जम्मू और कश्मीर

रोहिंग्याओं पर कार्रवाई से उमर नाराज

Kavita2
6 Oct 2026 5:29 PM IST
रोहिंग्याओं पर कार्रवाई से उमर नाराज
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जम्मू-कश्मीर : मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश में रोहिंग्याओं के खिलाफ पुलिस की अचानक कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई पर उनकी सरकार का कोई नियंत्रण नहीं था और यह मामला चुनी हुई सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर था।

श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बिना अनुमति बांग्लादेश से आए लोगों का मामला अलग है, लेकिन रोहिंग्याओं को जिस तरह से अचानक निशाना बनाया जा रहा है, वह उन्हें असामान्य लगता है।

उन्होंने कहा कि जब रोहिंग्याओं को उनके देश से बाहर निकाला गया था, तब उन्हें यहां रहने की जगह दी गई थी। ऐसे में अब अचानक उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू किए जाने को उन्होंने सवालों के घेरे में रखा।

मुख्यमंत्री ने कहा, “जो लोग बिना इजाजत बांग्लादेश से आए हैं, उनका मामला अलग है। लेकिन रोहिंग्या, जिन्हें बिना किसी वजह के निशाना बनाया जा रहा है—जब उन्हें उनके देश से निकाला गया था, तो हमने उन्हें यहां जगह दी थी।”

उन्होंने आगे कहा कि रोहिंग्याओं के खिलाफ अचानक कार्रवाई उन्हें अजीब लगती है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस से जुड़ी यह कार्रवाई उनकी सरकार के नियंत्रण में नहीं थी।

उमर अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय आया है जब जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या और अन्य अवैध प्रवासियों को लेकर पुलिस की कार्रवाई चर्चा में है। इस मुद्दे पर सुरक्षा, मानवीय दृष्टिकोण और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में बांग्लादेश से बिना अनुमति आए लोगों और रोहिंग्याओं के मामले को अलग-अलग बताया। उनका कहना था कि दोनों को एक ही नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रोहिंग्याओं को पहले यहां रहने की जगह दी गई थी। ऐसे में यदि अब उनकी स्थिति को लेकर कोई नीति बदली जा रही है तो उसके पीछे स्पष्ट कारण और प्रक्रिया होनी चाहिए।

इस बयान के साथ ही जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार और पुलिस प्रशासन के बीच अधिकारों के बंटवारे का मुद्दा भी एक बार फिर सामने आया है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई उनके नियंत्रण में नहीं थी। इससे उन्होंने यह संकेत दिया कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कुछ मामलों में निर्वाचित सरकार के अधिकार सीमित हैं।

केंद्र शासित प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्र की भूमिका प्रमुख रहती है। ऐसे में कई बार राज्य सरकार की राजनीतिक जिम्मेदारी और वास्तविक प्रशासनिक अधिकारों के बीच अंतर दिखाई देता है।

रोहिंग्या मुद्दा लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील विषय रहा है। एक तरफ सुरक्षा और अवैध आव्रजन से जुड़े सवाल उठते हैं, वहीं दूसरी ओर मानवीय आधार पर शरण और संरक्षण की चर्चा भी होती है।

उमर अब्दुल्ला के बयान में भी यही अंतर दिखाई दिया। उन्होंने अवैध तरीके से सीमा पार कर आने वाले लोगों और विस्थापित रोहिंग्याओं की स्थिति को अलग मानने की बात कही।

मुख्यमंत्री ने यह नहीं कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि अचानक केवल रोहिंग्याओं के खिलाफ अभियान क्यों चलाया जा रहा है।

उनकी टिप्पणी के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी गरमाने की संभावना है। विपक्ष और अन्य दल इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

फिलहाल मुख्यमंत्री का फोकस इस बात पर रहा कि उनकी सरकार को इस कार्रवाई की दिशा या तरीके पर नियंत्रण नहीं था।

इस बयान ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर की मौजूदा प्रशासनिक संरचना पर ध्यान खींचा है। निर्वाचित सरकार होने के बावजूद कई अहम क्षेत्रों में अंतिम अधिकार केंद्र के पास रहते हैं।

ऐसे में मुख्यमंत्री की ओर से किसी पुलिस कार्रवाई से दूरी बनाना प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविकताओं को भी सामने लाता है।

रोहिंग्याओं के मामले में अब यह देखा जाना बाकी है कि पुलिस और प्रशासन आगे किस तरह की कार्रवाई करते हैं और क्या इस संबंध में कोई विस्तृत नीति या दिशा-निर्देश सामने आते हैं।

मानवीय दृष्टिकोण से भी यह मुद्दा संवेदनशील है, क्योंकि इनमें परिवार, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हो सकते हैं। किसी भी कार्रवाई के दौरान कानूनी प्रक्रिया और बुनियादी अधिकारों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।

दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियां अवैध आव्रजन और पहचान संबंधी मामलों को राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से भी देखती हैं।

इसी वजह से यह मुद्दा केवल स्थानीय प्रशासन का नहीं बल्कि व्यापक सुरक्षा और नीति से जुड़ा विषय बन जाता है।

उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि रोहिंग्याओं के खिलाफ अचानक कार्रवाई उन्हें अप्रत्याशित लगी।

उनका कहना था कि यदि इन लोगों को वर्षों पहले यहां रहने दिया गया था तो अब किसी बदलाव की स्थिति में पारदर्शी नीति अपनाई जानी चाहिए।

फिलहाल उनके बयान के बाद इस पूरे मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज हो सकती है।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र या पुलिस प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई के कारणों और दायरे को लेकर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।

जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्याओं की मौजूदगी का मुद्दा पहले भी कई बार चर्चा में आ चुका है और अब मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह एक बार फिर सुर्खियों में है।

कुल मिलाकर, उमर अब्दुल्ला ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अपनी सरकार के नियंत्रण से बाहर बताया और रोहिंग्याओं के मामले को अन्य अवैध प्रवासियों से अलग संदर्भ में देखने की बात कही।

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