जम्मू और कश्मीर

श्रीनगर में पैरामेडिक्स ने GMC के वित्तीय व्यवहार पर सवाल उठाए

Payal
23 April 2026 7:16 PM IST
श्रीनगर में पैरामेडिक्स ने GMC के वित्तीय व्यवहार पर सवाल उठाए
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Kashmir.कश्मीर: श्रीनगर के सरकारी अस्पताल, जीएमसी (गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज) पर पैरामेडिक्स ने अधिक शुल्क वसूलने का आरोप लगाया है। आरोपियों ने कहा कि अस्पताल ने चिकित्सा सेवाओं और संसाधनों के लिए अनावश्यक और असामयिक तरीके से अतिरिक्त पैसे लिए।
पैरामेडिक्स ने बताया कि कुछ विभागों में मरीजों से शुल्क लेने के नियम स्पष्ट नहीं हैं और अस्पताल प्रशासन की नीतियों में पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति कर्मचारियों और मरीजों दोनों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि आरोपों की जांच की जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने प्रारंभिक बयान में कहा कि सभी शुल्क मानक नियमों और सरकारी आदेशों के अनुसार वसूले जाते हैं। लेकिन, वे आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं।
पैरामेडिक्स संघ ने चेतावनी दी कि अगर आरोप सही पाए गए तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। संघ का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को अपने वित्तीय लेन-देन और शुल्क प्रणाली में सुधार करना चाहिए, ताकि कर्मचारियों और मरीजों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और नियमित ऑडिट का अभाव अक्सर ऐसे विवादों को जन्म देता है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन को अस्पतालों में वित्तीय प्रणाली को स्पष्ट और जनता के लिए सुलभ बनाना चाहिए।
स्थानीय मरीजों और उनके परिवारों ने भी इस मामले पर चिंता जताई। उनका कहना है कि अस्पताल से चिकित्सा सेवा प्राप्त करने के दौरान अतिरिक्त शुल्क देना कठिनाई पैदा करता है और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच पर नकारात्मक असर डालता है।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मामले की पूरी तरह से जांच की जाएगी और अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, अस्पताल में शुल्क प्रणाली और बिलिंग प्रक्रियाओं को सुधारने के उपाय किए जाएंगे।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि सरकारी अस्पतालों में वित्तीय पारदर्शिता और कर्मचारियों व मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। हाई-लेवल निरीक्षण और उचित ऑडिट प्रक्रिया को लागू करने से अस्पताल प्रशासन और कर्मचारियों के बीच विश्वास बढ़ सकता है और मरीजों की सेवा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
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