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जम्मू और कश्मीर
Sakhina का संदेश, भाषाओं के संरक्षण में निहित है हमारी सांस्कृतिक विरासत
Ratna Netam
24 April 2026 5:32 PM IST

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Jammu.जम्मू: मशहूर भाषाविद और समाजसेवी सकीना ने आज भाषाओं के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भाषाएं केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह हमारे इतिहास, संस्कृति और पहचान की संरक्षक भी हैं। उन्होंने यह बात भाषाई विविधता, संस्कृति और शिक्षा के विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में कही।
सखीना ने कहा कि भाषा किसी भी समाज की आत्मा होती है। यह न केवल संवाद का माध्यम है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक घटनाओं का भी दस्तावेज़ है। उन्होंने जोर दिया कि भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन से ही हमारी पहचान और सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहती है।
संगोष्ठी में भाषाविदों और विद्यार्थियों ने भी भाग लिया। सकीना ने कहा कि कई भाषाओं का अस्तित्व संकट में है, और यदि हम उन्हें संरक्षित नहीं करेंगे, तो केवल संवाद ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान भी खो सकती है। उन्होंने स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं के महत्व पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
सखीना ने भाषाओं के शिक्षण और उनके संरक्षण के लिए विभिन्न उपाय सुझाए। उन्होंने कहा कि स्कूलों और विश्वविद्यालयों में भाषाओं के पाठ्यक्रम को मजबूत किया जाना चाहिए। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म और मीडिया में भाषाओं के अधिक प्रयोग से नई पीढ़ी में उनकी प्रासंगिकता बनी रहेगी।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक भाषा किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक गतिविधियों, लोकगीतों, कहानियों और परंपराओं को संजोए रखती है। भाषाओं के माध्यम से हम न केवल इतिहास को समझते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं।
सखीना ने कहा कि भाषा संरक्षण केवल सरकारी या शिक्षण संस्थाओं का काम नहीं है। यह समाज और परिवार की जिम्मेदारी भी है कि वे अपनी मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ाएँ और नई पीढ़ी को इसके महत्व से अवगत कराएँ।
उन्होंने यह भी कहा कि भाषाई विविधता में ही समाज की मजबूती और सहिष्णुता निहित है। विभिन्न भाषाओं के संरक्षण से सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक समरसता बढ़ती है। उन्होंने समुदायों से अपील की कि वे स्थानीय भाषाओं के लिए पुस्तकालय, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मीडिया प्लेटफॉर्म तैयार करें।
संगोष्ठी के अंत में सकीना ने स्पष्ट किया कि भाषाओं का सम्मान और उनका संरक्षण हमारी पहचान, गौरव और इतिहास से जुड़ा हुआ है। यदि हम अपनी भाषाओं की सुरक्षा और संवर्धन में जुटेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत सांस्कृतिक आधार तैयार होगा।
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