जम्मू और कश्मीर

कैंसर मरीजों के दो अलग आंकड़े सरकार ने बताए 51 हजार विधायक ने किया 71 हजार का दावा

Kavita2
22 Sept 2026 2:27 PM IST
कैंसर मरीजों के दो अलग आंकड़े सरकार ने बताए 51 हजार विधायक ने किया 71 हजार का दावा
x

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में कैंसर मरीजों की संख्या को लेकर विधानसभा में दो अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश में कैंसर मरीजों की संख्या करीब 51 हजार है। वहीं विधायक मीर सैफुल्लाह ने 2024 के आंकड़ों का हवाला देते हुए यह संख्या करीब 71 हजार बताई। दोनों आंकड़ों में अंतर के कारण कैंसर मरीजों की वास्तविक संख्या और डेटा के आधार को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

विधायक मीर सैफुल्लाह के सवाल का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कैंसर की जल्द पहचान, समय पर उपचार और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार स्क्रीनिंग को लोगों तक पहुंचाने और विशेषज्ञ उपचार सुविधाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है।

51 हजार और 71 हजार के आंकड़ों में अंतर

विधानसभा में चर्चा के दौरान मीर सैफुल्लाह ने 2024 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में करीब 71 हजार कैंसर मरीज हैं। उनके अनुसार इनमें 50 हजार से अधिक मरीज कश्मीर क्षेत्र से संबंधित हैं।

इसके जवाब में मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में कैंसर मरीजों की संख्या करीब 51 हजार है। इस तरह विधानसभा में दो अलग आंकड़े सामने आए।

पुराने सरकारी जवाबों में अलग-अलग अवधि और चिकित्सा संस्थानों में दर्ज नए मामलों के आंकड़े भी दिए गए हैं। फरवरी 2026 में सरकार ने विधानसभा में बताया था कि हाल के वर्षों में 32 हजार से अधिक कैंसर मामले दर्ज हुए थे। इसलिए अलग-अलग आंकड़ों की तुलना करते समय उनकी अवधि, परिभाषा और डेटा स्रोत को ध्यान में रखना जरूरी है।

जल्द पहचान पर सरकार का जोर

स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा में कहा कि कैंसर की जल्द पहचान बेहद महत्वपूर्ण है। कई मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब वह उन्नत अवस्था में पहुंच चुकी होती है, जिससे उपचार अधिक जटिल हो सकता है।

इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग स्क्रीनिंग को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। इसका उद्देश्य संभावित मरीजों की शुरुआती स्तर पर पहचान करना और आवश्यकता के अनुसार उन्हें आगे की जांच तथा उपचार के लिए भेजना है।

घर-घर स्क्रीनिंग की दिशा में काम

सरकार ने कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही है। स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से लोगों तक जांच की सुविधा पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

स्क्रीनिंग के दौरान संदिग्ध लक्षण सामने आने पर मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों में जांच के लिए भेजा जा सकता है। इससे बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में होने की संभावना बढ़ती है।

स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक सरकार पिछले दो वर्षों में कैंसर से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा चुकी है और जरूरत के आधार पर आगे भी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

SKIMS में उपलब्ध है कैंसर उपचार

शेरे-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी SKIMS सौरा कैंसर उपचार के प्रमुख संस्थानों में शामिल है। यहां कैंसर मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।

फरवरी 2026 में विधानसभा में दिए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक SKIMS सौरा में 2023 में 5,108, 2024 में 5,387 और 2025 में 5,791 कैंसर मामले दर्ज किए गए थे।

सरकार का कहना है कि SKIMS सहित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कैंसर उपचार से संबंधित उपकरण और अन्य सुविधाएं मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

जम्मू में भी बढ़ाई जा रही सुविधाएं

सरकारी मेडिकल कॉलेज जम्मू में भी कैंसर मरीजों के लिए विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यहां 2023 में 1,767 कैंसर मामले दर्ज हुए थे। 2024 में यह संख्या 2,206 और 2025 में 2,569 रही।

सरकार ने कैंसर जांच के लिए डायग्नोस्टिक सुविधाओं के विस्तार की योजना भी बनाई है। 2026-27 के बजट दस्तावेज में GMC श्रीनगर में PET-Scan सुविधा स्थापित करने और इसे GMC कठुआ तक विस्तारित करने की बात कही गई है। इसके अलावा नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में MRI जैसी डायग्नोस्टिक सुविधाएं मजबूत करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

गरीब मरीजों को मुफ्त दवाओं का दावा

विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री ने आर्थिक रूप से कमजोर कैंसर मरीजों के लिए उपलब्ध सहायता की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीपीएल और अंत्योदय अन्न योजना यानी AAY श्रेणी के पात्र मरीजों को दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पात्र कैंसर मरीजों की दवाओं को आयुष्मान भारत योजना के तहत कवर किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक स्थिति के कारण किसी मरीज के उपचार में बाधा न आए।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए टीकाकरण

कैंसर की रोकथाम की दिशा में सरकार ने सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ टीकाकरण शुरू किए जाने की जानकारी भी दी है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उपचार के साथ बीमारी की रोकथाम और शुरुआती पहचान पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने विशेष रूप से स्तन कैंसर समेत विभिन्न प्रकार के कैंसर मामलों को लेकर चिंता जताई है।

कैंसर नियंत्रण रणनीति पर भी काम

सरकार ने इससे पहले विधानसभा में जम्मू-कश्मीर के लिए व्यापक कैंसर नियंत्रण रणनीति तैयार करने की बात कही थी। इसे नीति आयोग और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी ICMR के सहयोग से आगे बढ़ाने की योजना बताई गई थी।

इसके तहत बुनियादी ढांचा विकसित करने, चिकित्सा कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

बेहतर जांच से भी बढ़ सकती है दर्ज मामलों की संख्या

फरवरी 2026 में स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा में कहा था कि दर्ज कैंसर मामलों में बढ़ोतरी को सीधे वास्तविक कैंसर दर में तेज वृद्धि नहीं माना जा सकता। बेहतर डायग्नोस्टिक सुविधाओं और ज्यादा जांच के कारण भी पहले की तुलना में अधिक मामले दर्ज हो सकते हैं।

यही कारण है कि कुल मरीजों की संख्या, किसी एक वर्ष में सामने आए नए मामलों और अलग-अलग अस्पतालों में पंजीकृत मरीजों के आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

आंकड़ों के अंतर को स्पष्ट करने की जरूरत

विधानसभा में सामने आए करीब 51 हजार और 71 हजार के आंकड़ों ने डेटा की परिभाषा को महत्वपूर्ण बना दिया है। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दोनों आंकड़े सक्रिय मरीजों, पंजीकृत मरीजों, किसी निश्चित अवधि के मामलों या संचयी आंकड़ों में से किस श्रेणी को दर्शाते हैं।

फिलहाल सरकार ने करीब 51 हजार मरीजों का आंकड़ा बताया है, जबकि विधायक मीर सैफुल्लाह ने 2024 के डेटा के आधार पर करीब 71 हजार मरीज होने की बात कही है।

सरकार का मौजूदा जोर कैंसर की जल्द पहचान, स्क्रीनिंग, विशेषज्ञ उपचार सुविधाओं के विस्तार और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को राहत देने पर है। आने वाले समय में एक समान और स्पष्ट डेटा प्रणाली मरीजों की वास्तविक संख्या समझने और उसी आधार पर स्वास्थ्य सुविधाओं की योजना बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Next Story