जम्मू और कश्मीर

Parashuram Jayanti पर यज्ञोपवीत समारोह हुआ भव्य रूप से

Ratna Netam
20 April 2026 3:54 PM IST
Parashuram Jayanti पर यज्ञोपवीत समारोह हुआ भव्य रूप से
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Jammu.जम्मू: धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखते हुए परशुराम जयंती समारोह का आयोजन इस वर्ष विशेष रूप से यज्ञोपवीत संस्कार के साथ किया गया। समारोह में स्थानीय नागरिकों, युवाओं और धार्मिक विद्वानों ने भाग लिया। यह आयोजन परशुराम भगवान की शिक्षाओं और संस्कृति को सम्मान देने के लिए आयोजित किया गया।
समारोह की शुरुआत धार्मिक मंत्रोच्चार और पूजन से हुई। इस अवसर पर प्रमुख पंडितों और विद्वानों ने परशुराम भगवान के जीवन और उनके द्वारा स्थापित धर्म की महत्ता पर प्रकाश डाला। उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों और जीवन मूल्यों को याद करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय भागीदारी की।
युवा उपस्थित लोगों का विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करने वाला हिस्सा था यज्ञोपवीत संस्कार, जिसमें नवयुवकों को वेद मंत्रों के साथ यज्ञोपवीत धारण कराया गया। इस संस्कार का उद्देश्य सांस्कृतिक और धार्मिक शिक्षा का प्रचार और परंपरा का संरक्षण करना है। पंडितों ने नवयुवकों को संस्कार की महत्ता, कर्तव्य और जीवन में नैतिक मूल्यों के पालन के महत्व के बारे में मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित धार्मिक नेताओं ने कहा कि परशुराम भगवान की जयंती केवल पूजन और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक शिक्षा और नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना का भी अवसर है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस अवसर का उपयोग सामाजिक और धार्मिक जिम्मेदारियों को समझने और निभाने के लिए करें।
समारोह में स्थानीय युवाओं और बच्चों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और भजन प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों में परशुराम भगवान के जीवन और उनके द्वारा स्थापित धर्म और न्याय की कहानी को रंगमंच और गीतों के माध्यम से जीवंत किया गया। इससे समारोह का वातावरण उत्साही और भक्तिपूर्ण बना रहा।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि यह आयोजन समाज में धार्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा देने का अवसर प्रदान करता है। नवयुवकों द्वारा यज्ञोपवीत धारण करना इस बात का प्रतीक है कि संस्कार और संस्कृति की धारा निरंतर जारी है।
समारोह का समापन प्रसाद वितरण और सामूहिक भजन के साथ किया गया। उपस्थित लोगों ने इस अवसर पर यह संकल्प लिया कि वे परशुराम भगवान के आदर्शों और नैतिक मूल्यों का पालन करेंगे और अपने जीवन में धर्म और न्याय के मार्ग पर चलेंगे।
इस प्रकार, परशुराम जयंती का यह समारोह यज्ञोपवीत संस्कार के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। समारोह ने न केवल धार्मिक आस्था को बल दिया, बल्कि युवा पीढ़ी को संस्कार, शिक्षा और नैतिकता के प्रति जागरूक करने का कार्य भी किया।
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