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जम्मू और कश्मीर
J&K में प्राचीन धार्मिक स्थलों के लिए 14 करोड़ की योजना
Kiran
21 Sept 2026 4:02 PM IST

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Jammu and Kashmir जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को सांबा ज़िले के ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पुरमंडल और उत्तरबेहिनी में 14 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत वाली हेरिटेज संरक्षण परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इन परियोजनाओं में पुरमंडल में 7.15 करोड़ रुपये और पवित्र उत्तरबेहिनी स्थल पर 6.85 करोड़ रुपये की लागत से नवीनीकरण, जीर्णोद्धार और पुनरुद्धार के काम शामिल हैं।
लोगों को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि इस पहल का मकसद न सिर्फ़ पुरानी इमारतों को ठीक करना है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इस इलाके की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से फिर से जोड़ना भी है। उन्होंने कहा, "जो देश अपनी विरासत को भूल जाता है, वह अपनी नींव खो देता है। लेकिन जो देश अपनी जड़ों का सम्मान करता है, उन्हें सहेजता है और पुनर्जीवित करता है, वह यह पक्का करता है कि आने वाली पीढ़ियां आत्मविश्वास, मज़बूती और अपनी पहचान के मज़बूत अहसास के साथ खड़ी हों।"
सिन्हा ने बताया कि देविका नदी के किनारे बसा पुरमंडल सदियों से संतों, ऋषियों और तीर्थयात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। हालांकि, समय बीतने और देखरेख न होने की वजह से इसके कई मंदिर, नक्काशी, पवित्र कुंड और ऐतिहासिक इमारतें खराब हो गई थीं। जीर्णोद्धार के काम में पुरमंडल में पुराने लक्ष्मी नारायण मंदिर, शिव मंदिर और राम मंदिर के साथ-साथ उत्तरबेहिनी के मंदिर परिसर भी शामिल होंगे। इन परियोजनाओं में संरक्षण के आधुनिक तरीकों और पारंपरिक वास्तुकला की सुंदरता का मेल होगा।
उपराज्यपाल ने कहा कि इस पहल से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के एक बड़े केंद्र के तौर पर जम्मू-कश्मीर की स्थिति मज़बूत होगी। बेहतर बुनियादी ढांचे, रास्तों और लाइटिंग से माता वैष्णो देवी, शिव खोड़ी और रघुनाथ मंदिर जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। हेरिटेज पर्यटन के आर्थिक फायदों पर ज़ोर देते हुए सिन्हा ने कहा कि इन परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार के मौके पैदा होंगे और हस्तशिल्प, हॉस्पिटैलिटी, होमस्टे, ट्रांसपोर्ट सेवाओं और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा, "इन पवित्र स्थलों तक पहुंच को बेहतर बनाकर और उनकी भव्यता व गरिमा को बढ़ाकर, हम देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले आध्यात्मिक साधकों के लिए पुरमंडल और उत्तरबेहिनी के दिव्य आध्यात्मिक अनुभव के दरवाज़े खोल रहे हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और समुदायों को सशक्त बनाया जा सकेगा, क्योंकि जीर्णोद्धार की गई हर ईंट, बनाया गया हर रास्ता और यहां आने वाला हर पर्यटक सीधे तौर पर इस इलाके के लोगों की आर्थिक समृद्धि में योगदान देगा।" उन्होंने कहा कि इन पवित्र स्थलों को सुरक्षित रखने से न सिर्फ़ आने वाले लोगों का अनुभव बेहतर होगा, बल्कि आस-पास के इलाकों में आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा और साथ ही युवा पीढ़ी में गर्व और अपनी सांस्कृतिक पहचान की भावना भी जागेगी।
उपराज्यपाल ने इस प्रोजेक्ट के अलग-अलग पीढ़ियों के लिए महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि जब युवा पुरमंडल और उत्तरबेहनी के फिर से तैयार किए गए रास्तों पर चलेंगे और सदियों पुरानी कला और संस्कृति के संरक्षण को देखेंगे, तो उनमें गर्व की भावना जागेगी और अपनी जड़ों से उनका जुड़ाव और मज़बूत होगा। उन्होंने ज़िला प्रशासन और इस पहल से जुड़े सभी लोगों की तारीफ़ की और उम्मीद जताई कि नागरिक आने वाली पीढ़ियों के लिए इन पवित्र स्थलों को सुरक्षित और संरक्षित रखने में अपना योगदान देंगे।
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