- Home
- /
- राज्य
- /
- जम्मू और कश्मीर
- /
- यूएपीए के तहत सुरक्षा...
जम्मू और कश्मीर
यूएपीए के तहत सुरक्षा कानूनों में कड़ाई: High Court remarks
Payal
8 May 2026 6:00 PM IST

x
Jammu.जम्मू: यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) मामलों में ज़मानत देने से इनकार करने के लिए केवल आरोपी का डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट पर्याप्त नहीं है। यह महत्वपूर्ण टिप्पणी उच्च न्यायालय की डिवीज़न बेंच (डीबी) ने हाल ही में की। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कानूनों के तहत आरोपी को रोकने के लिए मामले की जांच और सबूतों का गंभीर विश्लेषण होना अनिवार्य है।
डीबी ने यह स्पष्ट किया कि केवल यह दावा कि आरोपी ने अपने स्टेटमेंट में कुछ जानकारी दी है, न्यायालय के लिए ज़मानत अस्वीकार करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। न्यायालय ने कहा कि यूएपीए के तहत आरोपों की गंभीरता, जांच का व्यापक दृष्टिकोण और सबूतों की प्रामाणिकता पर ध्यान देना अनिवार्य है।
अदालत के फैसले में उल्लेख किया गया कि यूएपीए जैसी गंभीर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी कानूनों में ज़मानत देने या न देने का निर्णय केवल लिखित स्टेटमेंट पर आधारित नहीं होना चाहिए। इसके लिए जांच अधिकारी द्वारा जुटाए गए तथ्य, गवाहों की जांच और सबूतों का विश्लेषण आवश्यक है।
डीबी ने यह भी कहा कि कानून का उद्देश्य न केवल आरोपी के अधिकारों की रक्षा करना है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक हित की भी सुरक्षा करना है। इसलिए, किसी भी मामले में ज़मानत देने या अस्वीकार करने से पहले न्यायालय को सुनिश्चित करना चाहिए कि आरोपी के स्टेटमेंट और प्रलेखित सबूतों का गहन परीक्षण हुआ है।
इस निर्णय में अदालत ने कहा कि डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट केवल प्रारंभिक जानकारी के रूप में काम करता है, लेकिन आरोपी के खिलाफ आरोपों की पुष्टि या उनके खंडन के लिए पर्याप्त नहीं है। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यूएपीए मामलों में ज़मानत की प्रक्रिया अन्य सामान्य अपराधों की तुलना में अधिक सतर्कता और गहन समीक्षा की मांग करती है।
अदालत के मुताबिक़, ज़मानत देने का निर्णय केवल आरोपी की व्यक्तिगत जानकारी या बयान पर आधारित होने पर सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इसके लिए मामले के सबूत, जांच रिपोर्ट, गवाहों की पुष्टि और संभावित खतरे का मूल्यांकन करना अनिवार्य है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय यूएपीए मामलों में न्यायालय की सतर्कता और जांच प्रक्रिया को मजबूती देता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सुरक्षा कानूनों का दुरुपयोग न हो और साथ ही आरोपी के अधिकारों की भी रक्षा की जाए।
इस आदेश के बाद, यूएपीए के तहत मामलों में ज़मानत याचिकाओं की सुनवाई में न्यायालय और अधिक सतर्क और सावधान होगा। यह फैसला स्पष्ट करता है कि केवल डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट पर भरोसा करना कानूनी दृष्टि से पर्याप्त नहीं है।
इस निर्णय ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है। अदालत ने कहा कि आरोपी की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर मामलों में यह निर्णय लेने में गहन और सटीक जांच अनिवार्य है।
Tagsयूएपीएसुरक्षा कानूनोंकड़ाईHigh Court remarksUAPAsecurity lawsstrictnessजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





