जम्मू और कश्मीर

गोल्डन कार्ड पर निजी अस्पतालों में कई इलाज प्रभावित

Kavita2
19 Sept 2026 5:52 PM IST
गोल्डन कार्ड पर निजी अस्पतालों में कई इलाज प्रभावित
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जम्मू। जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) सेहत के तहत निजी अस्पतालों में मिलने वाली कई स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने की बात सामने आई है। भुगतान संबंधी संकट के बीच निजी अस्पतालों में डायलिसिस, गॉल ब्लैडर से जुड़ी सर्जरी और कुछ अन्य उपचार गोल्डन कार्ड के माध्यम से कराने में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निजी स्वास्थ्य संस्थानों का दावा है कि योजना के तहत 500 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम का भुगतान कई महीनों से लंबित है, जिससे अस्पतालों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

लंबित भुगतान के कारण कई निजी अस्पतालों ने योजना के तहत मरीजों का इलाज सीमित करना शुरू कर दिया है। इससे उन परिवारों की चिंता बढ़ गई है जो महंगे इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना पर निर्भर हैं।

निजी अस्पतालों पर बढ़ा आर्थिक दबाव

निजी स्वास्थ्य संस्थानों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण उनके लिए योजना के तहत लगातार सेवाएं देना मुश्किल होता जा रहा है। अस्पतालों को डॉक्टरों और कर्मचारियों के वेतन, दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, बिजली और अन्य परिचालन खर्चों का भुगतान नियमित रूप से करना पड़ता है।

यदि इलाज करने के बाद अस्पतालों को लंबे समय तक क्लेम की राशि नहीं मिलती है तो इसका असर उनकी वित्तीय स्थिति पर पड़ता है। यही वजह है कि कुछ निजी अस्पताल अब योजना के तहत नए मरीजों को भर्ती करने या चुनिंदा उपचार उपलब्ध कराने में सावधानी बरत रहे हैं।

500 करोड़ रुपये से अधिक के क्लेम लंबित होने का आंकड़ा निजी स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा दावा है। इसकी अद्यतन आधिकारिक पुष्टि और लंबित भुगतान का सटीक आंकड़ा सरकार या योजना से संबंधित प्राधिकरण की ओर से स्पष्ट किया जाना बाकी है।

कई उपचारों के विकल्प हुए सीमित

पहले जम्मू-कश्मीर के गोल्डन कार्ड धारकों के पास सरकारी अस्पतालों के अलावा सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी कई तरह के इलाज कराने का विकल्प उपलब्ध था। मरीज निजी अस्पतालों में पेसमेकर लगवाने, गॉल ब्लैडर की सर्जरी और दूसरी चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए योजना का लाभ ले सकते थे।

अब स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। एक तरफ सरकार ने पीएमजे सेहत योजना के तहत कुछ उपचारों को सरकारी अस्पतालों तक सीमित किया है, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक दबाव का सामना कर रहे कई निजी अस्पताल भी कुछ सेवाएं देने से पीछे हट रहे हैं।

इसका सीधा असर मरीजों के पास उपलब्ध अस्पतालों और उपचार के विकल्पों पर पड़ सकता है।

डायलिसिस मरीजों के लिए बढ़ सकती है परेशानी

डायलिसिस जैसी स्वास्थ्य सेवा में मरीजों को नियमित अंतराल पर अस्पताल जाना पड़ता है। ऐसे में निजी अस्पतालों में गोल्डन कार्ड पर यह सुविधा प्रभावित होने से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ सकती है।

जिन मरीजों का पहले से किसी निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था, उन्हें सरकारी अस्पताल या किसी अन्य सूचीबद्ध स्वास्थ्य संस्थान का विकल्प तलाशना पड़ सकता है। इससे सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ने की आशंका भी है।

हालांकि कौन-कौन से निजी अस्पतालों ने डायलिसिस या अन्य उपचार पूरी तरह बंद किए हैं और कहां सेवाएं अभी जारी हैं, इसकी स्थिति अस्पताल के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए मरीजों को इलाज के लिए जाने से पहले संबंधित अस्पताल से योजना के तहत उपलब्ध सेवाओं की जानकारी लेने की जरूरत होगी।

सरकारी अस्पतालों पर बढ़ सकता है बोझ

निजी अस्पतालों में सेवाएं सीमित होने की स्थिति में मरीजों का रुख स्वाभाविक रूप से सरकारी अस्पतालों की ओर बढ़ सकता है। इससे पहले से बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज कर रहे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

विशेषज्ञ उपचार, सर्जरी और नियमित चिकित्सा प्रक्रियाओं के लिए मरीजों की संख्या बढ़ने पर प्रतीक्षा अवधि भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने की चुनौती बढ़ सकती है।

पीएमजे सेहत योजना का उद्देश्य लोगों को आर्थिक कठिनाई के बिना स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है। इसलिए निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों में उपचार की पर्याप्त उपलब्धता योजना के प्रभावी संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।

क्लेम भुगतान बना प्रमुख मुद्दा

मौजूदा संकट के केंद्र में निजी अस्पतालों के लंबित क्लेम बताए जा रहे हैं। निजी अस्पतालों का कहना है कि उन्होंने योजना के पात्र लाभार्थियों को उपचार उपलब्ध कराया, लेकिन उसके बदले मिलने वाली राशि का भुगतान समय पर नहीं हुआ।

स्वास्थ्य बीमा आधारित व्यवस्था में अस्पताल मरीज का इलाज करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत क्लेम प्रस्तुत करते हैं। जांच और स्वीकृति के बाद संबंधित राशि अस्पताल को जारी की जाती है। यदि यह प्रक्रिया लंबे समय तक लंबित रहती है तो अस्पतालों के नकदी प्रवाह पर असर पड़ता है।

निजी स्वास्थ्य संस्थानों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में उनके लिए योजना के तहत सभी सेवाओं को पहले की तरह जारी रखना आर्थिक रूप से कठिन हो रहा है।

मरीजों की जेब पर पड़ सकता है असर

यदि गोल्डन कार्ड के तहत निजी अस्पतालों में इलाज उपलब्ध नहीं होता है तो मरीजों के सामने सीमित विकल्प बच सकते हैं। उन्हें या तो सरकारी अस्पताल में इलाज कराना होगा या निजी अस्पताल में अपनी जेब से खर्च उठाना पड़ सकता है।

विशेष रूप से ऐसी सर्जरी और प्रक्रियाएं जिनका खर्च ज्यादा होता है, उनमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए खुद भुगतान करना मुश्किल हो सकता है। यही कारण है कि योजना से जुड़े भुगतान संकट का समाधान मरीजों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पेसमेकर और सर्जरी के विकल्प भी प्रभावित

प्रदेश में पहले पात्र लाभार्थी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पेसमेकर लगाने जैसी चिकित्सा प्रक्रिया और विभिन्न सर्जरी का लाभ ले सकते थे। अब कुछ उपचार सरकारी अस्पतालों तक सीमित होने और निजी अस्पतालों द्वारा सेवाएं कम किए जाने से विकल्प घटने की बात कही जा रही है।

ऐसे मरीज जिन्हें तत्काल सर्जरी या विशेष उपचार की जरूरत है, उनके लिए अस्पताल की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। निजी अस्पतालों की भागीदारी कम होने पर दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भी अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

समाधान की ओर टिकी मरीजों की नजर

मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ी जरूरत लंबित क्लेम की वास्तविक राशि और भुगतान की समयसीमा को स्पष्ट करने की है। निजी अस्पतालों की वित्तीय समस्याओं का समाधान होने पर योजना के तहत प्रभावित सेवाओं को सामान्य करने में मदद मिल सकती है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि गोल्डन कार्ड पर कौन-कौन से उपचार निजी अस्पतालों में उपलब्ध हैं और किन उपचारों को केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित किया गया है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज से इनकार जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।

फिलहाल भुगतान संकट और निजी अस्पतालों पर बढ़ते आर्थिक दबाव ने जम्मू-कश्मीर में पीएमजे सेहत योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मरीजों की नजर अब सरकार, योजना से जुड़े प्राधिकरण और निजी अस्पतालों के बीच इस समस्या के समाधान पर टिकी है।

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