
रांची: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिलने जा रही है। राज्य पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को 16 कुख्यात पुरुष और महिला माओवादी डीजीपी के सामने आत्मसमर्पण करेंगे। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी अपने साथ बड़ी संख्या में अत्याधुनिक हथियार, मैगजीन और कारतूस भी पुलिस को सौंपेंगे। इनमें 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य संतोष उर्फ बासुदेव उर्फ गांधी भी शामिल है।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रांची, गिरिडीह, बोकारो, लातेहार, खूंटी और ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में सक्रिय रहे हैं। इन सभी पर लंबे समय से माओवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। इनमें छह माओवादी ऐसे हैं, जिन पर राज्य सरकार ने कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है।
सबसे बड़ा नाम संतोष उर्फ बासुदेव उर्फ गांधी का है। वह माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी का सदस्य रह चुका है और उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संतोष के खिलाफ विभिन्न थानों में माओवादी गतिविधियों से जुड़े 128 मामले दर्ज हैं।
आत्मसमर्पण करने वालों में तीन जोनल कमेटी सदस्य, तीन सब जोनल कमेटी सदस्य, छह एरिया कमेटी सदस्य और तीन कैडर सदस्य शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन माओवादियों के मुख्यधारा में लौटने से नक्सल प्रभावित इलाकों में संगठन को बड़ा झटका लगेगा।
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादी कुल 11 अत्याधुनिक हथियार पुलिस को सौंपेंगे। इनमें छह इंसास राइफल, दो एके-47 राइफल, एक एचके-33 राइफल, एक यूएस कार्बाइन राइफल और एक एम-16 राइफल शामिल हैं। इसके अलावा 38 मैगजीन भी जमा कराई जाएंगी।
पुलिस को सौंपे जाने वाले हथियारों के साथ बड़ी मात्रा में कारतूस भी शामिल हैं। माओवादी कुल 1562 कारतूस पुलिस के हवाले करेंगे। इनमें इंसास राइफल के 786 कारतूस, एके-47 के 229 कारतूस, एचके-33 के 208 कारतूस, यूएस कार्बाइन के 95 कारतूस और एम-16 के 244 कारतूस शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह आत्मसमर्पण राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के लगातार अभियान का परिणाम है। सरकार लगातार माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील करती रही है।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में महिला सदस्य भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि संगठन में सक्रिय कई सदस्य अब हिंसा से दूर होकर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं। सरकार की पुनर्वास योजनाओं के तहत उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
झारखंड में सक्रिय माओवादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सुरक्षा बल लगातार अभियान चला रहे हैं। हाल के वर्षों में कई बड़े नक्सली नेताओं ने आत्मसमर्पण किया है या सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए हैं। पुलिस का दावा है कि लगातार दबाव और बेहतर रणनीति के कारण माओवादी संगठन कमजोर हो रहा है।
इसके पहले झारखंड में सक्रिय रहे आठ माओवादी छत्तीसगढ़ में भी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इनमें जोनल कमेटी सदस्य और एरिया कमांडर स्तर के माओवादी शामिल थे। इससे साफ है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और सरकार की आत्मसमर्पण नीति का असर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
झारखंड पुलिस मुख्यालय में होने वाला यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम राज्य में नक्सल विरोधी अभियान के लिए अहम माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों को उम्मीद है कि इन माओवादियों के आत्मसमर्पण से संगठन की गतिविधियों और नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचेगा। वहीं, सरकार इसे युवाओं और स्थानीय लोगों को हिंसा छोड़कर विकास की राह पर लौटने का संदेश बता रही है।





