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रील बनाने नदी में उतारी स्कॉर्पियो तेज बहाव के बीच फंसे युवक

जम्मू-कश्मीर : प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोनमर्ग में इंस्टाग्राम रील बनाने के लिए किया गया खतरनाक स्टंट युवकों के लिए मुसीबत बन गया। सामने आए विवरण के अनुसार, दो युवकों ने अपनी महिंद्रा स्कॉर्पियो तेज बहाव वाली सिंध नदी में उतार दी। नदी के बीच पहुंचने के बाद वाहन फंस गया और उसमें मौजूद लोगों के लिए मुश्किल स्थिति पैदा हो गई। सोशल मीडिया पर अलग दिखने के लिए उठाया गया यह कदम उनकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया।
घटना सोनमर्ग के पास सिंध नदी में स्कॉर्पियो फंसने की सूचना मिलने पर पुलिस और स्थानीय लोगों ने बचाव अभियान शुरू किया। शुरुआती रिपोर्ट में वाहन को नदी के भीतर चलाकर स्टंट करने की कोशिश का उल्लेख है। हालांकि, युवकों की पहचान और घटनाक्रम का विस्तृत आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है।
जानकारी मिलने पर सोनमर्ग थाने के एसएचओ पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थानीय निवासियों ने भी बचाव प्रयासों में सहयोग किया। नदी के बीच वाहन फंसने से ऐसी परिस्थिति बनी, जिसमें बाहर से सहायता की जरूरत पड़ी। स्थानीय रिपोर्ट प्रकाशित होने तक बचाव का काम चल रहा था। यह घटनाक्रम दिखाता है कि मनोरंजन के लिए शुरू किया गया एक प्रयास कितनी जल्दी आपात स्थिति में बदल सकता है।
Sonamarg: River Stunt Backfires As SUV Gets Stuck Midstream pic.twitter.com/Ygofg2ijCJ
— Daily Excelsior (@DailyExcelsior1) September 11, 2026
सोनमर्ग की प्राकृतिक सुंदरता देखने और उसकी तस्वीरें लेने आने वाले पर्यटकों के बीच यह घटना खतरनाक वीडियो बनाने की प्रवृत्ति को लेकर चिंता पैदा करती है। किसी स्थान की खूबसूरती कैमरे में दर्ज करना सामान्य पर्यटन गतिविधि है, लेकिन तेज बहाव वाली नदी में वाहन उतारना जोखिम बढ़ाता है। इस मामले में रील बनाने की कोशिश के दौरान स्कॉर्पियो का फंसना उसी खतरे का उदाहरण बना। वाहन के भीतर मौजूद लोगों की सुरक्षा बचाव प्रयासों पर निर्भर हो गई।
सोशल मीडिया पर थार और स्कॉर्पियो जैसे वाहनों के साथ स्टंट वाले वीडियो चर्चा में आते रहते हैं। हालांकि, इस विशेष घटना में सामने आया वाहन महिंद्रा स्कॉर्पियो है। यहां थार के शामिल होने की जानकारी नहीं है। किसी वाहन का आकार, मजबूती या ऊंचाई देखकर उसे हर परिस्थिति के लिए सुरक्षित मान लेना सही नहीं है। नदी में वाहन चलाने की स्थिति सड़क पर वाहन चलाने से अलग होती है और उसमें अनिश्चितता अधिक रहती है।
तेज बहाव के बीच सड़क जैसा स्थिर रास्ता नहीं होता। पानी के नीचे की जमीन, गहराई और वाहन के पहियों को मिलने वाली पकड़ का अनुमान बाहर से लगाना कठिन हो सकता है। यही वजह है कि केवल पानी की सतह देखकर रास्ते की सुरक्षा तय नहीं की जा सकती। सोनमर्ग की घटना में वाहन किस तकनीकी कारण से फंसा, इसका विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इंजन बंद होने, पहियों के धंसने या किसी अन्य खराबी की बात निश्चित रूप से नहीं कही जा सकती।
इस घटना के साथ रील संस्कृति का वह पहलू भी सामने आता है, जिसमें वीडियो को रोचक बनाने के लिए जोखिम लिया जाता है। कुछ सेकंड के दृश्य के लिए उठाया गया कदम वाहन में बैठे लोगों के साथ मदद करने वालों को भी कठिन परिस्थिति में डाल सकता है। यहां पुलिस और स्थानीय निवासियों को बचाव में शामिल होना पड़ा। इस तरह स्टंट का असर केवल उसे करने वालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सहायता के लिए दूसरे लोगों को भी सक्रिय होना पड़ा।
घटना की रिपोर्टों में युवकों को एक समूह के रूप में भी बताया गया है, जबकि उपलब्ध शुरुआती विवरण में दो युवकों का उल्लेख है। वाहन में मौजूद लोगों की अंतिम पुष्ट संख्या स्पष्ट नहीं है। इसी तरह किसी के घायल होने, वाहन को हुए नुकसान या दर्ज मामले की जानकारी भी सामने नहीं आई है। इन विषयों पर अनुमान जोड़ने के बजाय संबंधित अधिकारियों की पुष्टि आवश्यक है। फिलहाल वाहन के नदी में फंसने और बचाव प्रयासों की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध है।
पर्यटन के दौरान फोटो और वीडियो बनाने के लिए सुरक्षित स्थान चुनना महत्वपूर्ण है। नदी के किनारे से दृश्य रिकॉर्ड करने और वाहन को बहाव के बीच ले जाने में जोखिम का बड़ा अंतर है। सोशल मीडिया पर किसी दूसरे व्यक्ति का सफल स्टंट दिख जाना समान परिस्थितियों की गारंटी नहीं देता। वीडियो में रास्ते की वास्तविक स्थिति, पहले की तैयारी और संभावित खतरे अक्सर पूरी तरह दिखाई नहीं देते। ऐसे दृश्य देखकर लिया गया निर्णय गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है।
सोनमर्ग में स्कॉर्पियो के नदी में फंसने की घटना ने खतरनाक रील बनाने की कोशिशों पर फिर ध्यान खींचा है। दर्शन, पर्यटन या मनोरंजन के लिए की गई यात्रा में सुरक्षा की अनदेखी पूरे अनुभव को संकट में बदल सकती है। यहां नदी में वाहन उतारने के बाद युवकों को बाहरी मदद की जरूरत पड़ी। घटना का प्रमुख संदेश यही है कि कैमरे के लिए रोमांच पैदा करने की कोशिश में वास्तविक खतरे को कम करके आंकना भारी पड़ सकता है।





