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झारखंड में 13 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार, हर पंचायत में 3 नल-जल मित्रों का होगा चयन

Kavita2
29 Oct 2026 10:13 AM IST
झारखंड में 13 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार, हर पंचायत में 3 नल-जल मित्रों का होगा चयन
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रांची। झारखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राज्य की प्रत्येक पंचायत में तीन-तीन नल-जल मित्रों का चयन किया जाएगा। इस फैसले से झारखंड की लगभग 4,345 पंचायतों में 13 हजार से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में हुई एपेक्स कमेटी की बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का बेहतर संचालन, नियमित रखरखाव और लोगों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत बनाना है। चयनित नल-जल मित्रों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे गांवों में पानी की आपूर्ति से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान कर सकें।

झारखंड की 4,345 पंचायतों में होगा नल-जल मित्रों का चयन

राज्य सरकार के फैसले के अनुसार झारखंड की सभी 4,345 पंचायतों में तीन-तीन नल-जल मित्रों का चयन करने की योजना है।

इस हिसाब से प्रदेशभर में कुल 13,035 लोगों को काम करने का अवसर मिल सकता है। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर आजीविका का साधन बन सकती है।

सरकार का उद्देश्य गांवों में पेयजल योजनाओं के संचालन के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है।

इस व्यवस्था के लागू होने के बाद जलापूर्ति योजनाओं में आने वाली छोटी तकनीकी खराबियों के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध रहेंगे।

हालांकि, यह चयन नियमित सरकारी पदों पर स्थायी नियुक्ति के रूप में होगा या किसी अन्य व्यवस्था के तहत, इसकी विस्तृत शर्तें संबंधित विभाग के दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होंगी।

मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक

जल जीवन मिशन 2.0 को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में एपेक्स कमेटी की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से प्रस्तुत विभिन्न प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया।

इसके बाद पंचायत स्तर पर नल-जल मित्रों के चयन और उनके कौशल विकास से संबंधित प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।

योजना के क्रियान्वयन में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के साथ पंचायती राज विभाग तथा श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

जिलों में चयन प्रक्रिया और योजनाओं के संचालन के लिए उपायुक्तों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

इससे पंचायत और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलेगी।

युवाओं, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को मिलेंगे अवसर

नल-जल मित्र कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, पूर्व सैनिकों और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को कौशल प्रशिक्षण देकर जलापूर्ति योजनाओं के संचालन से जोड़ा जाएगा।

सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध मानव संसाधन को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना है।

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद चयनित व्यक्ति पाइपलाइन से संबंधित सामान्य समस्याओं, छोटी-मोटी मरम्मत और जलापूर्ति प्रणाली के नियमित रखरखाव का कार्य करेंगे।

महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को इस कार्यक्रम से जोड़ने से ग्रामीण आजीविका के अवसरों का विस्तार हो सकता है।

हालांकि, चयन में आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता, आरक्षण और अन्य पात्रता संबंधी विस्तृत नियम अभी स्पष्ट नहीं किए गए हैं।

नए अभ्यर्थियों को 510 घंटे का विशेष प्रशिक्षण

सरकार ने नल-जल मित्रों को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित करने के लिए विशेष व्यवस्था तैयार की है।

इसके तहत पहली बार इस क्षेत्र में काम करने वाले अभ्यर्थियों को 510 घंटे का अल्पकालिक कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।

वहीं पहले से जलापूर्ति योजनाओं के संचालन या रखरखाव का अनुभव रखने वाले व्यक्तियों के लिए 120 घंटे का कौशल उन्नयन प्रशिक्षण प्रस्तावित है।

प्रशिक्षण के दौरान पाइप जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, सामान्य तकनीकी खराबियों की पहचान, मरम्मत और निवारक रखरखाव जैसे विषयों पर ध्यान दिया जाएगा।

इसका उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित स्कीम ऑपरेटर तैयार करना है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं को सुचारू रखने में सहयोग कर सकें।

BIT मेसरा और ISM धनबाद जैसे संस्थानों से होगा समझौता

नल-जल मित्रों के कौशल विकास के लिए झारखंड सरकार प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता करने की तैयारी में है।

इसके तहत रांची स्थित बीआईटी मेसरा, धनबाद स्थित आईएसएम और रांची के निर्मला कॉलेज जैसे संस्थानों के साथ एमओयू किए जाने की योजना है।

इन संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता बेहतर बनाने और तकनीकी दक्षता विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

इसके अलावा श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

सरकार का लक्ष्य केवल नल-जल मित्रों का चयन करना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाना भी है।

जलापूर्ति की निगरानी के लिए बनेंगे कमांड एंड सपोर्ट सेंटर

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की डिजिटल निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।

इसके लिए राज्य और जिला स्तर पर कमांड एंड सपोर्ट सेंटर स्थापित करने की योजना है।

इन केंद्रों को 'झारखंड जल पोर्टल' से जोड़ा जाएगा, जिससे योजनाओं से संबंधित आंकड़ों और संचालन की जानकारी का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।

डिजिटल निगरानी व्यवस्था के माध्यम से जलापूर्ति योजनाओं की स्थिति की समीक्षा करने और तकनीकी समस्याओं की पहचान करने में सहायता मिल सकती है।

इससे जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को योजनाओं के संचालन पर नजर रखने में सुविधा होगी।

16वें वित्त आयोग के अनुदान से मिलेगा मानदेय

नल-जल मित्रों के मानदेय और कौशल प्रशिक्षण के लिए वित्तीय व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।

इसके तहत 16वें वित्त आयोग के टाइड ग्रांट का उपयोग करने की योजना है।

इसी अनुदान से चयनित नल-जल मित्रों को मानदेय और आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।

हालांकि, नल-जल मित्रों को प्रतिमाह कितनी राशि मिलेगी, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

चयन प्रक्रिया शुरू होने से पहले मानदेय, भुगतान व्यवस्था और सेवा शर्तों से संबंधित निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।

इसलिए अभ्यर्थियों को विभाग की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा।

गांवों में पानी की समस्या दूर करने में मिलेगी मदद

झारखंड के कई ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन और नल कनेक्शन उपलब्ध होने के बावजूद जलापूर्ति योजनाओं के संचालन तथा रखरखाव से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

कहीं पाइपलाइन में खराबी तो कहीं अन्य तकनीकी समस्याओं के कारण नियमित पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित नल-जल मित्रों की उपलब्धता उपयोगी साबित हो सकती है।

राज्य सरकार पहले से दिसंबर 2028 तक सभी ग्रामीण घरों में पाइपलाइन के माध्यम से सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जून 2026 में विभागीय समीक्षा के दौरान पेयजल योजनाओं के कार्यों में तेजी लाने और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।

रोजगार के साथ ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मिलेगी मजबूती

नल-जल मित्रों के चयन की योजना से झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और पेयजल प्रबंधन, दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण और काम के अवसर मिलने के साथ गांवों में जलापूर्ति योजनाओं के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हो सकेंगे।

योजना की वास्तविक सफलता चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, नियमित मानदेय और जलापूर्ति योजनाओं के प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगी।

कुल मिलाकर, झारखंड सरकार के इस फैसले से 13 हजार से अधिक लोगों के लिए आजीविका के अवसर तैयार होंगे। अब ग्रामीण युवाओं की नजरें चयन प्रक्रिया, पात्रता और मानदेय से संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर रहेंगी।

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