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जम्मू और कश्मीर
SKUAST फैकल्टी मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
Ratna Netam
17 April 2026 3:49 PM IST

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Jammu.जम्मू: सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर स्थित शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SKUAST) के फैकल्टी सदस्यों के विदेशी असाइनमेंट से जुड़े मामले में जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया एक नए मोड़ पर पहुंच गई है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला विश्वविद्यालय के कुछ फैकल्टी सदस्यों द्वारा विदेशी संस्थानों में असाइनमेंट लेने और उससे जुड़े प्रशासनिक अनुमतियों के विवाद से संबंधित है। हाई कोर्ट ने पहले इस मामले में कुछ निर्देश जारी किए थे, जिन्हें अब सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि यह मुद्दा प्रशासनिक नीतियों और विश्वविद्यालय के आंतरिक नियमों से जुड़ा है, जिस पर विस्तृत विचार की आवश्यकता है। अदालत ने फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए सभी पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा है।
इस निर्णय के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित फैकल्टी सदस्यों को अस्थायी राहत मिली है। हालांकि, मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर निर्भर करेगा।
अधिकारियों का कहना है कि विदेशी असाइनमेंट के मामलों में पारदर्शिता और नियमों का पालन बेहद जरूरी है, ताकि शैक्षणिक संस्थानों की प्रतिष्ठा और कार्यप्रणाली प्रभावित न हो।
इस मामले ने शिक्षा जगत में भी चर्चा को जन्म दिया है, क्योंकि यह अकादमिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में स्पष्ट नीति होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति न बने।
विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, फैकल्टी सदस्यों के विदेशी असाइनमेंट का उद्देश्य शोध और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके लिए उचित प्रशासनिक मंजूरी और नियमों का पालन अनिवार्य होता है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश मामले की जटिलता को दर्शाता है और अब अंतिम निर्णय सभी तथ्यों की गहन जांच के बाद ही आएगा।
कुल मिलाकर, SKUAST फैकल्टी के विदेशी असाइनमेंट मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाना एक महत्वपूर्ण कानूनी विकास है, जिससे मामला अब शीर्ष अदालत की विस्तृत सुनवाई की ओर बढ़ गया है।
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