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जम्मू और कश्मीर
जम्मू में सरकारी नौकरी पर सवाल, फर्जी मार्कशीट लगाने का आरोप
nidhi
25 Oct 2026 8:37 AM IST

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फर्जी प्रमाणपत्र से सरकारी नौकरी का आरोप
जम्मू : स्वास्थ्य विभाग के एक डेंटल असिस्टेंट पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का आरोप लगा है। क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा ने आरोपी सोहन लाल सिंह और उसके दिवंगत पिता वीर सिंह के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी, लेकिन नौकरी की पात्रता दिखाने के लिए दसवीं पास होने के दस्तावेज इस्तेमाल किए। मामले में अब अदालत के समक्ष आगे की कार्यवाही होगी।
आरोपी जम्मू के अरनिया स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डेंटल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत बताया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, वह करीब दो दशक से स्वास्थ्य विभाग में नौकरी कर रहा था। इतने लंबे समय बाद उसकी शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठने से मामला चर्चा में आया है। हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होने का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। आरोपों और उनसे जुड़े साक्ष्यों का न्यायिक परीक्षण होना बाकी है।
सीआईडी की सूचना से शुरू हुई प्रमाणपत्रों की पड़ताल
इस मामले की जांच जम्मू-कश्मीर के सीआईडी मुख्यालय से प्राप्त सूचना के आधार पर शुरू हुई थी। सूचना में आरोपी के दसवीं के प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर संदेह जताया गया था। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने दस्तावेजों, शैक्षणिक रिकॉर्ड और नियुक्ति से संबंधित तथ्यों की जांच की। आर्थिक अपराध शाखा के थाने में वर्ष 2025 में एफआईआर संख्या 55 दर्ज की गई थी। जांच की जिम्मेदारी डीएसपी विशाल शर्मा को सौंपी गई थी। एजेंसी के अनुसार, पड़ताल में सामने आया कि आरोपी ने स्कूल से दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की थी। उसकी वास्तविक पढ़ाई और नौकरी के लिए प्रस्तुत योग्यता के बीच अंतर मिलने के बाद प्रमाणपत्रों की जांच को आगे बढ़ाया गया। इस दौरान स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि से जुड़ी विसंगतियां भी सामने आने की बात कही गई है।
मामले का मुख्य सवाल यह है कि आरोपी ने जिस शैक्षणिक योग्यता के आधार पर प्रशिक्षण और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की, क्या वह योग्यता उसके पास वास्तव में थी। जांच एजेंसी ने इसी संबंध में जुटाए गए रिकॉर्ड और दस्तावेजों को आरोपपत्र का आधार बनाया है।
फॉरेंसिक जांच में मिटाने और रासायनिक बदलाव के संकेत
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, संदिग्ध मार्कशीट को जांच के लिए जम्मू की फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया था। एजेंसी का कहना है कि फॉरेंसिक परीक्षण में दस्तावेज पर लिखी जानकारी मिटाए जाने और रासायनिक तरीके से बदलाव किए जाने की पुष्टि हुई। इस निष्कर्ष को शैक्षणिक रिकॉर्ड के साथ मिलाकर देखा गया और दस्तावेज में कथित छेड़छाड़ से जुड़े साक्ष्य संकलित किए गए। जांच में केवल प्रस्तुत मार्कशीट की बाहरी बनावट नहीं देखी गई, बल्कि संबंधित रिकॉर्ड से उसका मिलान भी किया गया। एजेंसी के अनुसार, आरोपी की पढ़ाई और जन्मतिथि से संबंधित जानकारियों में मिली असंगतियां मामले में महत्वपूर्ण रहीं। अब अदालत में इन दस्तावेजों और विशेषज्ञ जांच के निष्कर्षों की प्रासंगिकता पर विचार होगा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि विभागीय स्तर पर किस व्यक्ति की जिम्मेदारी तय हुई है। आरोपपत्र का केंद्र आरोपी द्वारा कथित रूप से गलत शैक्षणिक दस्तावेज इस्तेमाल करके पात्रता हासिल करने का मामला है।
पिता पर दस्तावेज जुटाने, बेटे पर इस्तेमाल करने का आरोप
जांच एजेंसी ने आरोपी के दिवंगत पिता वीर सिंह की भूमिका का भी उल्लेख किया है। क्राइम ब्रांच के अनुसार, पिता उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में चालक के रूप में काम करता था। आरोप है कि उसने बेटे के नाबालिग रहने के दौरान उसके लिए फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज जुटाए थे। बाद में बेटे ने वयस्क होने पर उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। एजेंसी का दावा है कि कथित फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर सोहन लाल सिंह ने पहले डेंटल असिस्टेंट प्रशिक्षण के लिए आवश्यक पात्रता दिखाई। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उसने जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से सरकारी नियुक्ति हासिल की। इस तरह जांच में प्रशिक्षण में प्रवेश से लेकर नौकरी मिलने तक की प्रक्रिया को जोड़ा गया है। यहां आरोप आरोपी की मूल शैक्षणिक पात्रता और उसे साबित करने के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों से संबंधित हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में उसके डेंटल असिस्टेंट के पद पर नियुक्त होने का उल्लेख है। उसे दंत चिकित्सक बताना या मरीजों के इलाज में किसी नुकसान का दावा करना उपलब्ध तथ्यों से समर्थित नहीं होगा।
अदालत में दाखिल आरोपपत्र, साक्ष्यों पर होगा फैसला
क्राइम ब्रांच ने जम्मू की चौथी अतिरिक्त मुंसिफ अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत किया है। मामले में धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेज इस्तेमाल करने और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि दस्तावेजी रिकॉर्ड, स्कूल से मिली जानकारी और फॉरेंसिक निष्कर्षों के आधार पर आरोपपत्र तैयार किया गया है। इस मामले ने सरकारी नियुक्ति में शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन के महत्व को सामने रखा है। विशेष रूप से जब किसी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में प्रवेश और उसके बाद नौकरी की पात्रता एक ही प्रमाणपत्र से जुड़ी हो, तो उस दस्तावेज की प्रामाणिकता पूरी प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
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