जम्मू और कश्मीर

न्यायिक कार्यवाही पर सवाल उठाना स्वीकार्य नहीं: High Court

Ratna Netam
1 May 2026 6:22 PM IST
न्यायिक कार्यवाही पर सवाल उठाना स्वीकार्य नहीं: High Court
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Jammu.जम्मू: उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि न्यायिक कार्यवाही की पवित्रता और गरिमा को किसी भी हाल में धूमिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का सम्मान और उसकी निष्पक्षता बनाए रखना सभी नागरिकों और संस्थाओं की जिम्मेदारी है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें अदालत की प्रक्रिया और आदेशों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने की कोशिश की गई थी। न्यायालय ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र के मूलभूत तत्वों में से एक है और इसे कोई कमजोर नहीं कर सकता।

न्यायमूर्ति [नाम] ने कहा, “न्यायिक कार्यवाही सिर्फ कागजों या नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास और समाज में न्याय की भावना बनाए रखने का आधार है। किसी भी तरह की टिप्पणी या कार्रवाई जिससे न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता पर सवाल उठे, वह स्वीकार्य नहीं है।” अदालत ने यह भी कहा कि न्यायिक निर्णयों की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा हो सकती है, लेकिन वह तथ्य और तर्क पर आधारित होनी चाहिए। किसी भी तरह के अपमानजनक या भ्रामक बयान न्यायपालिका की गरिमा और लोगों के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदेश न्यायपालिका के प्रति सम्मान और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के स्वतंत्र और निष्पक्ष कार्य करने के लिए उसकी पवित्रता को बनाए रखना अनिवार्य है। इस मामले में अदालत ने संबंधित पक्षों को भी चेतावनी दी कि वे न्यायिक कार्यवाही की गरिमा का सम्मान करें और अपने बयानों तथा क्रियाओं में ऐसा कोई तत्व न रखें जिससे न्याय प्रणाली पर संदेह उत्पन्न हो।
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