जम्मू और कश्मीर

श्रीनगर में 'Rishivar' इंटर-फेथ कॉन्फ्रेंस, कश्मीर में सर्व धर्म समभाव को लेकर संवाद

Kavita2
11 Jun 2026 1:16 PM IST
श्रीनगर में Rishivar इंटर-फेथ कॉन्फ्रेंस, कश्मीर में सर्व धर्म समभाव को लेकर संवाद
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कश्मीर को दशकों से संघर्ष, उग्रवाद और राजनीतिक अनिश्चितता के केंद्र के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन श्रीनगर में हाल ही में आयोजित एक अंतरधार्मिक सम्मेलन ने इस क्षेत्र के शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक पक्ष को उजागर करने की कोशिश की।

श्रीनगर के SKICC में आयोजित ‘ऋषिवर’ इंटर-फेथ कॉन्फ्रेंस का आयोजन विभिन्न धर्मों के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया। इस पहल का नेतृत्व दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर मीना शर्मा ने किया। उन्होंने धार्मिक गुरुओं, विद्वानों, जाने-माने विचारकों और नीति-निर्माताओं को आमंत्रित किया ताकि वे शांति, बातचीत और साझा सांस्कृतिक मूल्यों पर खुले विचार-विमर्श कर सकें।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि, जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने अपने संबोधन में भारत की सभी धर्मों का सम्मान करने वाली परंपरा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर “सर्व धर्म समभाव” का प्रतीक रहा है, जहाँ विभिन्न समुदाय सदियों से मिल-जुलकर रहते आए हैं। उप-राज्यपाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच कश्मीर में सामुदायिक सौहार्द को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रोफ़ेसर मीना शर्मा ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल धार्मिक संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कश्मीर में सामाजिक एकता, सहयोग और समझ बढ़ाने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में मौजूद विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने अनुभव साझा किए और शांति स्थापना के लिए ठोस सुझाव दिए।

सम्मेलन के दौरान चर्चा में यह भी सामने आया कि धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर संवाद स्थापित करना ही कश्मीर में स्थायी शांति की कुंजी हो सकती है। विद्वानों और विचारकों ने कहा कि सामूहिक चिंतन और आपसी समझ से ही लंबे समय तक संघर्ष और अस्थिरता को कम किया जा सकता है।

उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह पहल कश्मीर में युवा पीढ़ी के लिए भी एक संदेश है कि विविधता में सामंजस्य और सभी धर्मों के प्रति सम्मान को बनाए रखना समाज के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रशासन ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करता रहेगा और आगे भी ऐसे प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा।

श्रीनगर में आयोजित इस इंटर-फेथ सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि कश्मीर केवल राजनीतिक और सुरक्षा मामलों का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से मिल-जुलकर रहने वाले लोगों का भी घर है। इस तरह के प्रयास स्थानीय समुदायों के बीच समझ, विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं और कश्मीर की वास्तविक पहचान को उजागर कर सकते हैं।

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