जम्मू और कश्मीर

अनुच्छेद 370 पर अड़ी PDP, NC के राज्य दर्जा प्रदर्शन से महबूबा ने बनाई दूरी

Kavita2
18 July 2026 2:55 PM IST
अनुच्छेद 370 पर अड़ी PDP, NC के राज्य दर्जा प्रदर्शन से महबूबा ने बनाई दूरी
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Jammu जम्मू: जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक मुद्दों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गया है। नई दिल्ली में प्रस्तावित जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले PDP ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसे किसी भी आंदोलन का हिस्सा नहीं बनेगी, जिसमें केवल जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाई जाए और अनुच्छेद 370 की बहाली का मुद्दा शामिल न हो।

PDP अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को पत्र लिखकर अपने रुख की जानकारी दी है। दो पन्नों के इस पत्र में महबूबा ने कहा कि केवल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तक सीमित राजनीतिक अभियान से केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2019 में किए गए संवैधानिक बदलावों को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार्यता मिल सकती है।

महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में तर्क दिया कि जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक लड़ाई केवल राज्य का दर्जा वापस पाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि अनुच्छेद 370 को हटाया जाना भी इस संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि ऐसा कोई विरोध प्रदर्शन जिसका मुख्य उद्देश्य सिर्फ राज्य का दर्जा हासिल करना हो, उससे अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले की वैधता पर सवाल कमजोर पड़ सकते हैं। PDP का मानना है कि अगस्त 2019 में केंद्र सरकार द्वारा लिए गए फैसलों को चुनौती देना भी राजनीतिक एजेंडे का अहम हिस्सा होना चाहिए।

गौरतलब है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का प्रस्ताव रखा है। इस प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग बताया जा रहा है। NC लंबे समय से राज्य का दर्जा वापस दिए जाने की मांग उठाती रही है।

हालांकि, PDP ने इस प्रदर्शन से दूरी बनाकर अपनी अलग राजनीतिक लाइन स्पष्ट कर दी है। पार्टी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे से जुड़े मुद्दे को अलग करके केवल प्रशासनिक दर्जे की बहाली की मांग करना पर्याप्त नहीं है।

2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को हटाने का फैसला किया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया था। इस फैसले के बाद से जम्मू-कश्मीर की राजनीति में राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 की बहाली प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस और PDP दोनों ही जम्मू-कश्मीर की प्रमुख क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां हैं, लेकिन वर्ष 2019 के बाद से दोनों दलों के राजनीतिक रुख में अंतर देखने को मिला है। जहां NC फिलहाल राज्य का दर्जा बहाल करने को प्राथमिक मांग के रूप में उठा रही है, वहीं PDP अनुच्छेद 370 की बहाली को भी समान महत्व दे रही है।

महबूबा मुफ्ती ने अपने पत्र में यह भी संकेत दिया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की राजनीतिक आकांक्षाओं और पहचान से जुड़े मुद्दों को व्यापक रूप से उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक आंदोलन को मूल मुद्दों से हटकर सीमित दायरे में नहीं रखा जाना चाहिए।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह मतभेद जम्मू-कश्मीर में विपक्षी दलों के बीच रणनीति को लेकर अंतर को दिखाता है। जहां कुछ दल तत्काल राजनीतिक मांगों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, वहीं कुछ दल पुराने संवैधानिक मुद्दों को भी संघर्ष का हिस्सा बनाए रखना चाहते हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जंतर-मंतर प्रदर्शन में कौन-कौन से राजनीतिक दल शामिल होते हैं और आंदोलन का स्वरूप क्या रहता है। राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग जहां जम्मू-कश्मीर के कई राजनीतिक दलों का साझा मुद्दा है, वहीं अनुच्छेद 370 की बहाली पर दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

फिलहाल PDP के फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर अनुच्छेद 370 और राज्य के भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है। यह घटनाक्रम आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है।

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