पांच माह में 20 लाख वसूला पर प्रदूषण जांच केंद्र भी नहीं

धनबाद न्यूज़: ग्रीन टैक्स (हरित कर) के रूप में धनबाद के लोगों ने पिछले पांच माह में 20 लाख रुपए चुकाए हैं. प्रदूषण के मामले में संवेदनशील धनबाद को नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम में शामिल किया गया है. धनबाद देश के प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल है. झारखंड का सबसे प्रदूषित शहर है. नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम में शामिल शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए व्यापक योजनाएं बनाई गई हैं. इसी के तहत पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिए ग्रीन टैक्स को भी शामिल किया गया है. हालांकि धनबाद में 65 से 70 प्रतिशत प्रदूषण के लिए वाणिज्यिक और खनन कार्य में लगे वाहनों को जिम्मेवार माना जाता है .
इसके तहत आठ साल से ज्यादा पुराने वाहनों पर फिटनेस सर्टिफिकेट के रिन्युअल के समय रोड टैक्स के 10 से 25 प्रतिशत के बराबर कर लगाया जाता है. निजी वाहनों पर 15 साल बाद रिन्युअल के समय ग्रीन टैक्स लिया जाता है. केंद्र सरकार की बनाई नियमावली के अनुसार सार्वजनिक परिवहन वाहनों, बसों पर निचला यानी 10 से 25 प्रतिशत ग्रीन टैक्स लगता है, जबकि बेहद प्रदूषित शहरों में रजिस्टर्ड वाहनों पर ऊंचा यानी रोड टैक्स के 50 प्रतिशत के बराबर टैक्स लिया जाता है. धनबाद के लोगो ने परिवहन विभाग को पिछले दो वर्षों में डेढ़ करोड़ और इस वर्ष पांच माह में 20 लाख 68 हजार रुपए का ग्रीन टैक्स चुकाए हैं. सरकार ग्रीन टैक्स से प्राप्त राजस्व को शहर में प्रदूषण नियंत्रण पर खर्च करती है.
पेट्रोल पंप पर बंद है प्रदूषण जांच केंद्र: एक तरफ लोगों से ग्रीन टैक्स लिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ परिवहन विभाग सभी पेट्रोल पंपों पर प्रदूषण जांच केंद्र भी संचालित नहीं करवा पा रहा है. प्रदूषण जांच सर्टिफिकेट के लिए लोगों को भटकना पड़ता है. शहर के अंदर जांच केंद्र तो बंद है ही, शहर के बाहर स्थिति बदतर है. नियमानुसार प्रदूषण जांच केंद्र संचालित नहीं होने पर पेट्रोल पंप का लाइसेंस ही रद्द हो सकता है





