जम्मू और कश्मीर

बसंतर नदी में उफान से सीमा क्षेत्र में भारी कटाव पांच से छह एकड़ नर्सरी क्षेत्र प्रभावित

Kavita2
20 Aug 2026 11:56 AM IST
बसंतर नदी में उफान से सीमा क्षेत्र में भारी कटाव पांच से छह एकड़ नर्सरी क्षेत्र प्रभावित
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रामगढ़। जम्मू-कश्मीर के अग्रिम सीमा क्षेत्र में बहने वाली बसंतर नदी ने बरसात के मौसम में अचानक अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मंगलवार रात से हुई लगातार बारिश के बाद सब सेक्टर रामगढ़ में बहने वाली बसंतर नदी में जलस्तर तेजी से बढ़ गया, जिससे आसपास के क्षेत्रों में नुकसान की स्थिति पैदा हो गई।

नदी के उफान का सबसे ज्यादा असर अग्रिम सीमा के नर्सरी क्षेत्र पर पड़ा है। तेज बहाव के कारण नदी के किनारे कटाव शुरू हो गया और देखते ही देखते करीब पांच से छह एकड़ क्षेत्र नदी की चपेट में आ गया। इस दौरान वर्षों पुरानी वन्य संपदा भी नदी के तेज बहाव में बह गई और पानी के साथ पाकिस्तान की दिशा में चली गई।

जानकारी के अनुसार, बसंतर नदी सांबा और विजयपुर क्षेत्र से आने वाले जल प्रवाह को अपने साथ लेकर आगे बढ़ती है। बारिश के कारण नदी में पानी का दबाव अचानक बढ़ गया, जिससे नदी के किनारों पर मिट्टी का कटाव तेज हो गया।

स्थानीय लोगों और अधिकारियों के मुताबिक, बरसात के दौरान बसंतर नदी का जलस्तर बढ़ना सामान्य है, लेकिन इस बार पानी के तेज बहाव ने सीमा क्षेत्र में स्थित नर्सरी इलाके को काफी नुकसान पहुंचाया है। नदी के लगातार कटाव से भूमि का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है।

नर्सरी क्षेत्र में वर्षों से तैयार की गई वन संपदा को भी नुकसान पहुंचा है। कई पुराने पेड़ और पौधे नदी के बहाव में बह गए। इससे पर्यावरणीय नुकसान के साथ-साथ सरकारी और प्राकृतिक संसाधनों को भी क्षति पहुंची है।

अधिकारियों ने बताया कि नदी के बढ़ते जलस्तर और कटाव की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया जाएगा। साथ ही भविष्य में कटाव रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की योजना बनाई जा रही है।

सीमा क्षेत्र होने के कारण बसंतर नदी का महत्व काफी अधिक है। यहां नदी के आसपास कई संवेदनशील इलाके स्थित हैं। ऐसे में बरसात के दौरान नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जाती है।

मंगलवार रात से शुरू हुई बारिश के बाद क्षेत्र में मौसम की स्थिति बदल गई। पहाड़ी और मैदानी इलाकों से आने वाले पानी के कारण नदी का प्रवाह तेज हो गया। तेज धार ने नदी किनारे की जमीन को काटना शुरू कर दिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नदी के कटाव को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में और अधिक भूमि प्रभावित हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग की है।

बारिश के मौसम में नदियों के किनारे बसे इलाकों में कटाव की समस्या आम हो जाती है। तेज बहाव के कारण मिट्टी कमजोर पड़ जाती है और नदी धीरे-धीरे जमीन को अपने अंदर समाहित करती जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, नदी किनारे पौधरोपण और मजबूत तटबंध कटाव रोकने में मददगार हो सकते हैं। ऐसे क्षेत्रों में समय-समय पर निगरानी और संरक्षण कार्य जरूरी होते हैं।

प्रशासन की ओर से अब नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जा सकता है। इसके आधार पर प्रभावित क्षेत्र और वन संपदा को हुए नुकसान का आकलन किया जाएगा।

बसंतर नदी के इस उफान ने एक बार फिर सीमा क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया है। मानसून के दौरान ऐसे क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतना जरूरी होता है।

फिलहाल नदी का जलस्तर और प्रभावित क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से नदी के आसपास जाने से बचने और सावधानी बरतने की अपील की है।

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