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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में राज्य दर्जे के प्रस्ताव पर हंगामा, स्पीकर हटाने की मांग पर अड़ी BJP

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को एक बार फिर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विवाद की वजह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा एक दिन पहले पेश किया गया वह प्रस्ताव रहा, जिसमें केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य दर्जा तुरंत बहाल करने की मांग की गई थी। भाजपा ने प्रस्ताव की भाषा और इसे सदन में लाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए स्पीकर अब्दुल रहीम राथर को हटाने की अपनी मांग दोहराई।
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि भाजपा ने सोमवार को स्पीकर के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव दिया था। पार्टी का आरोप है कि स्पीकर ने विधानसभा के नियमों में ढील देते हुए मुख्यमंत्री का प्रस्ताव सदन में लाने की अनुमति दी। भाजपा विधायकों ने यह भी कहा कि जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लंबित है तो उन्हें स्वयं पद छोड़ देना चाहिए या मामले को सदन के सामने रखा जाना चाहिए।
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायकों ने नारेबाजी की और कई सदस्य सदन के वेल तक पहुंच गए। सोमवार की कार्यवाही में भी भाजपा सदस्यों ने “स्पीकर साहब कुर्सी छोड़ो” जैसे नारे लगाए थे। स्पीकर राथर ने जवाब में कहा था कि उन्हें हटाने से संबंधित प्रस्ताव की प्रक्रिया विधानसभा के निर्धारित नियमों के अनुसार ही होगी। उन्होंने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि लिखित नोटिस मिलने के बाद भी ऐसा प्रस्ताव कम से कम 14 दिन बाद सदन के कामकाज में शामिल किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में प्रस्ताव रखते हुए केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का “तत्काल और पूर्ण” राज्य दर्जा बहाल करने की मांग की थी। प्रस्ताव को सोमवार को विधानसभा ने पारित कर दिया था, जबकि भाजपा विधायकों ने विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया।
भाजपा का कहना है कि वह जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिए जाने के खिलाफ नहीं है। विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने स्पष्ट किया कि पार्टी राज्य दर्जे का समर्थन करती है, लेकिन उमर अब्दुल्ला के प्रस्ताव में इस्तेमाल कुछ शब्दों और पुराने प्रस्तावों के संदर्भ पर उसकी आपत्ति है। भाजपा का मुख्य विरोध उस भाषा को लेकर है, जिसमें जम्मू-कश्मीर की 5 अगस्त 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति की ओर संकेत किया गया है।
मुख्यमंत्री के प्रस्ताव में वर्ष 2000 और नवंबर 2024 में विधानसभा द्वारा पारित पुराने प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया है। 2000 में विधानसभा ने अधिक स्वायत्तता से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया था, जबकि नवंबर 2024 के प्रस्ताव में विशेष संवैधानिक दर्जे से जुड़े मुद्दों को उठाया गया था। भाजपा इसी संदर्भ को लेकर सबसे अधिक आपत्ति जता रही है।
भाजपा विधायकों का तर्क है कि पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग और 2019 से पहले की संवैधानिक व्यवस्था को वापस लाने की मांग दो अलग मुद्दे हैं। पार्टी का कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल होना चाहिए, लेकिन अनुच्छेद 370 या पुरानी विशेष संवैधानिक स्थिति की वापसी को इस प्रस्ताव से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
दूसरी ओर उमर अब्दुल्ला ने प्रस्ताव का बचाव करते हुए केंद्र से यह स्पष्ट करने की मांग की कि राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए “सही समय” से उसका क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को लंबे समय तक केंद्र शासित प्रदेश बनाकर नहीं रखा जाना चाहिए और निर्वाचित सरकार को पूर्ण राज्य सरकार के अधिकार मिलने चाहिए।
जम्मू-कश्मीर को अगस्त 2019 में राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया था। केंद्र सरकार ने उस समय अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करते हुए तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में पुनर्गठित किया था। तब से राज्य दर्जे की बहाली जम्मू-कश्मीर की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस लंबे समय से राज्य दर्जे की बहाली की मांग करती रही है। 2024 में विधानसभा चुनाव के बाद उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद भी यह मुद्दा सरकार की प्रमुख राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।
सोमवार को प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में दस संशोधन भी पेश किए गए थे। इनमें से आठ संशोधन ऐसे बताए गए, जिनमें अगस्त 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर को हासिल विशेष संवैधानिक प्रावधानों की बहाली से संबंधित बातें शामिल थीं। इससे भाजपा की आपत्ति और बढ़ गई।
भाजपा ने आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य दर्जे की मांग के साथ अनुच्छेद 370 और स्वायत्तता के मुद्दे को जोड़ने की कोशिश कर रही है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि विधानसभा को जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति और जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखने का अधिकार है।
स्पीकर अब्दुल रहीम राथर को हटाने की मांग ने विधानसभा में अलग राजनीतिक और संवैधानिक विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा का दावा है कि मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को अनुमति देने में विधानसभा नियमों का पालन नहीं हुआ। स्पीकर ने इस आरोप को स्वीकार नहीं किया और कहा कि उनके खिलाफ कोई प्रस्ताव आता है तो उसे नियमों के मुताबिक ही निपटाया जाएगा।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का प्रस्ताव सोमवार को भाजपा के विरोध और वॉकआउट के बावजूद पारित हो गया। इसके बाद भाजपा ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेगी।
राज्य दर्जे का मुद्दा केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार के बीच लंबे समय से चर्चा का विषय है। केंद्र की ओर से अलग-अलग अवसरों पर कहा गया है कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल किया जाएगा, लेकिन इसके लिए कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है। इसी बात को लेकर उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में सवाल उठाया कि आखिर “उचित समय” कब आएगा।
फिलहाल विधानसभा में विवाद दो मुद्दों पर केंद्रित है—पहला, जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य दर्जे की बहाली और दूसरा, मुख्यमंत्री के प्रस्ताव में 2019 से पहले की संवैधानिक स्थिति से जुड़े संदर्भ। भाजपा राज्य दर्जे का समर्थन करते हुए दूसरे मुद्दे का विरोध कर रही है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने प्रस्ताव को जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों से जोड़कर देख रही है।
स्पीकर के खिलाफ भाजपा के प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया विधानसभा नियमों के तहत चलेगी। वहीं मुख्यमंत्री का राज्य दर्जे वाला प्रस्ताव पारित हो चुका है और इसे केंद्र सरकार को भेजा जाना है। इस बीच सदन में जारी टकराव से साफ है कि जम्मू-कश्मीर का संवैधानिक दर्जा आने वाले दिनों में भी विधानसभा की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना रहेगा





