जम्मू और कश्मीर

वैष्णो देवी मंदिर को 3 साल में 32 किलो सोना, ₹572 करोड़ दान

Kavita2
11 Aug 2026 3:33 PM IST
वैष्णो देवी मंदिर को 3 साल में 32 किलो सोना, ₹572 करोड़ दान
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में भक्तों की आस्था का एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) को भक्तों से करीब 32.10 किलोग्राम सोना और 572.14 करोड़ रुपये नकद दान के रूप में प्राप्त हुए हैं। यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता रमन शर्मा की ओर से दायर RTI के जवाब में सामने आई है।

यह आंकड़ा ऐसे समय सामने आया है, जब वैष्णो देवी दरबार में चढ़ावे के रूप में आई चांदी जैसी दिखने वाली धातु की शुद्धता को लेकर सवाल उठे हैं। चढ़ावे में मिली इस धातु की वास्तविक प्रकृति और शुद्धता को लेकर उठे सवालों ने मंदिर में आने वाले दान और उसकी जांच-प्रक्रिया को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

RTI से सामने आया दान का आंकड़ा

RTI के जवाब में श्राइन बोर्ड से संबंधित वित्तीय जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इसमें वित्त वर्ष 2024-25, 2025-26 और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून तक प्राप्त दान का विवरण शामिल है।

इन आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में भक्तों ने बड़ी मात्रा में नकद राशि के साथ सोना भी दान किया। कुल मिलाकर करीब 32.10 किलो सोना और 572.14 करोड़ रुपये नकद श्राइन बोर्ड को प्राप्त हुए। यह राशि भक्तों की धार्मिक आस्था और माता वैष्णो देवी के प्रति उनकी श्रद्धा का बड़ा प्रमाण मानी जा रही है।

वैष्णो देवी मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए कटरा पहुंचते हैं। भक्तों की यह भारी संख्या मंदिर की आय और चढ़ावे में भी दिखाई देती है।

तीन साल के आंकड़ों ने खींचा ध्यान

RTI के जरिए सामने आया यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें एक से अधिक वित्तीय वर्षों की जानकारी शामिल है। इससे मंदिर को मिलने वाले दान की व्यापक तस्वीर सामने आती है।

श्रद्धालु मंदिर में नकद राशि के अलावा सोना, चांदी और अन्य कीमती धातुएं भी चढ़ावे के रूप में अर्पित करते हैं। कई भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी दान करते हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन के सामने इन वस्तुओं की सुरक्षित व्यवस्था, मूल्यांकन और रिकॉर्ड बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है।

नकद दान के अलावा कीमती धातुओं के रूप में प्राप्त चढ़ावे की पारदर्शी गणना और जांच भी महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर तब, जब किसी धातु की शुद्धता को लेकर सवाल खड़े हों।

चांदी जैसी धातु को लेकर सवाल

दान के इस बड़े आंकड़े के बीच मंदिर में चढ़ावे के रूप में आई चांदी जैसी दिखने वाली धातु को लेकर विवाद ने भी ध्यान खींचा है। सवाल यह है कि चढ़ावे में प्राप्त धातु वास्तव में चांदी है या किसी अन्य धातु का मिश्रण।

धातु की शुद्धता का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी होती है। जब तक परीक्षण की रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक केवल देखने के आधार पर किसी धातु को शुद्ध चांदी मानना उचित नहीं होगा।

यही वजह है कि चढ़ावे में मिली ऐसी वस्तुओं की जांच और मूल्यांकन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाती है। मंदिर में बड़ी मात्रा में सोना और नकद दान आने के कारण दान की गणना और रिकॉर्डिंग की पारदर्शिता भी अहम मुद्दा है।

भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र

श्री माता वैष्णो देवी मंदिर देश के सबसे लोकप्रिय धार्मिक स्थलों में से एक है। त्रिकुटा पर्वत की पहाड़ियों में स्थित माता के भवन तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु कटरा से यात्रा शुरू करते हैं। कठिन चढ़ाई और लंबी यात्रा के बावजूद हर साल लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

भक्तों के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक दर्शन तक सीमित नहीं होती। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद मंदिर में दान भी करते हैं। कोई नकद राशि चढ़ाता है तो कोई सोने-चांदी के आभूषण या अन्य कीमती वस्तुएं अर्पित करता है।

इस वजह से श्राइन बोर्ड को हर साल बड़ी मात्रा में दान प्राप्त होता है। मंदिर प्रशासन इस धन और अन्य चढ़ावे का प्रबंधन करता है तथा धार्मिक और तीर्थयात्रियों से जुड़ी सुविधाओं के संचालन में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

RTI से पारदर्शिता पर चर्चा

सामाजिक कार्यकर्ता रमन शर्मा की ओर से दायर RTI के माध्यम से सामने आए आंकड़ों ने मंदिर में प्राप्त दान को लेकर सार्वजनिक चर्चा को बढ़ा दिया है। RTI कानून नागरिकों को सरकारी और सार्वजनिक संस्थाओं से निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है। ऐसे में इस तरह की जानकारी से किसी संस्थान की आय और उसके प्रबंधन से जुड़े पहलुओं को समझने में मदद मिलती है।

हालांकि, केवल दान की कुल राशि सामने आने से उसके उपयोग या प्रबंधन पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए श्राइन बोर्ड के विस्तृत वित्तीय रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट और खर्च से संबंधित जानकारी को देखना जरूरी होगा।

सोना और नकद दान से बड़ी जिम्मेदारी

करीब 32.10 किलो सोना और 572.14 करोड़ रुपये नकद का आंकड़ा यह बताता है कि श्राइन बोर्ड के पास आने वाले चढ़ावे का पैमाना कितना बड़ा है। इतनी बड़ी मात्रा में दान के साथ सुरक्षा, लेखांकन, मूल्यांकन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है।

चढ़ावे में मिलने वाली कीमती धातुओं की शुद्धता की जांच, उनका सही मूल्यांकन और रिकॉर्ड रखना मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारियों में शामिल है। वहीं नकद दान के मामले में भी व्यवस्थित लेखांकन और ऑडिट जरूरी है।

फिलहाल RTI से सामने आए आंकड़ों ने माता वैष्णो देवी मंदिर में भक्तों की आस्था से जुड़े दान की बड़ी तस्वीर सामने रखी है। तीन वित्तीय अवधियों में 32.10 किलो सोना और 572.14 करोड़ रुपये से अधिक नकद का चढ़ावा इस धार्मिक स्थल की व्यापक लोकप्रियता को दर्शाता है। दूसरी ओर, चढ़ावे में मिली संदिग्ध धातु की शुद्धता को लेकर उठे सवालों के बीच अब निगाहें जांच और श्राइन बोर्ड की ओर से दी जाने वाली आधिकारिक जानकारी पर टिकी हैं।

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