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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान माने जाने वाले सदियों पुराने चिनार के पेड़ों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। गांदरबल जिले में सड़कों को चौड़ा करने और यातायात जाम की समस्या दूर करने के लिए पुराने चिनार के पेड़ों को हटाने की आवश्यकता पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयान के बाद पर्यावरण संरक्षण को लेकर बहस छिड़ गई है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सदियों में तैयार होने वाली प्राकृतिक विरासत की भरपाई महज नए पौधे लगाकर नहीं की जा सकती। उन्होंने चिनार के पेड़ों को कश्मीर के इतिहास, संस्कृति और पहचान से जुड़ी अमूल्य धरोहर बताया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 15 अक्टूबर को गांदरबल के दौरे के दौरान सड़क चौड़ीकरण में आ रही समस्याओं का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि कुछ पुराने चिनार सड़क के बीच या किनारे इस तरह मौजूद हैं कि वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया था।
गांदरबल में सड़क चौड़ीकरण को लेकर विवाद
गांदरबल जिले में बीहामा से खीर भवानी मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर यातायात का दबाव बढ़ रहा है। इस मार्ग के आसपास कुछ पुराने चिनार के पेड़ मौजूद हैं, जिन्हें सड़क चौड़ीकरण में बाधा बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अनुसार, बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए सड़क व्यवस्था में सुधार करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण का काम करते समय पुराने पेड़ों के कारण कठिनाइयां सामने आती हैं। इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालना जरूरी है, ताकि स्थानीय नागरिकों को जाम से राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री ने दिया नए चिनार लगाने का सुझाव
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बिना आवश्यकता चिनार के पेड़ों को काटना नहीं है।
उन्होंने सुझाव दिया कि जहां सड़क निर्माण के लिए पेड़ों को हटाना अत्यंत आवश्यक हो, वहां दूसरी उपयुक्त जगहों पर आठ से दस नए चिनार लगाए जा सकते हैं।
उनका कहना था कि सड़क के बीच मौजूद पेड़ों के कारण वाहनों की आवाजाही में परेशानी होती है और आम लोगों को लंबे समय तक जाम में फंसना पड़ता है।
उन्होंने विकास परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की आवश्यकता बताई।
महबूबा मुफ्ती ने उठाए गंभीर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पुराने चिनार के पेड़ों को हटाने के विचार पर आपत्ति जताई है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि चिनार का पेड़ अपनी पूरी विशालता और भव्यता हासिल करने में कई पीढ़ियां लगा देता है।
उनका तर्क है कि सदियों पुराने पेड़ों को काटकर उनके स्थान पर नए पौधे लगाना प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत की वास्तविक भरपाई नहीं है।
महबूबा मुफ्ती के अनुसार, कश्मीर की पहचान से जुड़े इन पेड़ों की सुरक्षा के लिए विकास परियोजनाओं में वैकल्पिक उपाय तलाशने चाहिए।
चिनार के पेड़ हैं कश्मीर की पहचान
चिनार के पेड़ों का जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत में विशेष स्थान है।
ये विशाल पेड़ अपनी चौड़ी पत्तियों, घनी छाया और शरद ऋतु में बदलते रंगों के कारण प्रसिद्ध हैं।
कश्मीर में चिनार के पेड़ सदियों से उद्यानों, धार्मिक स्थलों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों का हिस्सा रहे हैं।
विशेष रूप से शरद ऋतु में चिनार की पत्तियां सुनहरे, नारंगी और लाल रंग में बदल जाती हैं, जिससे घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और बढ़ जाती है।
चिनार केवल एक वृक्ष प्रजाति नहीं, बल्कि कश्मीरी साहित्य, कला और स्थानीय पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है।
सैकड़ों वर्ष पुराने चिनारों की घट रही संख्या
कश्मीर में चिनार के पेड़ों की संख्या को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञ पहले से चिंता जता रहे हैं।
अक्टूबर 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, बडगाम जिले के चट्टरगाम गांव में 650 वर्ष से अधिक पुराना चिनार मौजूद है। इसे एशिया के सबसे पुराने ज्ञात चिनार वृक्षों में गिना जाता है।
वैज्ञानिक सर्वेक्षण में गांदरबल जिले में एशिया के सबसे विशाल चिनार की पहचान होने की जानकारी भी सामने आई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने पेड़ों की सुरक्षा केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके आसपास के प्राकृतिक वातावरण का भी संरक्षण आवश्यक है।
पर्यावरण संगठनों ने भी जताई चिंता
मुख्यमंत्री के बयान के बाद पर्यावरण नीति समूह (EPG) ने भी चिनार के पुराने पेड़ों को हटाने के विचार पर चिंता जताई है।
समूह के संयोजक फैज बख्शी ने कहा कि सड़क विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कश्मीर की प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक विरासत को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पुराने चिनारों को हटाने से पहले सड़क के वैकल्पिक मार्ग और डिजाइन में बदलाव की संभावनाओं की जांच की जाए।
सड़क जाम से परेशान स्थानीय नागरिक
दूसरी ओर गांदरबल में यातायात जाम की समस्या भी महत्वपूर्ण है। बीहामा-खीर भवानी मार्ग पर वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण यातायात प्रभावित होने की बात सामने आई है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि स्थानीय नागरिकों को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
ऐसे में सड़क चौड़ीकरण और पुराने वृक्षों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
नए पौधे पुराने पेड़ों की भरपाई कर पाएंगे?
पुराने चिनारों को हटाकर दूसरी जगह नए पौधे लगाने के प्रस्ताव पर सबसे बड़ा सवाल उनकी उम्र और पर्यावरणीय महत्व से जुड़ा है।
एक विशाल चिनार को विकसित होने में कई दशकों से लेकर सदियां लग सकती हैं। पुराने पेड़ घनी छाया देने के साथ स्थानीय जीव-जंतुओं के लिए आवास भी उपलब्ध कराते हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, नए पौधे लगाना उपयोगी है, लेकिन वे तत्काल किसी सदियों पुराने विशाल वृक्ष के बराबर पर्यावरणीय लाभ नहीं दे सकते।
विकास और विरासत संरक्षण के बीच चुनौती
गांदरबल में चिनार के पेड़ों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़क निर्माण से आगे बढ़कर कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़ गया है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला यातायात सुधार और सड़क चौड़ीकरण के लिए व्यावहारिक समाधान चाहते हैं, जबकि महबूबा मुफ्ती तथा पर्यावरण संगठन पुराने चिनारों को सुरक्षित रखने पर जोर दे रहे हैं।
फिलहाल संबंधित पेड़ों को हटाने के अंतिम प्रशासनिक आदेश या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
अब यह देखना होगा कि सरकार सड़क चौड़ीकरण के लिए वैकल्पिक योजना तैयार करती है या पुराने चिनारों को हटाने का विकल्प अपनाती है।





