जम्मू और कश्मीर

कल से शारदीय नवरात्रि, जम्मू में कलश स्थापना का खास मुहूर्त

nidhi
10 Oct 2026 7:30 AM IST
कल से शारदीय नवरात्रि, जम्मू में कलश स्थापना का खास मुहूर्त
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घटस्थापना के लिए जानें शुभ समय
जम्मू: मां दुर्गा की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रहा है। नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापना की जाएगी। जम्मू में घटस्थापना के लिए सुबह का शुभ समय निर्धारित किया गया है। इसके अलावा दोपहर में लगभग 45 मिनट का अभिजीत मुहूर्त भी उपलब्ध रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना करेंगे।
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात करीब 9 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर को माना जाएगा।
जम्मू में कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
रविवार, 11 अक्टूबर 2026 — जम्मू (IST)
प्रातःकाल का विशेष मुहूर्त सुबह 6:31 से 7:06 बजे
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:54 से दोपहर 12:40 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त रात करीब 9:30 बजे
जम्मू के लिए एक स्थानीय पंचांग गणना के अनुसार समय। अन्य पंचांगों में सुबह का व्यापक घटस्थापना काल भी दिया गया है, इसलिए 45 मिनट को पूरे दिन का एकमात्र शुभ समय नहीं समझना चाहिए।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। उनका वाहन वृषभ है और उनके एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे हाथ में कमल होता है।
श्रद्धालु नवरात्रि के पहले दिन व्रत रखने के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करते हैं। कई परिवारों में अखंड ज्योति जलाने और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने की परंपरा भी है।
घर पर ऐसे करें कलश स्थापना
कलश स्थापना से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा रखें।
मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसके बीच जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश में अक्षत, सुपारी और सिक्का रखने की परंपरा है। इसके ऊपर आम या अन्य उपयुक्त पत्ते लगाकर नारियल स्थापित किया जाता है।
इसके बाद दीपक जलाकर मां दुर्गा का ध्यान करें। पुष्प, फल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। श्रद्धालु 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। पूजा की विधि परिवार और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
नवरात्रि में किन बातों का रखें ध्यान?
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार उपवास रखते हैं। कई परिवार सात्विक भोजन करते हैं और मांसाहार तथा मदिरा से परहेज करते हैं। पूजा स्थल की स्वच्छता, नियमित आरती और देवी के नौ स्वरूपों की उपासना को विशेष महत्व दिया जाता है।
उपवास करने वाले लोगों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। मधुमेह, गर्भावस्था या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में कठोर उपवास करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
20 अक्टूबर को मनाई जाएगी विजयादशमी
वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्टूबर से होगा और 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस बार पंचांग के अनुसार 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान किए जाएंगे। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में पूजा की तिथियों और विधियों में अंतर संभव है। जम्मू सहित देशभर में नवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। माता के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना से सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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