जम्मू और कश्मीर

ट्रंप की शर्तें, मोदी की मंजूरी, Karra ने जताई आपत्ति

Payal
6 April 2026 4:56 PM IST
ट्रंप की शर्तें, मोदी की मंजूरी, Karra ने जताई आपत्ति
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JAMMU.जम्मू: राजनीतिक बयानबाजी गर्म हो गई है, जब Karra ने कहा कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर कई शर्तें थोप रहे थे, और भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उन शर्तों को स्वीकार कर लिया। कर्रा ने यह टिप्पणी भारत-अमेरिका के हालिया समझौतों और सहयोग पर आधारित सार्वजनिक चर्चा के दौरान की।
कर्रा का दावा है कि अमेरिकी शर्तें भारत के राष्ट्रीय हितों के अनुकूल नहीं थीं और उन्हें स्वीकार करना भारत की संप्रभुता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने इन शर्तों को बिना व्यापक चर्चा और संसद की स्वीकृति के मान लिया, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कर्रा के बयान से यह साफ़ होता है कि कुछ दल विदेशी दबाव और समझौतों की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। कर्रा ने जोर देकर कहा कि विदेशों के साथ किसी भी समझौते में भारत को अपनी स्वायत्त नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
कर्रा ने यह भी कहा कि समझौते केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होने चाहिए, बल्कि उन्हें भारतीय जनता और हितों को सर्वोपरि रखते हुए लागू किया जाना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि जनता को समझौतों की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए ताकि कोई भ्रम या विवाद पैदा न हो।
प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने अभी तक कर्रा के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग को लगातार मजबूत करने के प्रयास जारी रहे हैं। इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सामरिक और आर्थिक सहयोग बढ़ाना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कर्रा जैसे बयान राजनीतिक बहस को तेज करने और सरकारी नीतियों पर सवाल उठाने का तरीका हो सकते हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी समझौतों में पारदर्शिता और सावधानी जरूरी है, ताकि राष्ट्रीय हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
कुल मिलाकर, जम्मू में कर्रा का बयान भारत-अमेरिका समझौते पर नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे रहा है। उनका दावा है कि ट्रंप की शर्तें भारत पर थोप दी गईं और मोदी सरकार ने उन्हें स्वीकार कर लिया, जो अब राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर और स्पष्टता और सरकारी प्रतिक्रिया की संभावना है।
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