जम्मू और कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग मॉड्यूल का भंडाफोड़, 10 आतंकी सहयोगी गिरफ्तार

Kavita2
30 Oct 2026 11:45 AM IST
जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग मॉड्यूल का भंडाफोड़, 10 आतंकी सहयोगी गिरफ्तार
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में पुलिस ने केंद्र शासित प्रदेश के भीतर सक्रिय एक कथित टेरर फाइनेंसिंग मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 10 संदिग्ध आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्तियों पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने और वित्तीय सहायता पहुंचाने का आरोप है। जांच के दौरान विभिन्न डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए गए संदिग्ध लेन-देन की पड़ताल की गई, जिसमें पैसों के हस्तांतरण से जुड़ा एक व्यापक नेटवर्क सामने आया। पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क के संपर्क अलग-अलग जेलों में बंद आतंकवादियों और उनके सहयोगियों से भी जुड़े हुए हैं। प्रारंभिक जांच में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के लिए आर्थिक तथा अन्य सहायता जुटाए जाने के संकेत मिले हैं। मामले में शोपियां पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस अधिकारियों ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को बताया कि शोपियां जिले में आतंकवाद से जुड़े संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जानकारी मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान अधिकारियों ने कई ऑनलाइन भुगतान प्लेटफॉर्म पर हुए लेन-देन का विश्लेषण किया। इसके माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि धन किस स्रोत से आया और आगे किन व्यक्तियों तक पहुंचाया गया।

पुलिस का कहना है कि जांच में कई स्तरों पर धन हस्तांतरित होने की जानकारी सामने आई। संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की कड़ियों को जोड़ने के बाद कथित रूप से आतंकवाद के लिए धन जुटाने वाले व्यक्तियों की पहचान की गई। इसी आधार पर 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों के कथित संपर्क जेलों में बंद कुछ आतंकवादियों और उनके सहयोगियों से भी थे। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जेलों में बंद व्यक्तियों के साथ संपर्क किस प्रकार स्थापित किया गया और वित्तीय गतिविधियों में उनकी क्या भूमिका थी।

पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क केवल धन जुटाने तक सीमित नहीं था, बल्कि आतंकवादी गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में भी कथित तौर पर सक्रिय था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि एकत्र की गई धनराशि का उपयोग आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को संचालित करने और संबंधित व्यक्तियों तक सहायता पहुंचाने के लिए किया जाता था।

मामले में दर्ज प्राथमिकी संख्या 231/2026 के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों के संभावित संपर्कों और उनके वित्तीय लेन-देन की विस्तृत पड़ताल जारी है।

पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में शोपियां जिले के सैदपोरा बाला निवासी ओवैस शफी नायकू, रावलपोरा निवासी तजामुल अहमद शाह, चित्रगाम कलां निवासी मोइज इकबाल और इमदाद यूसुफ गनी शामिल हैं।

इसके अलावा पुलवामा जिले के मुर्रन निवासी साकिब जहूर वानी और लियाकत नजीर लोन, अरमुल्ला निवासी आमिर अहमद गनी तथा नादीगुंड त्रेंज निवासी फिरदौस ठोकर को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए अन्य दो व्यक्ति कठुआ जिले के चेक हरिया क्षेत्र के मोहम्मद हनीफ और काजू बताए गए हैं।

पुलिस ने इन सभी व्यक्तियों को कथित आतंकी वित्तपोषण नेटवर्क से जुड़े होने के संदेह में गिरफ्तार किया है। हालांकि इनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की न्यायालय में पुष्टि होना अभी बाकी है।

जांच में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट से कथित संबंधों की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस का दावा है कि नेटवर्क से जुड़े व्यक्ति आम लोगों से गुप्त रूप से धन जुटाते थे और फिर उस धन को विभिन्न वित्तीय माध्यमों से आगे पहुंचाते थे।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, कथित तौर पर जुटाई गई रकम का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने में किया जाता था। इसमें मोबाइल फोन और अन्य संचार उपकरणों जैसी सामग्री शामिल होने का संदेह है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि ऐसे संसाधनों की खरीद और आपूर्ति किन लोगों के माध्यम से की जाती थी।

इस पूरे मामले में डिजिटल भुगतान के जरिए हुए संदिग्ध लेन-देन महत्वपूर्ण साक्ष्य बनकर सामने आए हैं। पुलिस ने अलग-अलग खातों और भुगतान माध्यमों के बीच धन के प्रवाह की जांच की। अधिकारियों के अनुसार, कई स्तरों पर हुए लेन-देन की कड़ियां जोड़ने के बाद एक बड़े नेटवर्क का पता चला।

जांच एजेंसियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि धन जुटाने की गतिविधियां कितने समय से चल रही थीं और क्या गिरफ्तार आरोपियों के अलावा अन्य लोग भी इसमें शामिल थे। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि संदिग्ध रकम किस उद्देश्य से भेजी गई और उसका अंतिम उपयोग कहां हुआ।

आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण को रोकना सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। किसी भी आतंकी नेटवर्क के संचालन में धन और संसाधनों की भूमिका होती है। इसलिए सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध आर्थिक गतिविधियों की जांच के माध्यम से ऐसे नेटवर्क की पहचान करने का प्रयास करती हैं।

हालांकि जांच में किसी वित्तीय लेन-देन का संदिग्ध पाया जाना अपने आप में अपराध साबित होने का आधार नहीं होता। इसके लिए संबंधित धनराशि और कथित आपराधिक गतिविधि के बीच कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य स्थापित करना आवश्यक है।

शोपियां पुलिस की इस कार्रवाई को केंद्र शासित प्रदेश में सक्रिय संदिग्ध आतंकी सहायता नेटवर्क की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि गिरफ्तार किए गए लोगों के संपर्क विभिन्न क्षेत्रों में फैले हुए थे।

इसलिए जांच का दायरा केवल शोपियां तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। गिरफ्तार व्यक्तियों के अलग-अलग जिलों से संबंधित होने के कारण पुलिस उनके स्थानीय संपर्कों और संभावित सहयोगियों की जानकारी भी जुटा रही है।

जांच के दौरान यह भी स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि जेलों में बंद आतंकवादियों से संबंधित कथित संपर्कों के पीछे कौन-सी परिस्थितियां थीं। पुलिस को यह स्थापित करना होगा कि इन संपर्कों का संबंध वास्तव में धन जुटाने या आतंकवादी गतिविधियों को सहायता पहुंचाने से था या नहीं।

फिलहाल पुलिस ने इस मामले में जब्त धनराशि की कुल मात्रा या संदिग्ध लेन-देन के कुल मूल्य का विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए नेटवर्क के माध्यम से कितनी रकम एकत्र की गई, इसका निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है।

अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस अन्य संभावित सहयोगियों की पहचान करने, अतिरिक्त वित्तीय संपर्कों का पता लगाने और कथित नेटवर्क के संचालन की पूरी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।

जांच में नए तथ्य सामने आने पर अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस का कहना है कि आतंकवादी गतिविधियों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की पहचान करना और उनके संचालन पर रोक लगाना जांच का प्रमुख उद्देश्य है।

शोपियां में हुई इन 10 गिरफ्तारियों के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजर डिजिटल वित्तीय गतिविधियों और उनसे जुड़े संदिग्ध संपर्कों पर बनी हुई है। अब आगे की पूछताछ, वित्तीय रिकॉर्ड के परीक्षण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित नेटवर्क का वास्तविक विस्तार कितना था तथा गिरफ्तार व्यक्तियों की क्या भूमिका रही।

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