जम्मू और कश्मीर

देश-दुनिया के सामने 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म ने कश्मीरी पंडितों के पलायन को किया उजागर: आरएसएस प्रमुख

Renuka Sahu
4 April 2022 1:13 AM GMT
देश-दुनिया के सामने द कश्मीर फाइल्स फिल्म ने कश्मीरी पंडितों के पलायन को किया उजागर: आरएसएस प्रमुख
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फाइल फोटो 

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म ने दुनिया के सामने कश्मीरी पंडितों की वास्तविकता को उजागर किया है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि द कश्मीर फाइल्स फिल्म ने दुनिया के सामने कश्मीरी पंडितों की वास्तविकता को उजागर किया है। फि ल्म की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि इसने वर्ष 1990 में घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन के पीछे की वास्तविकता के बारे में देश भर में और बाहर जन जागरूकता पैदा की है। तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, लेकिन आम लोग कश्मीरी हिंदुओं के दर्द को समझ रहे हैं।

राजा ललितादित्य और गुरुतेग बहादुर जी के इतिहास पर भी खुलकर चर्चा की
कश्मीरी हिंदू विस्थापितों की स्थिति पर चर्चा करते हुए डॉ. भागवत ने शिर्य भट्ट, राजा ललितादित्य और गुरुतेग बहादुर जी के इतिहास पर भी खुलकर चर्चा की। बताया कि किस प्रकार शिर्यभट्ट ने धैर्य के साथ अपनी शक्ति से परिस्थितियों का सामना करते हुए कश्मीर में समाज को दिशा देकर एकजुट रखा था। राजा ललितादित्य की जीवनी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह महाराणा प्रताप और वीर शिवाजी की परंपरा के पूर्वज थे। हमें इसे सोचना और समझना चाहिए।
भारत के राजाओं का एक संघ तैयार कर राष्ट्र हितों को जगाया था
उन्होंने बताया कि किस प्रकार अरबों के आक्रमण के संकट का सामना संगठन कुशलता के साथ राजा ललितादित्य ने करते हुए शत्रुओं को सीमा पार भगाया था। राजा ललितादित्य ने उस समय भारत के राजाओं का एक संघ तैयार कर राष्ट्र हितों को जगाया था। राजा ललितादित्य का भारत के इतिहास में पराक्रम का यह योगदान अति महत्वपूर्ण है। गुरु तेग बहादुर जी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह देश हित और हिंदू हित के लिए परम त्याग के आदर्श हैं।
गुरु तेग बहादुर जी ने त्याग, धैर्य, साहस और पराक्रम दिखाया
उनकी केवल दया, करुणा ही नहीं थी, गुरु महाराज की असीम कृपा हिंद की चादर थी। उसके पीछे एक विचार भी था कि कट्टरपन नहीं, सबके प्रति अपनापन। यहीं धर्म है। इस धर्म के लिए गुरु तेग बहादुर ने औरंगजेब द्वारा दिया गया आह्वान स्वीकार करते हुए कश्मीरी पंडितों की विनती को भी स्वीकार किया और उनको बचाने के लिए स्वयं चलकर दिल्ली गए। गुरु तेग बहादुर जी ने अपना सिर दे दिया लेकिन सार नहीं दिया। अपने स्वयं की बलि चढ़ाकर भारत के प्राणों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने त्याग, धैर्य, साहस और पराक्रम दिखाया था। इसके साथ हमारी बुद्धि, शक्ति का संयोग हो और हम निरंतर प्रयासों में लगे रहे इसकी आवश्यकता है।
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