जम्मू और कश्मीर

श्रीनगर में सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत, पहाड़ी दर्रों पर सेना-पुलिस बढ़ाएगी निगरानी

nidhi
4 Oct 2026 7:07 AM IST
श्रीनगर में सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत, पहाड़ी दर्रों पर सेना-पुलिस बढ़ाएगी निगरानी
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कश्मीर के दुर्गम रास्तों पर कड़ी नजर

श्रीनगर : श्रीनगर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने तथा आतंकरोधी अभियानों को प्रभावी बनाने के लिए सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों ने अहम बैठक की। बैठक में उच्च पर्वतीय दर्रों, दुर्गम रास्तों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए आपसी समन्वय और खुफिया सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान पर भी चर्चा की।

बैठक में घाटी की मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की गई। खास तौर पर उन पहाड़ी रास्तों और दर्रों को लेकर मंथन किया गया, जिनका इस्तेमाल दुर्गम इलाकों में आवाजाही के लिए किया जा सकता है। ऐसे मार्गों पर अतिरिक्त निगरानी रखने और संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल जानकारी साझा करने की रणनीति पर चर्चा हुई।
सेना और पुलिस के अधिकारियों ने आतंकरोधी अभियानों के दौरान दोनों बलों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया। जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में ऊंचे पहाड़ी इलाके और घने जंगल सुरक्षा बलों के लिए चुनौतीपूर्ण भूभाग हैं। ऐसे क्षेत्रों में अभियान चलाने के लिए स्थानीय जानकारी, तकनीकी निगरानी और खुफिया इनपुट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बैठक में सुरक्षा बलों के बीच रियल टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर भी विचार किया गया। किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच तेजी से समन्वय स्थापित करने से कार्रवाई को प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां भी सुरक्षा अभियानों को प्रभावित करती हैं। सर्दियों के दौरान बर्फबारी से कई रास्ते बंद हो जाते हैं, जबकि मौसम बदलने पर कुछ पुराने और दुर्गम मार्ग दोबारा आवाजाही के लिए खुल जाते हैं। ऐसे में इन इलाकों में नियमित निगरानी को सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है।
सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान आतंकियों की आवाजाही रोकने के साथ उनके नेटवर्क और मददगार तंत्र पर कार्रवाई करने पर भी रहता है। स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं के साथ तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने की कोशिश की जाती है।
सेना और पुलिस के बीच संयुक्त बैठकें घाटी में सुरक्षा रणनीति की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इनमें पिछले अभियानों के अनुभवों, मौजूदा चुनौतियों और आने वाले समय की जरूरतों पर चर्चा की जाती है। इससे अलग-अलग सुरक्षा बलों के बीच जिम्मेदारियों और कार्रवाई को बेहतर ढंग से समन्वित करने में मदद मिलती है। श्रीनगर में हुई इस बैठक के बाद उच्च पर्वतीय दर्रों और दुर्गम रास्तों पर चौकसी बढ़ाने पर विशेष ध्यान रहेगा। सुरक्षा बलों का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी संदिग्ध गतिविधि की समय रहते पहचान करना और आतंकरोधी अभियानों को अधिक प्रभावी बनाना है।

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