जम्मू और कश्मीर

व्हाट्सऐप से दूरी पोर्न साइट्स के चैट फीचर का सहारा ले रहे आतंकी

Ratna Netam
30 Aug 2026 4:07 PM IST
व्हाट्सऐप से दूरी पोर्न साइट्स के चैट फीचर का सहारा ले रहे आतंकी
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दिल्ली : भारत की सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती डिजिटल निगरानी और आतंकी नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई के बाद अब आतंकवादी संगठनों ने संचार के नए और छिपे हुए रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उनके पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स सामान्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बचने लगे हैं और बातचीत के लिए ऐसे ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन पर आमतौर पर लोगों का ध्यान कम जाता है। इनमें कुछ पोर्न वेबसाइट्स के चैट फीचर और छोटे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म शामिल बताए जा रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह बदलाव इसलिए आया है क्योंकि व्हाट्सऐप, फेसबुक, टेलीग्राम और अन्य लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ गई है। आतंकी संगठन अब ऐसे डिजिटल रास्ते तलाश रहे हैं जहां उनकी पहचान छिपी रहे और सीमा पार बैठे उनके आकाओं से संपर्क बनाए रखा जा सके।
डिजिटल जंग में आतंकियों की नई चाल
पहले आतंकी संगठन खुले तौर पर सोशल मीडिया और सामान्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते थे। फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर युवाओं को जोड़ना, प्रचार सामग्री फैलाना और निर्देश भेजना उनके तरीकों का हिस्सा रहा है। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की सक्रियता बढ़ने के बाद इन रास्तों पर खतरा बढ़ गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अब आतंकी नेटवर्क अपनी बातचीत को छिपाने के लिए नए डिजिटल माध्यमों का सहारा ले रहे हैं। कुछ मामलों में ऐसे प्लेटफॉर्म चुने जा रहे हैं जहां लाखों सामान्य यूजर मौजूद होते हैं और संदिग्ध गतिविधियों को पहचानना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से संपर्क की कोशिश
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, आतंकी संगठनों का बड़ा नेटवर्क सीमा पार से संचालित होता है। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स भारत में मौजूद अपने संपर्कों को निर्देश देने, जानकारी लेने और नेटवर्क को सक्रिय रखने की कोशिश करते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि आतंकी संगठन डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल केवल बातचीत के लिए नहीं बल्कि नए लोगों को जोड़ने और उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करने के लिए भी करते हैं। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब आतंकवादी संगठनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं।
सुरक्षा एजेंसियों ने बढ़ाई साइबर निगरानी
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ डिजिटल मोर्चे पर अपनी क्षमताओं को मजबूत किया है। खुफिया एजेंसियां संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों, फर्जी पहचान, विदेशी संपर्कों और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों पर नजर रख रही हैं।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, आतंकवादी संगठन तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बदल रहे हैं। वे हर बार नए तरीके अपनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिसिस और आधुनिक निगरानी तकनीकों की मदद से इन गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
एन्क्रिप्टेड ऐप्स भी बने चुनौती
सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, केवल पोर्न वेबसाइट्स ही नहीं बल्कि कई छोटे एन्क्रिप्टेड ऐप्स और गुप्त ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी आतंकियों की नजर में रहते हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म पर बातचीत को ट्रैक करना सामान्य ऐप्स की तुलना में ज्यादा मुश्किल हो सकता है।
यही वजह है कि दुनियाभर की सुरक्षा एजेंसियां अब साइबर आतंकवाद को एक बड़ी चुनौती मान रही हैं। आतंकवाद का स्वरूप बदल रहा है और अब लड़ाई केवल जमीन पर नहीं बल्कि इंटरनेट की दुनिया में भी लड़ी जा रही है।
युवाओं को निशाना बनाने की कोशिश
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकी संगठनों की सबसे बड़ी रणनीति युवाओं को प्रभावित करना है। ऑनलाइन प्रचार, फर्जी पहचान और भावनात्मक संदेशों के जरिए युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश की जाती है।
इसके लिए आतंकी संगठन अलग-अलग डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर जागरूकता और ऑनलाइन गतिविधियों पर सतर्क नजर रखना आतंकवाद विरोधी अभियान का अहम हिस्सा बन चुका है।
भारत के लिए साइबर सुरक्षा बड़ी प्राथमिकता
आधुनिक समय में आतंकवाद का खतरा केवल हथियारों और सीमा पार घुसपैठ तक सीमित नहीं रह गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
भारत की सुरक्षा एजेंसियां अब पारंपरिक सुरक्षा के साथ-साथ साइबर सुरक्षा को भी उतना ही महत्व दे रही हैं। ऑनलाइन नेटवर्क को तोड़ना, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना और आतंकी प्रचार को रोकना बड़ी प्राथमिकता बन गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आतंकी संगठनों की यह रणनीति बताती है कि वे सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए लगातार नए तरीके खोज रहे हैं। हालांकि भारत की सुरक्षा व्यवस्था भी इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी तकनीकी क्षमता लगातार बढ़ा रही है।
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