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लद्दाख मुद्दे पर सोनम वांगचुक ने रद्द की 6 दिवसीय पदयात्रा

लेह। लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी प्रस्तावित 6 दिवसीय पदयात्रा रद्द कर दी है। यह पदयात्रा 19 से 23 सितंबर तक प्रस्तावित थी।
सोनम वांगचुक ने यह फैसला केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की सब-कमेटी के साथ हुई बातचीत के बाद लिया है। इससे पहले लद्दाख के प्रतिनिधि संगठनों ने बैठक में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर निराशा जताई थी। इसके बाद वांगचुक ने कहा था कि यदि सरकार की ओर से ठोस आश्वासन नहीं मिलता है तो वह पदयात्रा शुरू करेंगे।
हालांकि, बाद में आंदोलन से जुड़े संगठनों और सरकार के बीच आगे की बातचीत की संभावना को देखते हुए पदयात्रा को रद्द करने का फैसला लिया गया।
लद्दाख के मुद्दों को लेकर चल रहा आंदोलन
लद्दाख में पिछले कुछ समय से राज्य का दर्जा बहाल करने और क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग उठ रही है। आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि इससे क्षेत्र के लोगों को प्रशासनिक और संवैधानिक सुरक्षा मिलेगी।
वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग होकर लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इसके बाद से स्थानीय संगठनों की ओर से लद्दाख को अधिक अधिकार देने और स्थानीय हितों की सुरक्षा की मांग की जाती रही है।
सोनम वांगचुक इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे हैं। वह पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संस्कृति और क्षेत्रीय अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं।
गृह मंत्रालय की सब-कमेटी से हुई थी बैठक
9 सितंबर को गृह मंत्रालय की सब-कमेटी और लद्दाख के प्रतिनिधि संगठनों के बीच बैठक हुई थी। इस बैठक में लद्दाख के भविष्य, प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय मांगों पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद लद्दाख के प्रतिनिधियों ने कहा था कि बातचीत में अपेक्षित ठोस प्रगति नहीं हुई। इसके बाद सोनम वांगचुक ने सरकार से स्पष्ट आश्वासन की मांग करते हुए पदयात्रा की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा था कि अगर सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती है तो वह जनता के समर्थन के साथ शांतिपूर्ण पदयात्रा करेंगे।
पदयात्रा का उद्देश्य
प्रस्तावित पदयात्रा का उद्देश्य लद्दाख के लोगों की मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखना था। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना था कि यह यात्रा क्षेत्र के संवैधानिक अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए की जानी थी।
वांगचुक ने कई बार कहा है कि लद्दाख जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण जरूरी है।
सरकार से आगे बातचीत की उम्मीद
पदयात्रा रद्द करने के बाद अब सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत पर नजर रहेगी। आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि वे बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
लद्दाख के लोगों की मांगों में राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची में शामिल करना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और क्षेत्र की संस्कृति एवं पर्यावरण की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।
सोनम वांगचुक की भूमिका
सोनम वांगचुक शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर काम करने के लिए जाने जाते हैं। वह लद्दाख के स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहे हैं।
उन्होंने इससे पहले भी कई बार शांतिपूर्ण आंदोलन और अनशन के जरिए अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की है। उनके आंदोलनों में स्थानीय लोगों की भागीदारी देखने को मिली है।
आगे की रणनीति पर नजर
फिलहाल सोनम वांगचुक की ओर से पदयात्रा रद्द करने के फैसले के बाद आंदोलन की अगली रणनीति पर नजर बनी हुई है। लद्दाख के प्रतिनिधि संगठन सरकार के साथ होने वाली आगामी बैठकों में अपनी मांगों को उठाएंगे।
लद्दाख को लेकर चल रही यह बहस केवल प्रशासनिक बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण, स्थानीय अधिकार और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दे भी जुड़े हुए हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच आने वाली बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या प्रमुख मांगों पर कोई सहमति बन पाती है।





