झारखंड

रानीहारा डैम का 40 फीट बांध टूटा, गांवों में घुसा पानी, 22 हजार लोग प्रभावित

Kavita2
4 Oct 2026 9:38 AM IST
रानीहारा डैम का 40 फीट बांध टूटा, गांवों में घुसा पानी, 22 हजार लोग प्रभावित
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सिल्ली। सिल्ली प्रखंड के गोंडाडीह पंचायत अंतर्गत खैरबेड़ा के पास स्थित रानीहारा डैम का बांध शनिवार को करीब 40 फीट तक टूट गया। बांध टूटते ही डैम का पानी तेज बहाव के साथ आसपास के गांवों और खेतों की ओर बढ़ गया। अचानक बड़ी मात्रा में पानी पहुंचने से सैकड़ों किसानों की फसलें डूब गईं, जबकि खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी पानी के तेज बहाव में बह गई। घटना से पांच गांवों के करीब 22 हजार लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है।

रानीहारा डैम का हिस्सा टूटने के बाद खैरबेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में अफरा-तफरी मच गई। पानी तेजी से खेतों और निचले इलाकों में फैलने लगा। खैरबेड़ा, बाह्मानी, गोंडाडीह नायकटोला, पेंटोला, बांसटोला, सातपालु, सीधाबगाना और पलासडीह समेत आसपास के कई क्षेत्रों में इसका असर पड़ा है।

सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ है। खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गईं। कई खेतों में तेज बहाव के कारण मिट्टी का कटाव भी हुआ है। किसानों के अनुसार, पानी की रफ्तार इतनी अधिक थी कि खेतों की उपजाऊ मिट्टी तक बह गई। इससे मौजूदा फसल के नुकसान के साथ भविष्य की खेती को लेकर भी किसानों की चिंता बढ़ गई है।

बांध टूटने से केवल फसलों को ही नुकसान नहीं पहुंचा, बल्कि पशुपालकों और मछली पालकों को भी नुकसान होने की जानकारी सामने आई है। तेज बहाव में कई मवेशी बह गए। बड़ी संख्या में बत्तखें भी पानी के साथ बह गईं। डैम और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद हजारों रुपये की मछलियों के बह जाने से मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ है।

पानी का स्तर बढ़ने के कारण कुछ घरों में भी पानी घुस गया। अचानक घरों तक पानी पहुंचने से लोगों को अपने सामान और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोशिश करनी पड़ी। निचले क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए स्थिति अधिक चिंताजनक हो गई। ग्रामीण अब पानी कम होने का इंतजार करने के साथ नुकसान का आकलन कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि पिछले दिनों इलाके में हुई भारी बारिश के कारण रानीहारा डैम पूरी तरह भर गया था। डैम में लगातार पानी बढ़ने के कारण ग्रामीणों के बीच इसके बांध को लेकर पहले से चिंता बनी हुई थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें बांध के क्षतिग्रस्त होने की आशंका थी। शनिवार को आखिरकार बांध का करीब 40 फीट हिस्सा टूट गया और जमा पानी तेजी से बाहर निकलने लगा।

ग्रामीणों के मुताबिक रानीहारा डैम का निर्माण वर्ष 2010-11 में जल संसाधन विभाग की ओर से कराया गया था। इसके निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। डैम का उद्देश्य आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई सहित जल संसाधन उपलब्ध कराना था। अब बांध टूटने के बाद इसके निर्माण, रखरखाव और समय पर मरम्मत को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि डैम के कमजोर हिस्सों की समय रहते पहचान कर आवश्यक मरम्मत की जाती तो संभवतः नुकसान को कम किया जा सकता था। हालांकि बांध टूटने के वास्तविक कारणों की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी। भारी बारिश और डैम के लबालब भरने को घटना की प्रमुख परिस्थितियों में शामिल बताया जा रहा है।

पूर्व मुखिया डब्लू महली समेत स्थानीय ग्रामीणों ने घटना की जानकारी सिल्ली प्रशासन और प्रखंड विकास पदाधिकारी को दी है। ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों का जल्द सर्वे कराने और नुकसान का आकलन करने की मांग की है। किसानों को सबसे अधिक चिंता खेतों में खड़ी फसलों और मिट्टी के कटाव को लेकर है।

बांध टूटने के बाद प्रभावित गांवों में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हुई है। खेतों और रास्तों में पानी भरने से आवाजाही में परेशानी पैदा हुई है। जिन इलाकों में पानी का बहाव अधिक रहा, वहां स्थिति सामान्य होने में समय लग सकता है। ग्रामीणों को आशंका है कि पानी उतरने के बाद वास्तविक नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

करीब 22 हजार लोगों के प्रभावित होने की जानकारी के कारण प्रशासन के सामने राहत और नुकसान के आकलन की बड़ी चुनौती है। सबसे पहले उन इलाकों की पहचान करना जरूरी होगा जहां घरों में पानी घुसा है या जहां लोगों और मवेशियों के लिए खतरा बना हुआ है। इसके बाद कृषि भूमि, फसल, पशुधन और अन्य संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन किया जा सकता है।

घटना ने डैम की सुरक्षा और नियमित निगरानी की जरूरत को भी सामने ला दिया है। बारिश के मौसम में जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। ऐसे में बांधों के कमजोर हिस्सों की नियमित जांच और समय पर मरम्मत बेहद जरूरी होती है। विशेष रूप से उन बांधों की निगरानी महत्वपूर्ण है, जिनके आसपास बड़ी आबादी और कृषि क्षेत्र मौजूद हैं।

किसानों के सामने अब दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। एक तरफ उनकी तैयार या बढ़ती फसलें पानी में डूब गई हैं, दूसरी तरफ कई स्थानों पर उपजाऊ मिट्टी बह जाने से अगली फसल की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है। मछली और पशुपालन से जुड़े परिवारों को अलग से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

फिलहाल प्रभावित गांवों के लोग प्रशासन से तत्काल सहायता की उम्मीद लगाए हुए हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि बांध के टूटे हिस्से की जल्द मरम्मत कराई जाए, ताकि आगे किसी नए खतरे को रोका जा सके। साथ ही प्रभावित किसानों और परिवारों का सर्वे कर नुकसान का सही आकलन किया जाए।

रानीहारा डैम का करीब 40 फीट हिस्सा टूटने की इस घटना ने आसपास के कई गांवों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। खेतों में भरे पानी, बह गई मिट्टी, मवेशियों, बत्तखों और मछलियों के नुकसान के बीच अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है। पानी कम होने के बाद ही नुकसान की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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