जम्मू और कश्मीर

Srinagar: सेंटर और राज्य सरकार से सुधार की उम्मीद

Ratna Netam
9 April 2026 6:06 PM IST
Srinagar: सेंटर और राज्य सरकार से सुधार की उम्मीद
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JAMMU.जम्मू: जम्मू-कश्मीर में कृषि और पशुपालन क्षेत्र के लिए बनाए गए सैकड़ों सेग्रीगेशन शेड्स के बेकार पड़े होने की स्थिति सामने आई है, जबकि इनके निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। सरकारी अधिकारियों और किसानों की रिपोर्टों के अनुसार, इन शेड्स का उपयोग उचित तरीके से नहीं किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने पशुपालन और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष वित्तीय सहायता के तहत कई सेग्रीगेशन शेड्स का निर्माण किया था। इनका उद्देश्य पशुचारे, उपकरण और कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ किसानों को सुविधा प्रदान करना था।
हालांकि, निरीक्षण और स्थानीय शिकायतों के अनुसार कई शेड्स खाली पड़ी हैं और उनका रख-रखाव भी उचित रूप से नहीं किया जा रहा। कुछ शेड्स तो तकनीकी दोष और निर्माण में कमी के कारण उपयोग योग्य नहीं हैं। किसानों का कहना है कि सही मार्गदर्शन और प्रबंधन की कमी ने इन संरचनाओं को बेकार बना दिया है।
स्थानीय प्रशासन ने स्वीकार किया है कि शेड्स का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और प्रशिक्षण की आवश्यकता है। अधिकारियों ने कहा कि किसानों और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निवेश का प्रभाव तभी दिखाई देता है जब उसके साथ निगरानी, प्रशिक्षण और सही प्रबंधन प्रणाली भी लागू हो। उन्होंने कहा कि केवल निर्माण पर धन खर्च करने से ही विकास नहीं होता, बल्कि उपयोग और रखरखाव की योजनाओं को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कृषि और पशुपालन विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि शेड्स का उपयोग बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक किया जाए और उन्हें आधुनिक तकनीकों के साथ प्रशिक्षित किया जाए। इसके साथ ही नियमित निरीक्षण और सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।
राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जल्द ही एक योजना तैयार की जाएगी ताकि शेड्स का उचित उपयोग सुनिश्चित हो और किसानों को इसका लाभ मिल सके। सरकार ने उम्मीद जताई कि इस तरह की पहल से कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सुधार और उत्पादन में वृद्धि होगी।
अंततः, जम्मू-कश्मीर में सैकड़ों सेग्रीगेशन शेड्स का बेकार रहना करोड़ों रुपये के निवेश के बावजूद एक चुनौतीपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि बेहतर प्रबंधन, प्रशिक्षण और निगरानी से इन शेड्स का सही इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे किसानों और राज्य दोनों को लाभ मिलेगा।
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