जम्मू और कश्मीर

डल झील और ट्यूलिप गार्डन की खूबसूरती के बीच श्रीनगर में बढ़ता कचरे का संकट

Kavita2
26 Aug 2026 5:47 PM IST
डल झील और ट्यूलिप गार्डन की खूबसूरती के बीच श्रीनगर में बढ़ता कचरे का संकट
x

श्रीनगर। कश्मीर की खूबसूरत वादियों और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनिया भर में पहचान रखने वाला श्रीनगर अब एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती का सामना कर रहा है। डल झील, मुगल गार्डन, एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन और बर्फ से ढके पहाड़ों के लिए मशहूर शहर में अब कचरे का एक बड़ा पहाड़ चिंता का कारण बन गया है।

शहर के उत्तरी बाहरी इलाके अचन में पिछले चार दशकों से जमा हो रहा कचरा अब विशाल रूप ले चुका है। यहां करीब 11 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा होने की बात सामने आई है। शहर में हर दिन बड़ी मात्रा में नया कचरा पहुंचने के कारण यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

श्रीनगर की पहचान हमेशा से प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन से जुड़ी रही है। देश-विदेश से लाखों पर्यटक यहां डल झील में शिकारा की सवारी, मुगलकालीन बागों की खूबसूरती और कश्मीर की वादियों का आनंद लेने आते हैं। ऐसे में शहर के आसपास जमा होता कचरा न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि पर्यटन क्षेत्र पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अचन में बढ़ता कचरे का पहाड़

अचन क्षेत्र में वर्षों से शहर का ठोस कचरा डंप किया जाता रहा है। समय के साथ यहां कचरे का ढेर इतना बढ़ गया कि यह एक बड़े लैंडफिल साइट का रूप ले चुका है। पुराने कचरे के साथ-साथ रोजाना आने वाला नया कचरा भी इस समस्या को और गंभीर बना रहा है।

कचरे के लंबे समय तक जमा रहने से आसपास के पर्यावरण पर असर पड़ने की आशंका है। इससे जमीन, पानी और हवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने कचरे के वैज्ञानिक निपटारे के लिए प्रभावी योजना की जरूरत है।

पर्यटन पर पड़ सकता है असर

श्रीनगर जम्मू-कश्मीर के पर्यटन और अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले पर्यटक शहर की प्राकृतिक सुंदरता और साफ वातावरण की उम्मीद लेकर आते हैं। ऐसे में शहर के आसपास बढ़ता कचरा पर्यटन की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।

पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कश्मीर की पहचान उसकी खूबसूरती और स्वच्छ वातावरण से है। यदि शहर में सफाई व्यवस्था कमजोर होती है तो इसका सीधा असर पर्यटकों के अनुभव पर पड़ सकता है।

होटल व्यवसायियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि शहर को साफ और आकर्षक बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि पर्यटन बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका का आधार है।

बढ़ती आबादी और कचरे की चुनौती

श्रीनगर में बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के कारण कचरे की मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। घरों, बाजारों और व्यावसायिक संस्थानों से निकलने वाला कचरा शहर के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल कचरा डंप करने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए कचरे का अलग-अलग वर्गीकरण, रीसाइक्लिंग, वैज्ञानिक निपटान और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली अपनाने की जरूरत है।

वैज्ञानिक तरीके से निपटारे की जरूरत

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने कचरे को हटाने और उसका वैज्ञानिक तरीके से उपचार करने की आवश्यकता है। इसके लिए बायो-माइनिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें पुराने कचरे को अलग कर उपयोगी सामग्री निकाली जाती है।

इसके अलावा शहर में कचरा कम करने के लिए लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है। घरों से निकलने वाले कचरे को गीले और सूखे कचरे में अलग करने की व्यवस्था मजबूत करने से समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी

श्रीनगर प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अचन में जमा पुराने कचरे का समाधान करना और भविष्य में कचरा बढ़ने से रोकना है। इसके लिए दीर्घकालिक योजना और प्रभावी प्रबंधन व्यवस्था की जरूरत है।

शहर की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने के लिए स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना होगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी है।

कश्मीर की पहचान हमेशा से साफ हवा, खूबसूरत झीलों और पहाड़ों से रही है। ऐसे में श्रीनगर में बढ़ता कचरे का पहाड़ एक चेतावनी की तरह है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी।

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसका असर न केवल शहर की सुंदरता बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

Next Story