जम्मू और कश्मीर

Srinagar : कश्मीरी पंडित सम्मेलन पर विवाद, पुनर्वास और वापसी पर फिर उठा पुराना सवाल

Kavita2
19 Jun 2026 11:06 AM IST
Srinagar : कश्मीरी पंडित सम्मेलन पर विवाद, पुनर्वास और वापसी पर फिर उठा पुराना सवाल
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Jammu जम्मू: श्रीनगर में हाल ही में आयोजित कश्मीरी पंडितों के एक सम्मेलन को लेकर समुदाय के भीतर और बाहर नई बहस छिड़ गई है। इस कार्यक्रम को लेकर कई सामुदायिक संगठनों ने कड़ी आलोचना की है, जिसके बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में आ गया है कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों की कश्मीर घाटी में सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

यह विवाद “प्रागाश – द फर्स्ट लाइट” (Praagaash – The First Light) नामक कार्यक्रम से जुड़ा है, जिसमें भारत और विदेशों से कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग शामिल हुए थे। इस सम्मेलन में न्याय, पुनर्वास, सांस्कृतिक संरक्षण और कश्मीर घाटी में समुदाय की वापसी जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी।

कार्यक्रम के समर्थकों का कहना है कि यह पहल समुदाय के बीच संवाद बढ़ाने और भरोसा बहाल करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। उनके अनुसार, इस तरह के सम्मेलन लंबे समय से बिखरे समुदाय को एक मंच पर लाकर उनके मुद्दों को सामने लाने में मदद करते हैं।

हालांकि, दूसरी ओर कई संगठनों ने इस सम्मेलन की आलोचना की है। ‘पनून कश्मीर’, ‘रूट्स इन कश्मीर’ और ‘यूथ फॉर पनून कश्मीर’ जैसे समूहों ने आरोप लगाया है कि कार्यक्रम में कश्मीरी पंडितों के विस्थापन के मूल राजनीतिक और ऐतिहासिक पहलुओं को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया। इन संगठनों का कहना है कि केवल सांस्कृतिक या प्रतीकात्मक चर्चाओं से वास्तविक समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

आलोचकों का मानना है कि कश्मीरी पंडितों का विस्थापन केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं बल्कि एक गहरी राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी समस्या है, जिसके समाधान के लिए व्यापक और ठोस नीति की आवश्यकता है। उनका कहना है कि जब तक मूल कारणों पर गंभीर चर्चा नहीं होगी, तब तक वापसी की प्रक्रिया अधूरी ही रहेगी।

इस बीच, सम्मेलन के आयोजन को लेकर विभिन्न मत सामने आने से समुदाय के भीतर भी विचारों का विभाजन दिखाई दे रहा है। एक वर्ग इसे संवाद की शुरुआत मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे केवल प्रतीकात्मक प्रयास बता रहा है।

यह पूरा विवाद एक बार फिर उस लंबे और जटिल मुद्दे को सामने ले आया है, जो तीन दशकों से अधिक समय से अनसुलझा बना हुआ है। कश्मीरी पंडितों का विस्थापन और उनकी सुरक्षित वापसी भारतीय राजनीति और कश्मीर नीति का एक संवेदनशील हिस्सा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस मुद्दे के समाधान के लिए केवल सम्मेलन या घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा, विश्वास और पुनर्वास से जुड़ी ठोस नीतियों की आवश्यकता है। साथ ही दोनों समुदायों के बीच संवाद को लगातार बनाए रखना भी जरूरी है।

फिलहाल इस सम्मेलन ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर राष्ट्रीय और सामाजिक ध्यान आकर्षित किया है, और यह सवाल फिर से मजबूत हो गया है कि विस्थापित कश्मीरी पंडितों की सुरक्षित वापसी का रास्ता कब और कैसे खुलेगा।

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