जम्मू और कश्मीर

साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट रोकने की तैयारी तेज

Kavita2
7 July 2026 1:21 PM IST
साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट रोकने की तैयारी तेज
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श्रीनगर/जम्मू-कश्मीर: साइबर अपराधों पर लगाम लगाने और डिजिटल अरेस्ट जैसी बढ़ती ऑनलाइन ठगी की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने साइबर अपराध रोकथाम और डिजिटल अरेस्ट रोकथाम प्रणाली के क्रियान्वयन को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।

बैठक में मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस प्रणाली को जल्द से जल्द पूरी तरह कार्यशील बनाने के लिए सभी कानूनी, प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल अपराधों की बदलती प्रकृति को देखते हुए मजबूत और प्रभावी व्यवस्था तैयार करना बेहद जरूरी है।

डिजिटल अरेस्ट मामलों पर विशेष ध्यान

बैठक के दौरान साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों और डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी की घटनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन माध्यमों से अपराध करने वाले ठग लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट में अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उनसे पैसे की मांग करते हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर समन्वय और तेज कार्रवाई जरूरी है।

हर महीने होगी प्रगति की समीक्षा

अटल डुल्लू ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि साइबर अपराध रोकथाम और डिजिटल अरेस्ट प्रणाली की प्रगति की हर महीने समीक्षा की जाए।

उन्होंने कहा कि नियमित समीक्षा से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि परियोजना तय समय सीमा के अनुसार आगे बढ़ रही है या नहीं। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए केवल एक विभाग की भूमिका पर्याप्त नहीं है, बल्कि सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा।

20 जुलाई तक पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने के निर्देश

बैठक में मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि वे अपनी प्रगति रिपोर्ट 20 जुलाई तक प्रगति पोर्टल पर अपलोड करें।

इसके साथ ही उन्होंने लंबित प्रस्तावों और आवश्यक दस्तावेजों को समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, ताकि जरूरी सरकारी आदेश जल्द जारी किए जा सकें।

उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए और सभी विभाग निर्धारित समय सीमा का पालन सुनिश्चित करें।

तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी ढांचे को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में डिजिटल सुरक्षा प्रणाली, डेटा प्रबंधन और साइबर अपराधों की निगरानी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए जिससे साइबर अपराधों की पहचान जल्द हो सके और पीड़ितों को समय पर सहायता मिल सके।

विभागों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी

मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस, प्रशासन और तकनीकी विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी विभाग आपसी सहयोग के साथ काम करें और किसी भी लंबित मामले को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में अपराधों का स्वरूप बदल रहा है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को भी समय के साथ आधुनिक बनाना होगा।

आम लोगों को जागरूक करने की जरूरत

बैठक में साइबर अपराधों से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।

लोगों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक और डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी से बचने के उपायों की जानकारी दी जानी चाहिए।

प्रशासन का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे लोग साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बच सकें और अपराध होने पर तुरंत कार्रवाई हो सके।

समय पर पूरा होगा सिस्टम का कार्यान्वयन

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि डिजिटल अरेस्ट रोकथाम प्रणाली को जल्द से जल्द पूरी तरह लागू किया जाए।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों से निपटना वर्तमान समय की बड़ी चुनौती है और इसके लिए मजबूत तंत्र विकसित करना आवश्यक है।

बैठक के अंत में अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि सभी जरूरी प्रक्रियाओं को तय समय के भीतर पूरा किया जाएगा और प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए लगातार काम किया जाएगा।

साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच सरकार की यह पहल डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल अपराधों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी, बल्कि आम नागरिकों का डिजिटल सेवाओं पर भरोसा भी बढ़ेगा।

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