पुनरीक्षण का प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल संशोधित दरों को लेकर है।
वर्तमान में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विभागीय स्तर पर संबंधित फाइल को मंजूरी मिल चुकी है।
लेकिन मानदेय में होने वाली वास्तविक वृद्धि, लाभार्थियों की संख्या और भुगतान लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं की गई है।
इसके अलावा बढ़े हुए मानदेय का लाभ पिछली किसी तारीख से दिया जाएगा या आदेश जारी होने के बाद से लागू होगा, इस संबंध में भी आधिकारिक जानकारी की प्रतीक्षा है।
चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में पहल
स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपलब्धता किसी भी राज्य की चिकित्सा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है।
डीएनबी जैसे विशेषज्ञ प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल चिकित्सक पढ़ाई के साथ अस्पतालों में सेवाएं भी देते हैं।
ऐसे में उचित मानदेय व्यवस्था से डॉक्टरों को प्रशिक्षण अवधि में आर्थिक सहायता मिल सकती है।
रिनपास जैसे विशेष चिकित्सा संस्थान में मानदेय पुनरीक्षण का फैसला प्रशिक्षणरत चिकित्सकों के लिए सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।
हालांकि, इस फैसले का वास्तविक लाभ संशोधित दरें तय होने और भुगतान व्यवस्था लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की पहल पर प्रस्ताव को विभागीय स्वीकृति मिलने से रिनपास के डीएनबी डॉक्टरों की मानदेय वृद्धि की उम्मीदें बढ़ गई हैं।





